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ED के दफ्तर में CBI का छापा: लखनऊ में 3.50 लाख की रिश्वत मामले में ईडी के अधिकारियों की भूमिका की होगी जांच

Published: Sat, 24 Oct 2026 10:52 PM (GMT+05:30)

प्रवर्तन निदेशालय के लखनऊ कार्यालय में एक प्रवर्तन अधिकारी और हेड कांस्टेबल को 5 लाख रुपये की रिश्वतखोरी के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. ईडी के दो अधिकारी रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार।

  2. सीबीआई ने दिल्ली में हेड कांस्टेबल को रंगे हाथ पकड़ा।

  3. बैंक धोखाधड़ी मामले में राहत के लिए मांगी थी रिश्वत।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय में तैनात प्रवर्तन अधिकारी और हेड कांस्टेबल की पांच लाख रुपये की कथित रिश्वतखोरी में गिरफ्तारी से जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं।

सीबीआई अब इस मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपितों के साथ ईडी के अज्ञात अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। शिकायतकर्ता के पिता को बीते दो महीनों में बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में ईडी की ओर से दो समन जारी किए गए थे। इसी प्रकरण में राहत दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप है।

CBI ने रिश्वत लेते किया था गिरफ्तार

सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाकर शुक्रवार को हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी को दिल्ली में साढ़े तीन लाख रुपये रिश्वत की रकम लेते पकड़ा गया। आरोप है कि वह प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार की ओर से रकम ले रहा था।

इसके बाद सीबीआई की टीम ने लखनऊ स्थित ईडी कार्यालय से दीपक कुमार को भी गिरफ्तार किया। मनोज द्विवेदी मूल रूप से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में तैनात है और प्रतिनियुक्ति पर ईडी में काम कर रहा था। दोनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

सीबीआई पहले भी कर चुकी है कार्रवाई

सीबीआई ने प्राथमिकी में अज्ञात ईडी अधिकारियों को भी शामिल किया है। जांच एजेंसी रिश्वत की मांग और कथित लेनदेन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। लखनऊ में ईडी से जुड़े रिश्वतखोरी के मामले में पहले भी सीबीआई कार्रवाई कर चुकी है।

जून 2017 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की जांच से जुड़े मामले में ईडी के तत्कालीन सहायक निदेशक एनबी सिंह और उनके सहयोगी को कथित रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस प्रकरण में जांच में राहत देने के नाम पर 50 लाख रुपये मांगने और चार लाख रुपये लेते पकड़े जाने का आरोप था।

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