लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। खेती में लागत और मेहनत को कम करने में कृषि यंत्रों की अहम भूमिका है। अधिकांश किसान आसानी से कृषि यंत्रों को खरीद सकें इसीलिए सरकार अनुदान दे रही है। ये अनुदान यंत्र की कीमत का 50 से 80 प्रतिशत तक देने का नियम है। इस वर्ष उत्तर प्रदेश में करीब 5000 किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद में लगभग 400 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाना है। जालसाजों की नजर अनुदान को हड़पने की रही है, इसीलिए बुकिंग का पोर्टल हैक करके आवेदन किए गए।

कृषि विभाग सात अक्टूबर से कृषि यंत्रीकरण योजनाओं के तहत किसानों को अनुदान पर यंत्र मुहैया कराने के लिए मंडलवार बुकिंग करा रहा है। यह प्रक्रिया 21 अक्टूबर तक चलनी थी। एक साथ बुकिंग शुरू होने से पोर्टल सही से चल नहीं रहा था इसलिए मंडलवार आवेदन की योजना बनी। बुधवार को अयोध्या व गोरखपुर मंडल के किसान जब यंत्रों की बुकिंग कर रहे थे तो उन्हें विभागीय पोर्टल पर तकनीकी समस्याएं हुईं।

इसकी शिकायत उन्होंने कृषि विभाग के अफसरों से की। पड़ताल में सामने आया कि यंत्रों की बुकिंग बुधवार 11 बजे से होनी थी, जबकि कई आवेदन उसके पहले ही हो चुके थे। विभागीय अधिकारियों ने आशंका जताई कि कृषियंत्र पाने की हेराफेरी पिछले दिनों भी हुई होगी, इसीलिए सभी आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। केवल इन-सीटू योजना योजना में आवेदन लिए जा रहे हैं।

हेराफेरी की जांच साइबर क्राइम सेल को सौंपी गई है। यही नहीं कृषि विभाग ने विभागीय पोर्टल का सिस्टम सिक्योरिटी आडिट कराए बिना ही पोर्टल पर आवेदन लेना शुरू किया था। इसीलिए गड़बड़ी सामने आने पर अब सिक्योरिटी आडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि निदेशक विवेक कुमार सिंह ने बताया कि योजना में सभी किसानों को पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर तय लक्ष्य की सीमा तक मौका दिया जाता है।

जिलावार लक्ष्य के अनुसार आवेदन होने पर पोर्टल नए आवेदन स्वीकार ही नहीं करता। किसानों को व्यक्तिगत रूप से कृषियंत्र खरीदने पर 50 प्रतिशत अनुदान मिलता है, जबकि कस्टम हायरिंग केंद्र व फार्म मशीनरी बैंक के तहत समूह में यंत्र लेने पर 80 प्रतिशत तक की छूट देने का प्रविधान है। साइबर क्राइम सेल ने पड़ताल शुरू कर दी है।

यह भी पढ़ें : यूपी कृषि विभाग की वेबसाइट हैक कर समय से पहले बुक कर लिए कृषि यंत्र, साइबर क्राइम सेल को सौंपी जांच

Edited By: Umesh Tiwari