विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

स्ट्रॉबेरी की खेती से किसानों की बंपर कमाई, उद्यान विभाग पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर दे रहा बढ़ावा

Published: Mon, 26 Oct 2026 11:28 AM (IST)

लखीमपुर खीरी में स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन गई है। उद्यान विभाग के सहयोग ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. खीरी में स्ट्रॉबेरी की खेती बनी आय का जरिया।

  2. किसान यदुनंदन सिंह ने शुरू किया सफल प्रयोग।

  3. उद्यान विभाग दे रहा खेती को तकनीकी सहयोग।

राकेश मिश्र, लखीमपुर। कभी पहाड़ी इलाकों की पहचान मानी जाने वाली स्ट्रॉबेरी अब खीरी की मिट्टी में भी किसानों की आमदनी बढ़ाने का जरिया बन रही है। चार वर्ष पहले बांकेगंज के किसान यदुनंदन सिंह पुजारी ने जिले में स्ट्रॉबेरी की खेती का प्रयोग शुरू किया था। शुरुआती प्रयोग सफल रहा तो आसपास के किसानों का रुझान बढ़ा।

आज जिले के अलग-अलग ब्लाकों में करीब दर्जनभर किसान स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। हालांकि अधिक देखभाल और मेहनत के कारण अभी यह किसानों की पहली पसंद नहीं बनी है, लेकिन बेहतर बाजार भाव इसे आकर्षक विकल्प बना रहा है।

यदुनंदन सिंह को देखकर बांकेगंज के धीरू मौर्य ने भी स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। इसके बाद लखीमपुर ब्लाक के पिपरिया गांव के शिवप्रसाद वर्मा, कुंभी के दशरथपुर निवासी रामपाल और खदनी गांव के तोखनलाल ने भी खेतों में स्ट्रॉबेरी उतारी। पसगवां और बिजुआ क्षेत्र में भी इक्का-दुक्का किसानों ने इसकी शुरुआत की है।

मेहनत ज्यादा, मुनाफे की उम्मीद भी अच्छी

स्ट्रॉबेरी की खेती में पौधों की नियमित देखभाल और मौसम पर नजर रखना जरूरी होता है। यही वजह है कि अधिकांश किसान अभी पारंपरिक फसलों के साथ ही इसे सीमित क्षेत्र में आजमा रहे हैं। किसानों के अनुसार बाजार में स्ट्रॉबेरी करीब 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। इससे कम क्षेत्र में भी बेहतर आय की संभावना बनी है।

स्ट्रॉबेरी से जैम, जेली, चटनी, क्रीम, स्क्वैश और शरबत जैसे उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं। उद्यान विभाग खेती को बढ़ावा देने की तैयारी कर रहा है, जबकि फल संरक्षण विभाग किसानों और अन्य लोगों को प्रसंस्करण का प्रशिक्षण दे रहा है। इससे खेत की उपज को सीधे बेचने के बजाय उससे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय का रास्ता खुल सकता है।

यदुनंदन सिंह बताते हैं कि उत्तराखंड के जौलीकोट, नैनीताल, हिमाचल के कुल्लू-सोलन के अलावा महाबलेश्वर, नीलगिरि और दार्जिलिंग में भी स्ट्रॉबेरी की खेती प्रमुखता से होती है। अब खीरी के किसान भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा अवसर

जिले में स्ट्रॉबेरी की खेती का दायरा बढ़ाने के लिए उद्यान विभाग ने नए किसानों को जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती कराकर किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इच्छुक किसानों को विभाग की ओर से तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि खेती की आधुनिक तकनीक अपनाकर बेहतर उत्पादन लिया जा सके। योजना में किसानों का चयन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। इच्छुक किसान जल्द आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं। विभाग किसानों को खेती से लेकर उत्पादन तक जरूरी मार्गदर्शन देगा।

-मृत्युंजय सिंह, जिला उद्यान अधिकारी

यह भी पढ़ें- यूपी के आलू किसानों को बड़ी राहत, बीज पर मिलेगी ₹1000 प्रति क्विंटल सब्सिडी

यह भी पढ़ें- आलू के साथ शकरकंद की खेती से किसानों को बंपर मुनाफा, कम लागत के चलते कटरी क्षेत्र में मिल रहा बढ़ावा