उत्तर प्रदेश में अगले महीने से डेरा डालेंगे अमित शाह, विजयी रणनीति बनाने आएंगे भाजपा के थिंक टैंक
Amit Shah: अमित शाह बूथ अध्यक्षों एवं शक्ति केंद्र संयोजकों के मन की बात सुनेंगे। पहले उनसे फीडबैक लिया जाएगा।

भाजपा के थिंक टैंक माने जाने वाले अमित शाह
HighLights
शक्ति केंद्रों-बूथों को नए सिरे से रिचार्ज करेंगे अमित शाह
2017 जैसा बूथ प्रबंधन का माडल अपनाएगी भाजपा
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा नए तेवर के साथ विजयी स्कोर जुटाने के लिए माइक्रोमैनेजमेंट की पिच पर उतर गई है। इसके लिए भाजपा के थिंक टैंक माने जाने वाले अमित शाह ग्राउंड लेवल पर उतर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में 2017 में भारी बहुमत की पटकथा लिखने वाले गृहमंत्री अमित शाह कमान संभालेंगे। वह नवंबर में प्रदेश के छह क्षेत्रों (काशी, गोरखपुर, अवध, कानपुर, ब्रज एवं पश्चिम) में शक्ति केंद्र संयोजकों एवं बूथ अध्यक्षों के साथ सीधा संवाद कर उन्हें जीत का मंत्र देंगे। राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश इकाई के साथ नई दिल्ली में 13 अक्टूबर को मीटिंग कर इसकी रूपरेखा तैयार की।
भाजपा उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव की तैयारी में जुटी है। लेकिन उत्तर प्रदेश में तीसरी बार सत्ता पाने की कड़ी चुनौती है। पार्टी सत्तारोधी रुझान से ज्यादा संगठन एवं जनप्रतिनिधियों के बीच मतभेद से चिंतित है। बड़ी संख्या में विधायकों के प्रति जनता में नाराजगी है।
भाजपा ने बेशक 2014, 2017, 2019 एवं 2022 के चुनाव में जीत दर्ज की, लेकिन अंतर घटता गया। 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के प्रति नाराजगी और सपा का पीडीए कार्ड चलने से भाजपा आधी सीटें गंवा बैठी। पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने के साथ ही प्रदेश इकाई बदली।
मोर्चा एवं क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदला। नए सिरे से क्षेत्रीय एवं जिला इकाइयां गठित की गईं। योगी सरकार में नए मंत्री बनाए गए। आठ सदस्यों को राज्य सभा भेजा गया, लेकिन इससे कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह नहीं देखा गया। प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े एवं राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष सभी क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं, जहां से उन्हें चिंता में डालने वाले फीडबैक मिले हैं।
यूजीसी, आरक्षण समेत कई विषयों पर पार्टी में बेचैनी बढ़ी है। अब पार्टी ने नवंबर माह में अमित शाह के छह दौरों की रूपरेखा बनाई है। शुरुआत काशी एवं गोरक्ष क्षेत्र से होगी। बाद में सभी क्षेत्रों को मथेंगे। इसमें हाईप्रोफाइल चेहरों की जगह संगठन के अंतिम छोर पर कार्यकर्ताओं को वरीयता दी जाएगी।
शाह बूथ अध्यक्षों एवं शक्ति केंद्र संयोजकों के मन की बात सुनेंगे। पहले उनसे फीडबैक लिया जाएगा। बूथों पर जातीय समीकरणों की जानकारी ली जाएगी। इसे टिकट का आधार भी बनाया जाएगा। पार्टी सभी 1918 मंडलों तक पहुंचकर संगठन की सबसे निचली इकाई को सक्रिय करने में जुटेगी।
