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नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को चुनाव के मैदान में उतार रही BSP, वेस्ट यूपी में 28 से शुरू करेंगे पार्टी की रैली

Published: Fri, 16 Oct 2026 07:22 PM (IST)

BSP-Akash Anand: बसपा मुखिया मायावती से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के बाद पार्टी में चौथी बार वापसी करने वाला ...और पढ़ें

बहुजन समाज पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद

बहुजन समाज पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद 

HighLights

  1. प्रत्याशियों के नामों की घोषणा के साथ करेंगे सियासी जनाधार मजबूत

  2. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर बसपा जमीन कर रही तैयार

डिजिटल डेस्क, लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती से आशीर्वाद और नेशनल कोऑर्डिनेटर का पद मिलने के बाद आकाश आनंद फिर से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होने जा रहे है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बेहद गंभीर बसपा आकाश आनंद यूपी की सियासी जमीन पर उतरने जा रहे हैं।

आकाश आनंद 28 अक्टूबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करने के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में रैली करने जा रहे हैं। इस अभियान के तहत वह पार्टी प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करने के साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के सियासी जनाधार को फिर से मजबूत करने की कमान संभालेंगे।

बसपा में चौथी बार वापसी के बाद आकाश आनंद को पार्टी प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश व पंजाब के साथ उत्तराखंड में जनसभाओं की जिम्मेदारी सौंपी है। दो महीने में आकाश की सात सभाएं प्रस्तावित हैं। इसके अलावा कई विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशी भी अपने यहां उनकी सभा कराने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आकाश आनंद की सक्रियता बढ़ने के संकेत हैं।

कार्यक्रम पार्टी के केंद्रीय कार्यालय की ओर से जारी

बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद का कार्यक्रम पार्टी के केंद्रीय कार्यालय की ओर से जारी किया गया है। इसके मुताबिक आकाश आनंद की 28 अक्टूबर को बुलंदशहर के अनूपशहर, 2 नवंबर को सहारनपुर के नकुड़, 20 नवंबर को अयोध्या के बीकापुर, 22 नवंबर को आगरा और 29 नवंबर को कानपुर के बिल्हौर में जनसभा होगी।

इसके साथ ही 26 नवंबर को पंजाब और छह दिसंबर को उत्तराखंड के हरिद्वार में सभा प्रस्तावित है। पंजाब में उनकी सभा का स्थान अभी तय नहीं हुआ है। इसके अलावा कई विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशी भी अपने यहां उनकी सभा कराने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आकाश आनंद की सक्रियता बढ़ने के संकेत हैं।

मायावती ने फिर जताया भरोसा

आकाश आनंद को पार्टी में वापस लेने के बाद मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी थी। इससे पहले उन्हें पार्टी से बाहर किया गया था। वापसी के बाद नौ अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि के कार्यक्रम में भी आकाश आनंद मायावती के साथ नजर आए। इस दौरान उन्होंने मायावती के प्रति सम्मान जताया।

पहले भी कर चुके हैं चुनावी सभाएं

पार्टी से फिर बाहर होने से पहले आकाश आनंद ने हाथरस के सादाबाद और नोएडा में जनसभाएं की थीं। सादाबाद की सभा को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी। अब पार्टी में वापसी के बाद उन्हें फिर से अलग-अलग क्षेत्रों में भेजने की तैयारी है। बसपा में प्रत्याशियों की ओर से आकाश आनंद की सभाओं की मांग भी सामने आ रही है। पार्टी का प्रयास है कि उनकी सभाओं के जरिए कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़े और चुनाव से पहले जनसंपर्क मजबूत हो।

दलित वोट के साथ दूसरे समाजों पर भी नजर

2027 के चुनाव से पहले बसपा के सामने अपने पारंपरिक दलित जनाधार को मजबूत रखने के साथ दूसरे सामाजिक वर्गों में समर्थन बढ़ाने की चुनौती है। अनूपशहर, नकुड़, बीकापुर, आगरा और बिल्हौर में प्रस्तावित सभाएं इसी लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। पार्टी इन कार्यक्रमों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। पश्चिमी यूपी में सैनी समाज के मतदाताओं और अन्य पिछड़े वर्गों तक पहुंच बनाना भी बसपा की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। पंजाब और उत्तराखंड में सभाएं रखकर पार्टी दूसरे राज्यों में भी संगठन को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है।

मायावती ने आकाश को कब जिम्मेदारी दी और कब हटाया

10 दिसंबर 2023 : मायावती ने यूपी-उत्तराखंड के नेताओं की बैठक बुलाई। अपने छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश को उत्तराधिकारी घोषित किया। सात मई 2024 को आकाश की गलतबयानी की वजह से मायावती ने सभी जिम्मेदारियां छीन लीं। आकाश को उत्तराधिकारी पद के साथ ही नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया। मायावती ने कहा कि आकाश अभी अपरिपक्व हैं।
23 जून, 2024 : मायावती ने 47 दिन बाद अपना फैसला पलट दिया। आकाश को फिर से उत्तराधिकारी बनाया और नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन 2 मार्च, 2025 को उनसे फिर सारी जिम्मेदारियां छीन लीं।
तीन मार्च, 2025 : मायावती ने आकाश को पार्टी से बाहर कर दिया। बसपा मुखिया बोलीं- आकाश को पश्चाताप करके अपनी परिपक्वता दिखानी थी। लेकिन वो अपने ससुर के प्रभाव में स्वार्थी, अहंकारी हो गए।
13 अप्रैल, 2026 : मायावती ने आकाश को माफ कर दिया। कहा था- आकाश को उत्तराधिकारी नहीं बनाऊंगी। 3 महीने यानी 18 मई को आकाश को मायावती ने दोबारा से चीफ नेशनल को-ऑर्डिनेटर बनाया। कहा- आकाश को दूसरा मौका दिया जा रहा है।
29 अगस्त 2026: पार्टी में राष्ट्रीय संयोजक का नया पद बनाकर आकाश को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी थी।
तीन सितंबर 2026 : मायावती ने राष्ट्रीय संयोजक पद से आकाश को हटाया था। कहा- उन्हें अभी और अधिक मैच्योर होने की जरूरत है।
छह सितंबर 2026: आकाश को हटाने के बाद मायावती ने भतीजे ईशान को 19 राज्यों में संगठन की समीक्षा की जिम्मेदारी दी।
नौ सितंबर 2026 : आकाश आनंद को दोबारा जिम्मेदारियां सौंपने के लिए आकाश के ससुर के राजनीतिक जीवन से संन्यास लेने की शर्त रखी।
दस सितंबर 2026 : मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। कुछ घंटों बाद आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया था।
13 सितंबर 2026: मायावती ने ऐलान किया आकाश ही नहीं, बल्कि ईशान को भी पार्टी में कोई पद नहीं दिया जाएगा। भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी में आगे बढ़ाने के संकेत दिए थे।
आकाश आनंद को पार्टी में वापस लेने के बाद मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी थी। इससे पहले उन्हें पार्टी से बाहर किया गया था। वापसी के बाद नौ अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि के कार्यक्रम में भी आकाश आनंद मायावती के साथ नजर आए। इस दौरान उन्होंने मायावती के प्रति सम्मान जताया।

2027 के चुनाव से पहले बसपा के सामने अपने पारंपरिक दलित जनाधार को मजबूत रखने के साथ दूसरे सामाजिक वर्गों में समर्थन बढ़ाने की चुनौती है। अनूपशहर, नकुड़, बीकापुर, आगरा और बिल्हौर में प्रस्तावित सभाएं इसी लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। पार्टी इन कार्यक्रमों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। पश्चिमी यूपी में सैनी समाज के मतदाताओं और अन्य पिछड़े वर्गों तक पहुंच बनाना भी बसपा की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं, पंजाब और उत्तराखंड में सभाएं रखकर पार्टी दूसरे राज्यों में भी संगठन को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है।

छह दिसंबर की सभा के भी सियासी मायने

आकाश आनंद की आखिरी प्रस्तावित सभा छह दिसंबर को हरिद्वार में होगी। यह दिन डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। बसपा के लिए यह तारीख वैचारिक और संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में हरिद्वार की सभा में आंबेडकरवादी विचारधारा, सामाजिक न्याय और संगठन को मजबूत करने के मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।

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