बसपा अध्यक्ष मायावती की देश में सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग, SIR को लेकर भी कह दी बड़ी बात
Mayawati: मायावती ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर मतदाता के मन में संदेह पैदा होने से लोकतंत्र पर उसका भरोसा कमजोर होगा।

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती
HighLights
बसपा सुप्रीमो की मांग, ईवीएम से सभी चुनाव तुरंत बंद कराए आयोग
मायावती ने चंद्रशेखर को बताया बीजेपी का एजेंट
देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर सभी का विश्वास दोबारा कायम करने की मांग
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों के बड़े विरोध के बीच में बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने नया राग छेड़ दिया है। बसपा मुखिया मायावती ने चुनाव आयोग से सभी चुनाव ईवीएम से कराने की मांग की है।
बसपा ऑफिस में उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम मायावती ने सोमवार को न्यूज एजेंसियों से वार्ता में ईवीएम पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि बसपा शुरू से ही ईवीएम के इस्तेमाल का विरोध करती रही है। बैलेट पेपर से वोटिंग कराने के लिए पार्टी सुप्रीम कोर्ट गई थी। देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को लेकर लोगों के मन में किसी तरह का संदेह नहीं रहना चाहिए। वोटर जिसको वोट दे रहा, उस वोट की गिनती भी उसी के पक्ष में होना चाहिए न कि दूसरे में उसे गिना जाए।
बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर सभी का विश्वास दोबारा कायम हो सके इसके लिए बीएसपी की यह मांग है कि EVM से चुनाव तुरंत बंद किया जाए और बैलेट पेपर से ही वोट डालने की प्रक्रिया शुरू हो। SIR को लेकर जो भी भ्रांतियां फैली हुई हैं, उन्हें भी जरूर दूर किया जाये।
वोटर ने जिसको वोट किया उसी के पक्ष में गिनती भी हो
मायावती ने कहा कि संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार दिया है। इसी अधिकार के जरिए जनता अपनी पसंद की सरकार चुनती है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हर मतदाता को अपनी पसंद के उम्मीदवार या पार्टी को वोट देने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और उसका वोट उसी के पक्ष में गिना जाना चाहिए, जिसके पक्ष में उसने मतदान किया है। मतदाता के मन में यह संदेह नहीं होना चाहिए कि उसका वोट किसी दूसरे के खाते में चला गया या उसकी गिनती किसी और के पक्ष में हुई।
लोकतंत्र पर लोगों का भरोसा खत्म होगा
मायावती ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर मतदाता के मन में संदेह पैदा होने से लोकतंत्र पर उसका भरोसा कमजोर होगा। चुनाव आयोग को ऐसी सभी भ्रांतियों को दूर करना चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास चुनाव प्रक्रिया में बना रहे। देश में करीब पांच दशक तक बैलेट पेपर से चुनाव होते रहे। मतदान के बाद मतपत्रों को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोला और गिना जाता था। बाद में ईवीएम के जरिए मतदान की व्यवस्था शुरू हुई। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भाजपा ने भी ईवीएम को लेकर सवाल उठाए थे।
दलित-पिछड़ों के वोट प्रभावित होने की आशंका
मायावती ने कहा कि बसपा देश के दबे-कुचले, दलित और अति पिछड़े वर्ग के लोगों के हितों के लिए बनी है। ईवीएम के कारण इन वर्गों के वोटों को लेकर लोगों के मन में आशंका बनी हुई है।पार्टी समर्थकों के बीच ईवीएम को लेकर विश्वास की कमी से मतदान के प्रति रुझान भी प्रभावित हो रहा है।
VVPAT को लेकर भी सवाल
बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी ने ईवीएम की चुनाव प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद ईवीएम के साथ VVPAT की व्यवस्था लागू की गई। उन्होंने कहा कि इससे भी उनकी आशंकाएं दूर नहीं हुई हैं। ईवीएम से मतों की गिनती के दौरान VVPAT की सभी पर्चियों की गिनती नहीं होती। इससे मतदाता को यह पूरी तरह विश्वास दिलाना संभव नहीं है कि उसका वोट उसी उम्मीदवार या पार्टी के खाते में गया है, जिसके पक्ष में उसने मतदान किया था। किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मशीन को लेकर आशंका पैदा हो सकती है। इसलिए चुनाव आयोग को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे मतदाता को अपने वोट की शुचिता और सही गिनती को लेकर पूरा भरोसा हो।
आजाद समाज पार्टी के सांसद का कोई जनाधार नहीं
मायावती ने कहा कि आजाद समाज पार्टी के सांसद का कोई जनाधार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने EVM में धांधली कराकर चंद्रशेखर आजाद को नगीना से जितवाया। उनका एक ही काम है, धरना प्रदर्शन कराकर युवाओं पर केस करवाते हैं। मायावती ने दलित समाज से अपील की कि वे नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के बहकावे में न आएं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सक्रिय है और हाल में कई सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा भी कर चुकी है।
भाजपा के इशारे पर काम करते हैं चंद्रशेखर
मायावती ने दावा किया कि चंद्रशेखर आजाद का नगीना में कोई खास जनाधार नहीं था, इसके बावजूद वे चुनाव जीत गए। उन्होंने आरोप लगाया कि ईवीएम में गड़बड़ी के जरिए उन्हें चुनाव जिताया गया। वह भाजपा के इशारे पर काम करते हैं। वह अधिकारियों से मिलने और धरना-प्रदर्शन करने पहुंच जाते हैं। युवाओं को गुमराह करते हैं। इसके बाद ये युवा कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंसकर अपना भविष्य बर्बाद करने को मजबूर हो जाते हैं।
