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रामलला के दर्शन कर हिंदुत्व की राजनीति का दांव चलेंगे अखिलेश, यूपी चुनाव से पहले सपा ने बिछाई सियासी बिसात

Published: Sun, 08 Nov 2026 06:00 AM (IST)Updated: Sun, 08 Nov 2026 06:33 AM (IST)

अखिलेश यादव 12 दिसंबर को परिवार संग राम मंदिर दर्शन करने की तैयारी में हैं, जिसका उद्देश्य भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को चुनौती देना और सनातनी स्वीकार्यता बढ़ाना है।

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HighLights

  1. अखिलेश यादव परिवार संग 12 दिसंबर को राम मंदिर जाएंगे।

  2. भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को चुनौती देने की रणनीति है।

  3. सपा प्रमुख सनातनी स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास करेंगे।

दिलीप शर्मा, लखनऊ। हिंदुत्व और सनातन सम्मान के मुद्दे पर ही भाजपा को चुनौती देने का ताना-बाना बुन रहे अखिलेश यादव अब अपनी रणनीति को बड़ा आयाम देने की तैयारी में हैं। धर्म से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा रहे सपा प्रमुख राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण पर सबसे ज्यादा मुखर रहे थे। जिसके बाद भाजपा उनके राम मंदिर न जाने को लेकर सवाल खड़ी करती है और मंदिर आंदोलन की भी याद दिला रही है।

अब पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने 12 दिसंबर को सपा प्रमुख के परिवार संग राम मंदिर जाकर रामलला के दर्शन करने की जानकारी दी है। विधान सभा चुनाव से ऐन पहले और विवादित ढांचा विध्वंस की बरसी के बाद प्रस्तावित यह दर्शन कार्यक्रम, निसंदेह बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होगा।

इसके सहारे सपा प्रमुख भाजपा के सवालों-आरोपों की धार कम करने और भाजपा के वैचारिक हिंदुत्व एजेंडे के मुकाबले सनातनियों में अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

दौरे से पहले योजनाओं पर हो रहा विचार

हालांकि, तिथि का लेकर अभी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, परंतु सपा प्रमुख का जाना लगभग तय माना जा रहा है। वह खुद कई बार इटावा में केदारेश्वर मंदिर पूरा होने के बाद राम मंदिर जाने की बात कह चुके हैं, बताया जा रहा है कि केदारेश्वर मंदिर का काम अंतिम चरण में है और अयोध्या दाैरे से पहले वहां भी आयोजन करने पर विचार हो रहा है।

इन दोनों ही कार्यक्रमों के पीछे सपा की सोची-समझी चुनावी रणनीति नजर आती है। सपा की चुनौती अपना परंपरागत सामाजिक आधार कायम रखते हुए दूसरे वर्गों को जोड़ने की है, इसीलिए सपा, पीडीए के विस्तार की कोशिश संग धार्मिक-सांस्कृतिक विमर्श में भी मुखर है।

राजनीतिक विमर्श को नया मोड़ देने की कोशिश

वैसे यह संतुलन आसान नहीं। मंदिर आंदोलन के दौरान वर्ष 1990 में कारसेवकों पर गोली चलने की घटना को भाजपा आज भी मुलायम सिंह यादव की सरकार से जोड़कर उठाती है। ऐसे में अखिलेश के सामने रामलला के दर्शन के साथ ये सवाल भी हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद संसदीय सीट पर सपा के अवधेश प्रसाद की जीत के बाद सपा राम मंदिर के राजनीतिक विमर्श को नया मोड़ देने की कोशिश कर रही है।

सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों की जीत के रूप में प्रस्तुत करती रही है। मंदिर निर्माण के साथ विस्थापन, व्यापारियों की समस्याओं और स्थानीय लोगों की शिकायतों को उठाकर अखिलेश अयोध्या के विकास के दूसरे पहलुओं पर भी सवाल करते रहे हैं।

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अब सपा प्रमुख रामलला के दर्शन के जरिए आस्था के सवाल पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के साथ अयोध्या में राजनीतिक सक्रियता को भी नया विस्तार दे सकते हैं। सपा प्रमुख की यात्रा पूरे परिवार संग प्रस्तावित है, इससे पार्टी धार्मिक आस्था को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने का संदेश बनाने की कोशिश करेगी।

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