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जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का बड़ा एक्शन, 416 करोड़ के ब्लैक मनी एंगल पर जांच तेज; अब नए केस की तैयारी

Published: Thu, 15 Oct 2026 05:30 AM (IST)

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन में मनी लॉन्ड्रिंग का नया केस दर्ज करने ...और पढ़ें

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HighLights

  1. ईडी जौहर यूनिवर्सिटी पर नया मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज करेगी।

  2. निर्माण लागत में 416 करोड़ रुपये का बड़ा अंतर मिला।

  3. आजम खान से पूछताछ, अवैध संपत्तियों की जब्ती संभव।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अब मनी लांड्रिंग का नया केस दर्ज करने की तैयारी में है। ईडी की जांच में सामने आए वित्तीय दस्तावेजों और लेन-देन की कड़ियों के आधार पर पीएमएलए के तहत एफआईआर दर्ज किए जाने की संभावना है। केस दर्ज होने के बाद जांच में अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

ईडी की जांच में जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण पर दिखाई गई लागत और जांच में सामने आए खर्च के बीच बड़ा अंतर मिलने की बात सामने आई है। जांच के अनुसार, ट्रस्ट के रिकॉर्ड में यूनिवर्सिटी के निर्माण पर करीब 78 करोड़ रुपये खर्च होना बताया गया, जबकि ईडी की पड़ताल में निर्माण पर करीब 494 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।

ईडी की पड़ताल जारी

ऐसे में करीब 416 करोड़ रुपये के अंतर की राशि के स्रोत को लेकर जांच की जा रही है। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि निर्माण में इस्तेमाल हुई अतिरिक्त राशि कहां से आई और उसका स्रोत क्या था।

जांच में यूनिवर्सिटी निर्माण से जुड़े ठेकों और सामग्री की खरीद का ब्योरा भी खंगाला गया है। ईडी की पड़ताल के अनुसार, संबंधित ठेकेदारों को करीब 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके दिए जाने और करीब 55.8 करोड़ रुपये की सामग्री यूनिवर्सिटी में इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिली है। जांच एजेंसी इन लेन-देन का यूनिवर्सिटी निर्माण में हुए खर्च से मिलान कर रही है।

ईडी के अनुसार, जल निगम से जुड़े करीब 23.41 करोड़ रुपये के धन के निजी परिसर में निर्माण में इस्तेमाल किए जाने और करीब 6.60 करोड़ रुपये की विधायक निधि के कथित दुरुपयोग के तथ्यों की भी जांच की जा रही है। इन धनराशियों के इस्तेमाल, संबंधित कार्यों और भुगतान की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज ईडी की जांच का हिस्सा हैं।

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हालांकि, इन मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। इसी जांच के क्रम में ईडी ने मंगलवार को रामपुर जिला कारागार में आजम खान से पूछताछ की। ईडी को पीएमएलए कोर्ट से 16 अक्टूबर तक आजम खान से पूछताछ की अनुमति मिली है।
ईडी सूत्रों के अनुसार, जांच में यदि धन के अपराध से जुड़े होने के पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो पीएमएलए के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद जांच में अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उनके अस्थायी या स्थायी जब्ती की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।