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450 साल पुरानी रामलीला में दिखेगा 70 फीट का रावण, अब ऐशबाग के मंच पर नजर आएगा AI का तिलिस्म

Published: Tue, 29 Sep 2026 05:12 PM (IST)

ऐशबाग की 450 साल पुरानी ऐतिहासिक रामलीला इस बार एआई और आधुनिक मंच तकनीक का उपयोग कर दर्शकों के सामने प्रस्तुत की जाएगी। यह आयोजन 11 अक्टूबर से शुरू होगा।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. ऐशबाग रामलीला में पहली बार एआई और आधुनिक तकनीक का उपयोग।

  2. 11 अक्टूबर से शुरू होगी 450 साल पुरानी यह ऐतिहासिक रामलीला।

  3. 70 फीट का मूविंग रावण और पीतल की प्रतिमाएं होंगी मुख्य आकर्षण।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। रामलीला का स्वरूप भले ही समय के साथ बदल रहा हो, लेकिन श्रीराम चरित मानस के पात्र, प्रसंग और संवादों का मूल भाव कायम रखा गया है। ऐशबाग रामलीला इस बार इसी परंपरा को एआई और आधुनिक मंच तकनीक से जोड़कर दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने की कव्वाली चल रही है। 11 अक्टूबर से शुरू होने वाली रामलीला के पहले को लेकर मंथन शुरू हो गया है।

करीब 450 वर्ष पुरानी परंपरा को संजोए ऐशबाग रामलीला है। इसके साथ ही 70 फीट का मूविंग रावण, बड़ी एलईडी स्क्रीन और लेजर लाइट दर्शकों के आकर्षण का केंद्र होंगे। गोस्वामी तुलसीदास की प्रेरणा से चित्रकूट, काशी और राजधानी में रामलीला की परंपरा को विस्तार मिला। चौमासा के दौरान अयोध्या से आने वाले साधु-संत ऐशबाग में ठहरते थे और दशहरे के समय यहीं रामकथा का मंचन करते थे।

नवाबी दौर में मिला संरक्षण

ऐशबाग की रामलीला के लिए अवध के तीसरे बादशाह मौलाना मुहम्मद अली शाह ने शाही खजाने से रामलीला के लिए सहायता भेजी थी। नवाब आसिफुद्दौला के दौर में भी रामलीला को बढ़ावा मिला। रामलीला और ईदगाह के लिए बराबर-बराबर साढ़े छह एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई थी। यह राजधानी की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल के तौर पर भी देखी जाती है।

1857 की क्रांति के दौरान 1857 से 1859 तक रामलीला का आयोजन बंद रहा। 1860 में ऐशबाग रामलीला समिति का गठन हुआ। तब से आयोजन की परंपरा लगातार आगे बढ़ती रही। गोस्वामी तुलसीदास ने विनय पत्रिका के कुछ अंश को यहां लिखा था। गोस्वामी तुलसीदास की विरासत को संरक्षित करने के लिए 2003 में तुलसी शोध संस्थान की शुरुआत की गई।

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श्री रामलीला समिति के अध्यक्ष हरिश्चंद्र अग्रवाल ने बताया कि पहली बार रामलीला के मंच पर पीतल से निर्मित श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, माता जानकी और हनुमान जी की करीब तीन-तीन फीट ऊंची प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। एआई के इस्तेमाल से युवाओं का आकर्षण बढ़ेगा।