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यूपी के परिषदीय स्कूलों में 45 लाख बच्चों को नहीं मिल पा रहे डेस्क-बेंच, बजट के बावजूद खरीद प्रक्रिया धीमी

Published: Sun, 11 Oct 2026 07:51 AM (IST)

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 45 लाख से अधिक बच्चे आज भी डेस्क-बेंच के अभाव में टाट-पट्टी पर बैठने ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. 45 लाख से अधिक बच्चे डेस्क-बेंच से वंचित।

  2. 46 हजार से ज्यादा स्कूलों में फर्नीचर की कमी।

  3. ₹1000 करोड़ बजट, फिर भी खरीद प्रक्रिया धीमी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सर्दी की दस्तक के साथ परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों की मुश्किलें फिर बढ़ने वाली हैं। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों की सूरत बदलने के दावों के बीच प्रदेश के 46 हजार से अधिक विद्यालयों में बच्चे आज भी टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

करीब 45 लाख से अधिक बच्चों को डेस्क-बेंच नसीब नहीं हैं। हैरानी यह है कि इस सत्र में सभी बच्चों को फर्नीचर उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए करीब एक हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित होने के बावजूद खरीद प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। ऐसे में सवाल है कि जब बजट और योजना दोनों मौजूद हैं, तो बच्चों को बुनियादी सुविधा के लिए इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?

प्रदेश में 1,32,735 परिषदीय विद्यालय हैं। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत इनमें बुनियादी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया गया है, लेकिन बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था अब भी अधूरी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 65 प्रतिशत विद्यालयों में ही फर्नीचर की व्यवस्था हो सकी है।

उच्च प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि प्राथमिक विद्यालयों में सबसे अधिक बच्चे इस कमी से जूझ रहे हैं। बहराइच, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और अयोध्या समेत कई जिलों के विद्यालयों में डेस्क-बेंच की कमी बनी हुई है। लखनऊ, गोरखपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है।

डेस्क-बेंच के अभाव में बच्चों को जमीन पर बैठकर लिखना-पढ़ना पड़ता है। इससे उन्हें असुविधा होती है और लंबे समय तक झुककर बैठने से पीठ व गर्दन में परेशानी और थकान हो सकती है। सर्दियों में जमीन पर बैठना उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

खरीद की व्यवस्था बदलने में उलझी प्रक्रिया

फर्नीचर खरीदने के लिए समग्र शिक्षा परियोजना निदेशालय ने करीब एक हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित है। खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से की जानी है और गुणवत्ता की निगरानी जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति को करनी है।

कुछ जिलों में कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत भी फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में विद्यालयों तक सुविधा नहीं पहुंच पाई है। पहले फर्नीचर खरीद की केंद्रीयकृत व्यवस्था थी, जिसे बाद में बदलकर जिलों के स्तर पर खरीद करने की व्यवस्था बनाई गई, लेकिन अभी खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।

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