आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय की 426 करोड़ की संपत्ति कुर्क, बाजार में कीमत 1170 करोड़ रुपये
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय की 426 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है, जिसका बाजार मूल्य 1170 करोड़ रुपये आंका गया है।

HighLights
ईडी ने आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय की संपत्ति कुर्क की।
कुर्क संपत्ति का मूल्य 426 करोड़, बाजार में 1170 करोड़।
धनशोधन जांच में निर्माण खर्च और आय में अंतर मिला।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। कुर्क की गई संपत्ति का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि इसका वर्तमान बाजार मूल्य करीब 1170 करोड़ रुपये आंका गया है।
ईडी ने यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां और अन्य के विरुद्ध चल रही धनशोधन जांच के तहत की है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय के अनुसार, जांच में विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण पर हुए खर्च और ट्रस्ट की ओर से घोषित पूंजीगत व्यय में बड़ा अंतर मिला है।
विश्वविद्यालय परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अधीन है। आजम खां ने ट्रस्ट की स्थापना की थी और वह विश्वविद्यालय के मानद कुलाधिपति भी हैं। जांच में सरकारी निर्माण कार्यों के धन का कथित दुरुपयोग कर विश्वविद्यालय परिसर तैयार कराने और ठेकेदारों के माध्यम से रकम ट्रस्ट तक पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं।
ट्रस्ट नहीं दे पाया ब्योरा, ईडी ने की कुर्की
जिला मूल्यांकन अधिकारी की 10 नवंबर, 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय की 59 इमारतों के निर्माण की लागत 494.46 करोड़ रुपये और 114 विक्रय विलेखों से अर्जित जमीन का मूल्य 4.63 करोड़ रुपये आंका गया। इस तरह परिसर की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये बैठती है। इसके मुकाबले ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दिखाया था। ईडी के अनुसार, इसमें 12.29 करोड़ रुपये के दान को गैर-वास्तविक पाया गया।
इस तरह वास्तविक व्यय 66.03 करोड़ रुपये रह गया। अन्य वैध स्रोतों सहित कुल 72.63 करोड़ रुपये का ही हिसाब मिल सका। शेष 426.46 करोड़ रुपये के स्रोत का ट्रस्ट के पदाधिकारी संतोषजनक ब्योरा नहीं दे सके। ईडी ने इसी राशि को अपराध से अर्जित आय मानते हुए संबंधित संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है।
करीब 186 करोड़ रुपये के लोक निर्माण विभाग के ठेके पाने वाली एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने बताया कि ठेका मूल्य का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में लगाया गया। एक अन्य फर्म के साझेदारों ने ट्रस्ट को 40 लाख रुपये दान देने की बात स्वीकार की। ईडी ने यह भी बताया कि आयकर विभाग ट्रस्ट का पंजीकरण निरस्त कर चुका है।
निधि के रकम के लिए बदले गए नियम
जांच में विधायक एवं विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से विश्वविद्यालय परिसर में 6.60 करोड़ रुपये के कार्य कराने का मामला भी सामने आया। इसके अलावा, राज्य सरकार से पंडाल, अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए 23.41 करोड़ रुपये की स्वीकृति का उल्लेख है।
ईडी को जांच मिला कि सरकारी शर्तों के विपरीत वर्ष 2016 में पंडाल का स्वामित्व विश्वविद्यालय को हस्तांतरित कर दिया गया और राज्य सरकार के निश्शुल्क उपयोग की शर्त हटा दी गई।
26 दर्ज मुकदमों पर शुरू हुई थी जांच
ईडी ने किसानों की जमीन पर कथित कब्जे से संबंधित 26 प्राथमिकी के आधार पर धनशोधन की जांच शुरू की थी। सिंहनखेड़ा गांव में करीब 34 एकड़ क्षेत्र में फैले 45 भूखंडों पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया। लीज निरस्त होने के बाद जमीन का कब्जा शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक ने जिला प्रशासन के माध्यम से वापस लिया।
इसके अतिरिक्त रामपुर पुलिस की 28 अन्य प्राथमिकी में मकान गिराने, लोगों को धमकाने और नगर पालिका की सफाई मशीनरी विश्वविद्यालय परिसर में इस्तेमाल करने जैसे आरोप हैं। ईडी ने इसी वर्ष 19 अगस्त को विश्वविद्यालय और संबंधित परिसरों पर तलाशी लेकर इलेक्ट्रानिक उपकरण तथा दस्तावेज जब्त किए थे।
