नाम तो बड़े-बड़े… बस दर्शन छोटे न हो तो बेहतर, Budget 2026-27 पर बसपा सुप्रीमो मायावती का केंद्र पर निशाना
Mayawati on Budget 2026-27: बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने आम बजट पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर ...और पढ़ें

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती
HighLights
बसपा मुखिया ने केंद्र सरकार की नीयत और नीति पर सवाल खड़े किए
पिछले बजट के दावों और वादों की प्रगति पर भी सरकार से जवाब मांगा
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार की नीयत और नीति पर सवाल खड़े किए हैं।
मायावती ने कहा कि कहीं यह बजट भी पहले की तरह ‘आया और गया’ वाला मायूस करने वाला न बन जाए। इसके साथ ही पिछले बजट में किए गए दावों और वादों की प्रगति पर भी सरकार से जवाब मांगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश का आम बजट संसद में पेश किया। इस बजट को लेकर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आज बजट पर सवाल भी उठाए हैं और इशारों-इशारों में सरकार पर तंज भी कसा है।
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि बजट में योजनाओं, परियोजनाओं और वादों के नाम तो बड़े-बड़े हैं, लेकिन अगर उनका असर जमीनी स्तर पर नहीं दिखा तो यह सर्वसमाज के हित में नहीं होगा। केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि सही नीयत से उनका अमल जरूरी है।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि वैसे तो केंद्र सरकार का बजट सत्ताधारी पार्टी की नीति व नीयत में चाल, चरित्र व चेहरे का आईना होता है। जिसमें यह झलक मिलती है कि सरकार की सोच वास्तव में गरीब व बहुजन-हितैषी होकर व्यापक देशहित की है या फिर पूंजीवादी सोच की पोषक बड़े-बड़े पूंजीपति व धन्नासेठ समर्थक हैं।
भाजपा सरकार को इस पर भी बताना चाहिए कि यह बजट आम गरीब जनता को कितना राहत देगी। सर्वसमाज के हित में केवल बातें ना हो बल्कि इनपर सही नीयत से अमल भी जरूरी होना चाहिए।
मायावती ने कहा कि देश की संसद में आज केंद्र सरकार के बजट में विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं, वादों और आश्वासनों के संबंध में भविष्य में इनके परिणामों को लेकर यही लगता है कि इनके नाम तो बड़े-बड़े हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनके दर्शन छोटे ना हो तो बेहतर होगा। सर्वसमाज के हित में केवल बातें ना हो बल्कि इनपर सही नीयत से अमल भी जरूरी है।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इतना ही नहीं खासकर अपने भारत देश के सन्दर्भ में इस बात का भी विशेष महत्व है कि सरकार की नीति दीर्घकाल में आत्मनिर्भरता की अगर है तो उसके लिए सरकारी क्षेत्र को कितना महत्व देकर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कल्याणकारी संविधान के पवित्र मंशा के हिसाब से क्या कार्य किया गया है।
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पिछले वर्ष के बजट पर सवाल
मायावती ने सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले वर्ष के बजट में सरकार के दावे, वादे और आशाएं क्या आज पूरी की गई है। या फिर एक रस्म को निभा कर रह गई है। उन्होंने कहा कि यह भी देखना जरूरी है कि क्या आम लोगों के जीवन में कोई वास्तविक बदलाव आया है।
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उन्होंने कहा कि वास्तव में जीडीपी से अधिक लोगों के जीवन में बहु-अपेक्षित विकास व बहु-प्रतीक्षित गुणात्मक परिवर्तन है जो सीधे तौर पर व्यापक जनहित व देशहित से जुड़े हैं। जिनका आकलन वर्तमान बजट की वाहवाही से पहले जरूर कर लेना है। सरकार भी इस पर कुछ रोशनी डाले तो यह लोगों के अच्छे दिन के लिए अच्छी बात है वरना यह जिम्मेदारी कौन निभाएगा।
