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बंदरों का आतंक नहीं थमा तो बाघ बनकर घूमने लगे, युवकों की अनोखी तरकीब से गांव वालों को मिली राहत

Published: Mon, 19 Oct 2026 04:59 PM (IST)

लखीमपुर खीरी के बिझौली गांव में बंदरों के आतंक से परेशान ग्रामीणों ने अनोखा तरीका अपनाया। दो युवक बाघ की ...और पढ़ें

बिझौली में बंदरों को भगाने के लिए बाघ की ड्रेस पहनकर घूमता ग्रामीण। जागरण

बिझौली में बंदरों को भगाने के लिए बाघ की ड्रेस पहनकर घूमता ग्रामीण। जागरण

HighLights

  1. बंदरों के आतंक से परेशान ग्रामीणों ने बाघ का वेश अपनाया।

  2. सीतापुर से मंगाई बाघ की ड्रेस, युवकों ने भगाए बंदर।

  3. स्थायी समाधान हेतु वन विभाग से ग्रामीणों की गुहार।

सुनील श्रीवास्तव, लखीमपुर। घरों में उधम, छतों पर तोड़फोड़ और खेतों में फसलों को नुकसान। बंदरों के आतंक से परेशान ग्रामीणों ने जब शिकायतों और तमाम उपायों के बावजूद राहत नहीं मिली तो खुद ही बाघ बनकर उन्हें भगाने का मोर्चा संभाल लिया।

कोतवाली गोला क्षेत्र के बिझौली गांव में दो युवक बाघ की ड्रेस पहनकर गलियों में घूमने लगे। बाघ के रूप में युवकों को देखकर बंदरों के झुंड भागने लगे। करीब एक सप्ताह तक यह तरकीब कारगर रही, लेकिन अब एक-दो बंदर फिर दिखाई देने लगे हैं।

बिझौली के अलावा चिंतापुर, रमुआपुर, लखैया और जमुनाबाद फार्म में भी बंदरों का आतंक है। ग्रामीणों के मुताबिक, करीब दस वर्षों से बंदरों के झुंड लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। बंदर घरों में घुसकर सामान उठा ले जाते हैं। छतों और बिजली के खंभों पर लगी लाइटें तोड़ देते हैं। खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ग्रामीणों पर हमला भी कर चुके हैं।

सीतापुर से मंगाईं बाघ की ड्रेस

लगातार परेशानी झेल रहे ग्रामीणों ने सीतापुर से बाघ की दो ड्रेस मंगाईं। इसके बाद गांव के गोविंद सिंह और रूपराम बाघ की वेशभूषा पहनकर गलियों और आसपास के इलाकों में घूमने लगे। जहां बंदरों का झुंड दिखाई देता, दोनों युवक बाघ की ड्रेस पहनकर उसी ओर पहुंच जाते। बाघ की शक्ल देखकर बंदर भाग खड़े होते थे।

ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों से कई बार शिकायत के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। अब बंदरों की दोबारा आमद से झुंड लौटने की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से बंदरों को पकड़वाकर स्थायी समाधान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बाघ की ड्रेस पहनना शौक नहीं, बल्कि बंदरों के आतंक से बचने की मजबूरी है।

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