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डॉक्टरों के फर्जी पंजीकरण की जांच स्पेशलिस्ट एजेंसी को देने की तैयारी, हरियाणा-MP और राजस्थान से जुड़े तार

Published: Tue, 15 Sep 2026 07:48 PM (IST)

आयुर्वेदिक तथा यूनानी-तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में फर्जी पंजीकरण का दायरा बढ़ रहा है, जिसके तार हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक जुड़े मिले हैं।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. आयुष बोर्ड में फर्जी पंजीकरण का दायरा बढ़ा।

  2. 41 आयुष डॉक्टरों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज।

  3. जांच आर्थिक अपराध नियंत्रण शाखा को सौंपने की तैयारी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। आयुर्वेदिक तथा यूनानी-तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में फर्जी पंजीकरण का दायरा बढ़ता जा रहा है। 41 आयुष डाक्टरों के विरुद्ध एफआइआर के बाद लखनऊ पुलिस की प्रारंभिक जांच में कई और संदिग्ध पंजीकरण सामने आए हैं। इनके तार हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच विशेषज्ञ एजेंसी को सौंपने की तैयारी है। लखनऊ पुलिस ने पुलिस महानिदेशक को पूरे मामले से अवगत कराया है। शासन आर्थिक अपराध नियंत्रण शाखा (ईओडब्ल्यू) को जांच सौंपने पर विचार कर रहा है।

बोर्ड में पंजीकरण में गड़बड़ी की शिकायतें लंबे समय से मिलती रही हैं। करीब तीन वर्ष पहले रामपुर के एक छात्र की शिकायत के बाद मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं। बोर्ड की आंतरिक जांच में कई डाक्टरों की शैक्षिक उपाधि, अंकपत्र, प्रशिक्षण अवधि, इंटर्नशिप और अन्य प्रमाणपत्रों की सत्यता संदिग्ध मिली।
जांच के आधार पर 25 अगस्त को 41 आयुष डाक्टरों के विरुद्ध हुसैनगंज कोतवाली में एफआइआर दर्ज कराई गई।

विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराने की पहल

संबंधित पंजीकरण भी निरस्त कर दिए गए। पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो दूसरे राज्यों से जुड़े कई और संदिग्ध पंजीकरण सामने आए। अधिकारियों का कहना है कि दूसरे राज्यों तक का नेटवर्क मिलने के कारण जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराने की पहल की गई है। उधर, बोर्ड स्तर पर पिछले 15 वर्षों में हुए पंजीकरणों की भी जांच और सत्यापन कराया जा रहा है।

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बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मदन गर्ब्याल ने बताया कि संदिग्ध पंजीकरणों की जांच जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों की जानकारी पुलिस को भी उपलब्ध कराई जाएगी।

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आयुर्वेदिक तथा यूनानी-तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष डा. राजेश राय ने बताया कि उन्होंने प्रकरण की सीबीआइ जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।