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'कालोनियों में बुनियादी नागरिक सुविधाएं जरूरी', हाई कोर्ट ने सरकार और विकास प्राधिकरणों व्यवस्था पर मांगा जवाब

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Wed, 04 Nov 2026 06:41 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सार्वजनिक प्राधिकरणों द्वारा विकसित कालोनियों में आवश्यक नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता पर जोर दिया है।

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HighLights

  1. हाई कोर्ट ने कालोनियों में नागरिक सुविधाओं पर जोर दिया।

  2. सरकार और प्राधिकरणों से चार सप्ताह में रोडमैप मांगा।

  3. टाउन प्लानिंग में भविष्य की जरूरतों का ध्यान रखने को कहा।

विधि संवाददाता, लखनऊ। सार्वजनिक प्राधिकरणों की ओर से विकसित कालोनियों में स्वस्थ, स्वच्छ और सुरक्षित जीवन के लिए जरूरी नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता बेहद आवश्यक है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार और विकास प्राधिकरणों से शहरों के नियोजित विकास में नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था पर जवाब मांगा है।

कोर्ट ने कहा है कि टाउन प्लानिंग में भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसके लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने का सुझाव देते हुए चार सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका इन रि: लेआउट प्लान/टाउन प्लानिंग एंड प्रोविजन आफ नेसेसरी अमेनिटीज पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई सात दिसंबर को होगी।

कोर्ट ने राज्य सरकार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, नगर निगम लखनऊ और संबंधित विभागों से पूछा है कि क्या शहरों और आवासीय कालोनियों के लेआउट प्लान में पुलिस थाने, पुलिस चौकियां, पुलिस बूथ, ट्रैफिक बूथ, फायर स्टेशन और चिकित्सा केंद्रों के लिए स्थान निर्धारित किया जाता है? यदि नहीं, तो भविष्य में इन सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या योजना है?

नागरिक सुविधाएं अनिवार्य रूप से होनी चाहिए शामिल 

बिजली विभागों और संबंधित एजेंसियों से भी पूछा कि लेआउट प्लान तैयार करते समय बिजली ट्रांसफार्मर लगाने के लिए स्थान निर्धारित किया जाता है या नहीं। योजना बनाने के दौरान किन विभागों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों से परामर्श लिया जाता है, इसका ब्योरा भी मांगा है।

संबंधित नियम और दिशा-निर्देश भी हलफनामे के साथ प्रस्तुत करने होंगे। नगर निगम को अलग से हलफनामा दाखिल कर यह सुझाव देने को कहा गया है कि लेआउट प्लान में कौन-कौन सी नागरिक सुविधाएं अनिवार्य रूप से शामिल होनी चाहिए।

यह जनहित याचिका कालोनियों में कूड़ा एकत्र करने और बिजली ट्रांसफार्मर लगाने के लिए स्थान निर्धारित नहीं किए जाने की समस्या को लेकर दर्ज की गई थी। पूर्व में नगर निगम की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि विकास प्राधिकरण अक्सर लेआउट प्लान में कूड़ा एकत्र करने के लिए जगह नहीं छोड़ते। इससे कालोनियां बसने के बाद कूड़ा निस्तारण की समस्या खड़ी होती है।

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इसी तरह ट्रांसफार्मर के लिए जगह नहीं होने पर उन्हें सड़क किनारे लगाना पड़ता है, जिससे यातायात बाधित होता है और स्थानीय निवासियों को परेशानी होती है। सुनवाई के दौरान एलडीए और आवास एवं विकास परिषद के अधिवक्ताओं ने बताया कि वर्ष 2025 में लागू भवन उपविधियों में कूड़ा निस्तारण, ट्रांसफार्मर स्थापना और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के प्रावधान किए गए हैं।

हालांकि, ट्रांसफार्मर के लिए विशिष्ट प्रविधानों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। इस पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से हलफनामे के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

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