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लखनऊ में 6.37 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी, CBI कोर्ट ने एलआईसी कर्मी को सुनाई दस वर्ष कैद की सजा

Published: Thu, 01 Oct 2026 03:11 PM (GMT+05:30)

Fraud in Lucknow: सीबीआई कोर्ट ने 6.37 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में एलआईसी असिस्टेंट को दस वर्ष कठोर कैद ...और पढ़ें

लखनऊ की सीबीआई कोर्ट

लखनऊ की सीबीआई कोर्ट

HighLights

  1. एलआईसी कर्मी के मददगार तीन लोगों को भी तीन-तीन वर्ष कारावास

  2. लखनऊ में जानकीपुरम ब्रांच के चीफ मैनेजर की शिकायत पर दर्ज किया था केस

डिजिटल डेस्क, लखनऊ: राजधानी लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने 6.37 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए बुधवार को सजा सुनाई। इनमें एक एलआईसी कर्मी के साथ तीन अन्य लोग हैं।

LIC, ट्रांसगोमती ब्रांच, जानकीपुरम, लखनऊ में हायर ग्रेड असिस्टेंट पंकज सक्सेना के साथ प्रेम शंकर उपाध्याय, श्रीमती रेखा उपाध्याय और मनीष सक्सेना 6.37 करोड़ की धोखाधड़ी में शामिल होने पर सजा सुनाई गई है। पंकज सक्सेना को दस वर्ष कठोर कारावास और प्रेम शंकर उपाध्याय, श्रीमती रेखा उपाध्याय और मनीष सक्सेना को तीन-तीन वर्ष कठोर कैद की सजा के साथ सभी पर 1.25 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है।
लखनऊ में CBI ने यह मामला LIC, ट्रांसगोमती ब्रांच, जानकीपुरम, लखनऊ के चीफ मैनेजर की शिकायत पर 13 अगस्त को केस दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के दौरान, आरोपियों ने आपस में मिलीभगत करके नकली/अस्तित्वहीन पॉलिसीधारकों के नाम पर फर्जी पेमेंट वाउचर और चेक तैयार किए और धोखाधड़ी से LIC का फंड दूसरी जगह ट्रांसफर किया। जिससे एलआईसी को लगभग 6,37,66,660 रुपये की वित्तीय हानि हुई थी। इस प्रकरण की जांच पूरी होने के बाद CBI ने 21 अगस्त 2014 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। जिसमें LIC, ट्रांसगोमती ब्रांच, जानकीपुरम, लखनऊ के अधिकारी भी शामिल थे। कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपियों को दोषी ठहराया और उसी के अनुसार सजा सुनाई।

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