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बेल्जियम टू लखीमपुर: 308 पहियों वाले बाहुबली ट्रक ने 5 महीनों में कैसे पूरा किया अनोखा सफर, देखें टाइमलाइन

Published: Sat, 24 Oct 2026 12:24 PM (GMT+05:30)

बेल्जियम से लखीमपुर खीरी तक 200 टन की मशीन की पांच महीने की चुनौतीपूर्ण यात्रा का वर्णन किया गया है। ...और पढ़ें

यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. बेल्जियम से लखीमपुर खीरी तक 200 टन मशीन का सफर।

  2. पांच महीने में चार राज्यों से गुजरते हुए पहुंची मशीन।

  3. बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए महत्वपूर्ण उपकरण पहुंचाया गया।

डिजिटल डेस्क, जागरण, लखीमपुर खीरी। हाल ही में एक महाट्रक पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ था। इस महाट्रक पर 200 टन की मशीन लदी हुई थी। बेल्जियम में तैयार हुई विशालकाय मशीन को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी तक पहुंचाने की कहानी बहुत रोमांचक है।

इसका सफर कभी भी आसान नहीं था। करीब 5 महीने तक सड़क मार्ग पर आगे बढ़ते हुए इस ट्रक को कहीं संकरे रास्तों ने रोका तो कहीं पोल, बिजली के तार और सड़क किनारे लगे बोर्ड ने रोका।

आखिरकार अक्टूबर में यह अपने गंतव्य जिले लखीमपुर खीरी तक पहुंच गया। इस महाबली ट्रक के सफर की पूरी टाइम लाइन जानकर आपको बहुत हैरानी होगी।

अप्रैल 2026: बेल्जियम से शुरू हुआ सफर

लखीमपुर खीरी के कुंभी में बलरामपुर चीनी मिल के परिसर में बायोप्लास्टिक प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए बेल्जियम में तैयार करीब 200 टन वजनी वेसल यानी औद्योगिक रिएक्टर बनाया गया। इसे समुद्र के रास्ते भारत लाने की प्रक्रिया अप्रैल में ही शुरू हो गई थी। इसका प्रयोग चीनी से पाली लैक्टिक एसिड यानी पीएलए बनाने वाले संयंत्र में किया जाना है।

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मई 2026: उड़ीसा पहुंची मशीन

समुद्री यात्रा पूरी करने के बाद यह मशीन उड़ीसा के पारादीप बंदरगाह पहुंची। यहां से इसे सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित कुंभी ले जाने की तैयारी की गई। इसके लिए विशेष हाइड्रोलिक मल्टी एक्सल ट्रेलर का इस्तेमाल किया गया, जिसे महाट्रक नाम से प्रसिद्धि मिली।

14 मई को मशीन विशेष ट्रेलर पर रखकर लखीमपुर के लिए रवाना हुई। शुरुआत में ट्रेलर में 308 पहिए लगाए गए थे। इतने विशाल वजन को संभालने के लिए ट्रेलर के कई हिस्सों को एक साथ जोड़कर तैयार किया गया था।

जून से सितंबर तक बिहार और झारखंड में मिली चुनौतियां

उड़ीसा से निकलने के बाद ट्रक झारखंड और बिहार के रास्ते अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था। इस बीच इतनी लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई के कारण रास्तों में कई जगह परेशानी हुई। संकरी सड़कों मोड़ व पुलों के आसपास की बाधाओं को दूर करने के लिए संबंधित विभागों व तकनीकी टीम की मदद लेनी पड़ी।

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सितंबर: चंदौली में थमी रफ्तार

उत्तर प्रदेश में प्रवेश करते ही चंदौली क्षेत्र में ट्रक को रोकना पड़ा। कुछ जगहों को बनाना पड़ा, सड़कों के किनारे आने वाली रूकावटों को भी हटाना पड़ा। इस ट्रक को देखने के लिए दूर-दराज से लोग भी पहुंचने लगे। मोबाइल से फोटो खींचने और सेल्फी लेने वालों की भीड़ जुटने लगी। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो को खूब देखा भी गया।

सितंबर के अंत से अक्टूबर तक: वाराणसी में पुल बनी बड़ी चुनौती

वाराणसी में ट्रक को आगे बढ़ाने के लिए विशेष इंतजाम करने पड़े। उमरहा क्षेत्र में कम ऊंचाई वाले फूटब्रिज को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके लिए स्थानीय प्रशासन पुलिस और संबंधित विभागों की मदद लेनी पड़ी।

300 से 240 पहियों पर पहुंच ट्रेलर

इस सफर में कई जगह ट्रेलर की बनावट में बदलाव करना पड़ा। शुरुआत में 308 पहियों वाले ट्रेलर से मशीन लाने की योजना थी लेकिन संकरे मोड़ों पर अधिक जगह की जरूरत और आगमन में आ रही दिक्कतों को देखते हुए पहियों की संख्या घटकर 240 कर दी गई। यह बदलाव इस यात्रा की सबसे खास बातों में एक है।

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13 अक्टूबर को बस्ती में तय की 45 किलोमीटर की दूरी

बस्ती में महाट्रेलर ने एक दिन में करीब 45 किलोमीटर की दूरी तय की। सोनहा बाजार समेत रास्ते के विभिन्न स्थानों पर लोग इसे देखने के लिए जुटे रहे। खराब सड़कें बिजली के तार और यातायात की समस्या इस सफर में प्रमुख चुनौतियां बनती रही।

20-21 अक्टूबर: लखीमपुर खीरी जिले में दाखिल हुआ ट्रक

करीब पांच महीने बाद ट्रक लखीमपुर खीरी जिले की सीमा में पहुंचा। इसके बाद नकहा और जिले के अन्य हिस्सों से होते हुए इसे कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल परिसर की ओर बढ़ाया गया। रास्ते में स्मृति द्वारों और साइनेज बोर्डों को हटाने जैसे इंतजाम किए गए, ताकि विशाल ट्रेलर बिना बाधा आगे बढ़ सके। इसे देखने के लिए हाईवे पर लोगों की भीड़ जुटी और यातायात नियंत्रित करने में पुलिस को मेहनत करनी पड़ी।

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सोशल मीडिया पर क्यों लोकप्रिय हुआ महाट्रक

इस ट्रक की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह इसका विशाल आकार और सैकड़ों पहियों वाला ट्रेलर रहा। लोग इसे देखने के लिए सड़क किनारे रुकते रहे। इसके वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा किए गए।

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इस मशीन का आखिर होगा क्या

यह मशीन कुंभी में बन रहे बायोप्लास्टिक प्लांट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। करीब 3,080 करोड़ रुपये की परियोजना में गन्ने से प्राप्त चीनी का इस्तेमाल कर पॉली लैक्टिक एसिड यानी पीएलए बनाने की योजना है। इस सामग्री से आगे चलकर कप, ट्रे, पैकेजिंग सामग्री और अन्य उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। ऐसे में यह महाट्रक केवल एक विशाल वाहन की कहानी नहीं, बल्कि एक बड़ी औद्योगिक परियोजना तक मशीनरी पहुंचाने के चुनौतीपूर्ण अभियान का भी उदाहरण है।

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