यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 04, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
फितूर या साजिश: मंकी मैन और मुंहनोचवा की याद दिला रहा चोटीकटवा
मंकीमैन और मुंहनोचवा की तरह ही चोटीकटवा की घटनाएं सामने हैं। चोटी काटने की घटनाओं के बाद पुलिस ने अफवाह पर अंकुश की तैयारी कर ली है।

लखनऊ (जेएनएन)। मंकी मैन और मुंहनोचवा की नए सिरे से याद दिलाने वाला एक वाक्या अब चोटीकटवा के रूप में सामने हैं। चोटी काटने की कुछ घटनाओं के बाद पुलिस ने चोटीकटवा की अफवाह पर अंकुश लगाने के लिए कमर कस ली है।
फिलहाल वह प्रदेश में ऐसे नौ मामले मानकर चल रही हैं जिनमें किसी न किसी महिला की चोटी कटी है। पुलिस ने इसे कुछ अराजकतत्वों की हरकत बताया। यह कितना फितूर और कितनी साजिश है पुलिस इस सवाल सवाल का जवाब तलाशने में लगी है।
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उड़ती रहीं खौफ की अफवाहें
समय-समय पर ऐसी घटनाएं होती रही हैं जब लोगों के मन मस्तिष्क पर सच की बजाय अफवाहों का प्रभाव देखने को मिला। बाद में वैज्ञानिकों ने सच उजागर किया। हालांकि खौफ की अफवाहें उड़ती रही हैं। दशक पहले मुंहनोचवा ने पूरे प्रदेश की नींद उड़ा दी थी। बाद में मुंहनोचवा सिरे से गायब हो गया। आज तक पता नहीं कि मुंहनोचवा कौन था।
इसी तरह मंकीमैन की भी दहशत खूब चली थी। मंकी मैन की दहशत में कुछ लोग अपनी जान गंवा बैठे थे। फिर भी भ्रम और संशय में हुई इन घटनाओं से लोगों ने सबक नहीं लिया। अब चोटीकटवा की दहशत कई राज्यों से उत्तर प्रदेश के पश्चिम से पूर्वांचल तक पहुंच गई है। पुलिस ने नौ घटनाएं गिनाई लेकिन मामले कई हैं।
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मामलों की तह में जाने के निर्देश
डीजीपी ने महिलाओं की चोटी काटने के मामलों की तह तक जाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसी घटनाओं के सही तथ्य सामने लाकर लोगों की दहशत दूर की जाए। इसमें ग्राम सुरक्षा समितियों की भी मदद ली जाए। आइजी (कानून व्यवस्था) हरीराम शर्मा ने बताया कि पुलिस के पास ऐसे नौ मामलों की रिपोर्ट हुई है।
इसमें बुलंदशहर के दो मामले हैं। इसके अलावा कासगंज, हमीरपुर, हाथरस, बिजनौर, गाजियाबाद, गोरखपुर, आगरा में एक-एक घटनाएं पुलिस के सामने आई हैं। आगरा, गोरखपुर और दिल्ली में ऐसे मामलों की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। एसएसपी और एसपी को निर्देश दिया गया है कि इस तरह की घटनाओं में शामिल अराजक तत्वों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएं।
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खुफिया मशीनरी सक्रिय
डीजी इंटेलीजेंस भवेश कुमार सिंह ने प्रदेश भर की अभिसूचना इकाइयों को इन घटनाओं की असलियत का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंप दी हैं। एलआइयू के अधिकारी संबंधित इलाकों में भ्रमण कर सच्चाई का पता लगा रहे हैं। इसके अलावा सिविल डिफेंस, एनसीसी और कम्युनिटी पुलिस से जुड़े डिजिटल वालंटियर आदि को भी सक्रिय किया जा रहा है।
