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22 साल बाद वन विभाग को मिली 66 एकड़ जमीन, बाघों के लिए बनेगा नया घर

Published: Fri, 23 Oct 2026 02:49 PM (IST)

लखीमपुर खीरी के निघासन क्षेत्र में वन विभाग ने 22 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 66 एकड़ वन भूमि ...और पढ़ें

यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।

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HighLights

  1. वन विभाग ने 22 साल बाद 66 एकड़ जमीन जीती।

  2. चकबंदी कोर्ट ने वन विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया।

  3. जमीन पर बाघ-तेंदुओं के लिए जंगल विकसित होगा।

संवादसूत्र, जागरण, लखीमपुर। निघासन क्षेत्र में वन भूमि पर मालिकाना हक को लेकर करीब 22 साल से चल रही कानूनी लड़ाई में वन विभाग को जीत मिली है। चकबंदी कोर्ट ने 66 एकड़ जमीन पर वन विभाग का अधिकार स्वीकार करते हुए उसके पक्ष में फैसला सुनाया है। अब चकबंदी विभाग की ओर से निघासन तहसील को जमीन के अमल दरामद के लिए परवाना जारी किया जाएगा। इसके बाद राजस्व अभिलेखों में जमीन वन विभाग के नाम दर्ज हो सकेगी। विभाग इस भूमि पर बाघ और तेंदुओं के अनुकूल जंगल विकसित करेगा।

निघासन क्षेत्र में पूर्व गाटा संख्या नौ मिल जुमला की कुल 110.50 एकड़ जमीन वन विभाग से संबंधित है। इसमें से 66 एकड़ भूमि बंजर व अन्य खातों में दर्ज थी। रेनू गुप्ता, अरुणा कुमारी, दिजिराम, नारायण दत्त और आशा कुमारी के नाम जमीन दर्ज होने के कारण इसके मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा था। संबंधित पक्ष जमीन पर अपना अधिकार जता रहे थे, जबकि वन विभाग का दावा था कि यह भूमि भारतीय वन अधिनियम की धारा चार के तहत अधिसूचित वन भूमि है।

करीब 22 साल पहले अरुणा कुमारी और दिजिराम के बीच जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इसकी जानकारी मिलने पर वन विभाग ने वर्ष 2011-12 में मामले में आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद 1356 और 1359 फसली के अभिलेखों के आधार पर चकबंदी न्यायालय में सुनवाई हुई। वन विभाग ने अपने पक्ष में साक्ष्य और अभिलेख प्रस्तुत किए।

वन विभाग के अधिवक्ता नवीन गुप्ता ने बताया कि चकबंदी कोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद सीओ सेकेंड अमरेश सिंह ने 66 एकड़ जमीन वन विभाग के पक्ष में करने का निर्णय सुनाया है। अमल दरामद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन विभाग के नाम कुल 176 एकड़ जमीन हो जाएगी।

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दुधवा की उपनिदेशक कीर्ति चौधरी ने बताया कि जमीन का अमल दरामद होने के बाद यहां बाघ और तेंदुओं के अनुकूल प्राकृतिक आवास विकसित किया जाएगा। इससे वन्यजीवों के संरक्षण और उनके सुरक्षित विचरण के लिए जंगल का दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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