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उत्तर प्रदेश के विकास को गति देगा Budget 2026-27, इन्फ्रास्ट्रक्चर से लेकर किसानों-महिलाओं तक फोकस

By Digital Desk Edited By: Dharmendra Pandey
Published: Sun, 01 Feb 2026 06:00 PM (IST)

Budget 2026-27: पूर्वांचल, काशी क्षेत्र, बुंदेलखंड और टियर-2 व टियर-3 शहरों के लिए ये योजनाएं क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 

HighLights

  1. सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) योजना से प्रदेश के टियर-2 व टियर-3 शहरों का होगा समग्र विकास

  2. ₹12.2 लाख करोड़ के रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर से यूपी में इन्फ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती

  3. शी-मार्ट्स के जरिए यूपी के महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा नया बाजार

  4. सभी जिले में गर्ल्स हॉस्टल व जिला अस्पतालों के सुविधा विस्तार से स्वास्थ्य-शिक्षा ढांचे को मिलेगी मजबूती

डिजिटल डेस्क, जागरण, लखनऊ : भारत सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश के बजट पेश किया। केंद्र सरकार का बजट 2026–27 उत्तर प्रदेश के विकास को नई गति देगा।

इस बजट में उत्तर प्रदेश के आर्थिक, औद्योगिक व सामाजिक परिदृश्य को सशक्त करने वाली कई दूरगामी घोषणाएं की गई हैं। इसके साथ ही आधुनिक कनेक्टिविटी, बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश और रोजगारोन्मुखी योजनाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को और प्रभावी तरीके से निभा सकेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बजट को काफी सराहा है।

केंद्र सरकार के बजट 2026-27 में किसान, महिला, युवा, कारीगर व छोटे उद्यमियों को केंद्र में रखते हुए समावेशी विकास का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। विशेष रूप से पूर्वांचल, काशी क्षेत्र, बुंदेलखंड और टियर-2 व टियर-3 शहरों के लिए ये योजनाएं क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, निवेश व आर्थिक गतिविधियों को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगी।

सिटी इकोनॉमिक रीजन से शहरों का समग्र विकास

केंद्रीय बजट 2026–27 में टियर-2 और टियर-3 शहरों को विकास की मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) योजना की शुरुआत की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत बड़े महानगरों पर निर्भरता कम करते हुए पांच लाख से ज्यादा आबादी वाले अन्य शहरों में बुनियादी ढांचे व आर्थिक गतिविधियों को सुदृढ़ किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और झांसी जैसे प्रमुख शहरों को इस योजना का सीधा लाभ मिल सकता है। आगामी पांच वर्षों में प्रत्येक सिटी इकोनॉमिक रीजन के लिए लगभग ₹5000 करोड़ तक का चरणबद्ध निवेश प्रस्तावित है। इस निवेश से इन शहरों और उनके आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक क्लस्टर, स्टार्टअप हब, लॉजिस्टिक्स पार्क और सेवा क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। साथ ही शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, आवास, सार्वजनिक परिवहन और डिजिटल कनेक्टिविटी को भी आधुनिक बनाया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और निजी निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

इन्फ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश

केंद्रीय बजट में देशभर में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए ₹12.2 लाख करोड़ के रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) की घोषणा की गई है, जिसका सीधा व अप्रत्यक्ष लाभ उत्तर प्रदेश को भी मिलेगा। केंद्र सरकार के इस कैपेक्स का उद्देश्य आर्थिक विकास को रफ्तार देना, रोजगार सृजन करना और भारत को वैश्विक निवेश का आकर्षक केंद्र बनाना है।

उत्तर प्रदेश में इस निवेश से सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे, रेलवे नेटवर्क और लॉजिस्टिक हब के विस्तार को नई गति मिलेगी। राज्य का पहले से मजबूत होता एक्सप्रेसवे नेटवर्क (पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और लिंक एक्सप्रेसवे) औद्योगिक कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ करेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से माल और यात्रियों की आवाजाही सुगम होगी, जिससे उद्योगों की लॉजिस्टिक लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।

इसके साथ ही डिफेंस कॉरिडोर, औद्योगिक क्षेत्रों और लॉजिस्टिक पार्कों में निवेश बढ़ने से यूपी की सामरिक और औद्योगिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। रेलवे और मल्टीमोडेल लॉजिस्टिक्स के विकास से राज्य उत्तर भारत के एक प्रमुख ट्रांजिट और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरेगा।

किसानों, महिलाओं व युवाओं पर विशेष ध्यान

केंद्रीय बजट में समावेशी विकास को प्राथमिकता देते हुए किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष योजनाओं की घोषणा की गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित “भारत-विस्तार" (Bharat-VISTAAR) योजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि से जोड़ा जाएगा।

इससे राज्य के अन्नदाता किसानों को मौसम, मिट्टी, फसल चक्र और बाजार की मांग के अनुरूप सटीक कृषि सलाह उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे फसल जोखिम कम होगा और राज्य के खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि संभव होगी। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को लाभ मिलेगा, जो परंपरागत खेती पर निर्भर हैं।

बजट में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए शी-मार्ट्स (SHE-Marts) की शुरुआत की गई है। इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से प्रदेश के महिला स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों के विपणन, ब्रांडिंग और बिक्री का संगठित अवसर मिलेगा। इससे ग्रामीण महिलाओं की उद्यमशीलता को बढ़ावा मिलेगा और उन्हें स्थायी आय का स्रोत प्राप्त होगा।

इन पहलों से युवाओं को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। कृषि-तकनीक, डिजिटल मार्केटिंग, लॉजिस्टिक्स और उद्यमिता से जुड़े नए अवसर सृजित होंगे, जिससे ग्रामीण और शहरी युवाओं के लिए स्वरोजगार और कौशल आधारित रोजगार के रास्ते खुलेंगे।