20 साल का रिकॉर्ड टूटा: सई नदी का रौद्र रूप देख लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में दहशत, रातभर में घरों में घुसा पानी
सई नदी में बढ़ते जलस्तर ने लखनऊ के बंथरा क्षेत्र में 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिससे कई ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
सई नदी में 20 साल बाद रिकॉर्ड जलस्तर बढ़ा।
लखनऊ के कई गांवों में घरों और सड़कों पर पानी।
सैकड़ों बीघे फसलें डूबीं, पशुओं के चारे का संकट।
संवाद सूत्र, बंथरा। सई नदी में बढ़ते पानी एक बार फिर लोगों को डरा दिया है। रास्ते में पड़ने वाली कई सड़कें और चकरोड जलमग्न हो गए। मंगलवार को पानी गोड़वा गांव के सज्जन, विजयपाल, भइयालाल, ममता, संजय, गंगाप्रसाद, रवि, खिलाड़ी और मुकेश सहित कई ग्रामीणों के दरवाजे तक पहुंच गया था। वहीं कई लोगों के घरों के अंदर भी पानी घुस गया जिसकी वजह से उन्हें अपने घरों को खाली कर दूसरे के यहां आसरा लेना पड़ा।
बेंती स्थित स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक शौचालय के चारों ओर भी पानी जमा हो गया। ग्रामीण सुभाष ने बताया कि रात भर में पानी कई फिट अंदर गांव की तरफ बढ़ा है। उनका कहना है कि अगर इसी तरह पानी बढ़ता रहा तो समस्या विकराल होगी। यहां के हालातों ने हर किसी को डरा दिया है। पुरही प्रधान मुरलीधर दीक्षित कहते हैं कि दो दशक पहले भी इसी तरह सई नदी का जलस्तर बढ़ा था।
ग्रामीणों का कहना है कि गोड़वा में एक दिन पहले तहसील प्रशासन की टीम सर्वे करने आई थी लेकिन तब पानी इतना नहीं था। अब हालात बिगड़ गए हैं तहसील प्रशासन की टीम को इस समय आकर मौका मुआयना करना चाहिए। पानी रोकने का जो भी बंदोबस्त हो उस पर काम करें। इसके अलावा जिन किसानों की फसलें खराब हुई हैं उन्हें भी मुआवजा दिलाकर मदद की जाए।
ये गांव हुए प्रभावित: मिर्जापुर, लटऊवा, दाराब नगर, बरकोता, नेवाजीखेड़ा, गोड़वा, भटगंवा पांडेय, हुलास खेड़ा, लतीफ नगर, हरौनी, बेंती, तेरहवां, नानमऊ, गोदौली, शिवदीन खेड़ा आदि
सैकड़ों बीघे डूबी फसलें: सई के पानी ने आसपास के गांवों के किसानों की सैकड़ों बीघे धान, उड़द, मूंग और सब्जियों को डूबोकर खराब कर दिया है। जिसकी वजह से किसानों की मेहनत बेकार गई ही साथ ही उनकी लागत भी डूब गई। लोग नुकसान को लेकर चिंतित हैं ही साथ ही परिवार की साल भर खुराकी को लेकर भी परेशान हैं।
मवेशियों के सामने चारे का भी संकट: खेत खलिहानों में पानी भर जाने के बाद पशुपालकों के सामने मवेशियों के चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। लोगों का कहना है कि सूखा भूसा इतना महंगा है कि उसी के भरोसे मवेशी पालना मुश्किल है। फिलहाल लोग अपने मवेशियों को घर में ही बांधकर सूखा भूसा खिला रहे हैं लेकिन उनके लिए यह खर्च उठाना कठिन है।
