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लखनऊ में डबल मर्डर, 50 लाख की फिरौती न देने पर हुई KGMU के नर्सिंग अधीक्षक और उनके साथी की हत्या

Published: Fri, 02 Oct 2026 07:22 PM (IST)

Lucknow Crime: मिठाई दुकानदार नितिन मिश्रा ने पवन कुमार गर्ग और उनके साथी सचिन विश्वकर्मा को प्रापर्टी दिखाने के बहाने अपने चार साथियों के साथ मिलकर अगवा किया।

पुलिस की गिरफ्त में हत्या के पांचों आरोपित। आसमानी शर्ट में हत्या का मुख्य आरोपित नितिन।

पुलिस की गिरफ्त में हत्या के पांचों आरोपित। आसमानी शर्ट में हत्या का मुख्य आरोपित नितिन।

HighLights

  1. प्रापर्टी दिखाने के बहाने बुलाया, निर्माणाधीन मकान में एक दिन बंधक बनाकर रखा

  2. रस्सी से गला घोंटकर शव घाघरा में फेंके, तलाश जारी मड़ियांव पुलिस ने किया राजफाश

जागरण संवाददाता, लखनऊ: राजधानी लखनऊ में डबल मर्डर से सनसनी फैल गई है। लापता केजीएमयू के नर्सिंग अधीक्षक पवन कुमार गर्ग और उनके साथी सचिन विश्वकर्मा की हत्या 50 लाख रुपये की फिरौती के लिए की गई थी। इसमें शामिल पांचों आरोपितों को पुलिस ने भिठौली तिराहे से गिरफ्तार कर लिया है।

मिठाई दुकानदार नितिन मिश्रा ने पवन कुमार गर्ग और उनके साथी सचिन विश्वकर्मा को प्रापर्टी दिखाने के बहाने अपने चार साथियों के साथ मिलकर अगवा किया। एक दिन निर्माणाधीन मकान में अलग-अलग कमरों में बंधक बनाकर 50 लाख रुपये मांगे गए। रकम देने से इनकार करने पर आरोपितों ने रस्सी से दोनों का गला घोंट दिया। इसके बाद थार से शव महमूदाबाद के चलहरी घाट ले जाकर घाघरा नदी में पुल के ऊपर से फेंक दिए। दोनों के शव की तलाश जारी है।

इंस्पेक्टर मड़ियांव शिवानंद मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित इटौंजा के लोधौली निवासी नितिन मिश्रा, अजीत पुलिया माल निवासी अवनीश, प्रकाश सिंह, सूरज सिंह और मोहित सिंह है। बताया कि पवन को इटौंजा के लोधौली निवासी मिठाई दुकानदार नितिन पहले से जानता था। पवन ने उससे जमीन खरीदने के लिए 50-60 लाख रुपये होने की बात कही थी और अच्छी प्रापर्टी दिखाने को कहा था।

इतनी बड़ी रकम की जानकारी मिलते ही नितिन ने प्रकाश सिंह उर्फ पुद्दी, सूरज सिंह, मोहित सिंह और अवनीश कुमार मौर्य के साथ मिलकर अपहरण और फिरौती की साजिश रच डाली। नितिन ने पवन को 27 सितंबर की रात भिठौली क्रासिंग पर बुलाया। पवन अपने दोस्त सचिन के साथ पहुंचे। दोनों को इटौंजा के न्यू फौजी ढाबा ले जाया गया। वहां शराब पीने के दौरान कहासुनी के बाद आरोपित उन्हें अन्नामऊ स्थित निर्माणाधीन मकान में ले गए और बंधक बना लिया।

आरोपितों ने पवन से 50 लाख रुपये मांगे। पकड़े जाने के डर से पवन की ब्रेजा कार सीतापुर के कमलापुर गांव में खड़ी कर दी गई, ताकि जांच को भटकाया जा सके। 28 सितंबर दोपहर करीब 12 बजे तक रकम न मिलने पर आरोपितों ने दोनों की रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद शाम शव थार में लादे और चलहरी घाट पहुंचकर घाघरा नदी में फेंक दिए।

पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से पवन और सचिन की सोने की चेन, अंगूठियां, पवन का ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड व बैंक स्टेटमेंट की प्रतियां बरामद की हैं। शवों को ले जाने में इस्तेमाल थार और हुंडई कार भी जब्त की गई हैं।

गुमशुदगी से खुला हत्या का राज

पवन के भाई संजय गर्ग ने 29 सितंबर को मड़ियांव थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस ने सीसी टीवी और टोल प्लाजा के रिकार्ड खंगाले तो उनकी कार की लोकेशन और आरोपितों की गतिविधियां सामने आईं। दो अक्टूबर को पवन के भाई मनोज कुमार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया।

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