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मेथी की खेती से बेहतर आमदनी पा रहे किसान यदुनंदन सिंह, पिछले साल किया था एक्सपेरिमेंट, इस साल भी करेंगे बुवाई

Published: Sat, 24 Oct 2026 05:20 PM (IST)

किसान यदुनंदन सिंह पुजारी बांकेगंज में मेथी की खेती से कम समय और लागत में अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. किसान यदुनंदन पुजारी मेथी की खेती से कमा रहे अच्छी आय।

  2. कम लागत और कम समय में तैयार होती है यह फसल।

  3. पिछले साल के सफल प्रयोग के बाद इस साल भी तैयारी।

जागरण संवाददाता, लखीमपुर। कम समय, कम लागत और बेहतर आमदनी की उम्मीद किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ नए विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी क्रम में बांकेगंज क्षेत्र के किसान यदुनंदन सिंह पुजारी मेथी की खेती को लाभकारी विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।

पिछले साल उन्होंने पहली बार मेथी की खेती शुरू की थी। अब इस साल भी वह इसकी खेती की तैयारी में जुटे हैं। उनका प्रयास कम लागत में बेहतर आमदनी हासिल करने के साथ खेती के नए विकल्पों को आजमाने का है।

मेथी की खासियत यह है कि इसकी हरी पत्तियों की फसल कम समय में तैयार हो जाती है। बाजार में मांग रहने पर किसान इससे अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं।

10 से 15 हजार रुपये की लागत

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, हरी मेथी की पहली कटाई सामान्यतः बुवाई के 30 से 35 दिन बाद की जा सकती है। इससे किसानों को लंबे समय तक फसल तैयार होने का इंतजार नहीं करना पड़ता। कम समय में खेत खाली होने से दूसरी फसल की योजना बनाने का अवसर भी मिलता है। मेथी की खेती में प्रति एकड़ लगभग 10 से 15 हजार रुपये की लागत आने का अनुमान है।

हालांकि, वास्तविक लागत बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है। फसल से होने वाली कमाई भी उत्पादन, बाजार भाव और बिक्री के तरीके के अनुसार बदलती है।

मेथी की खेती की संभावनाएं 

खीरी जिले की जलवायु में मेथी की खेती की संभावनाएं हैं। इसकी सफल खेती के लिए खेत में जलनिकास की उचित व्यवस्था, संतुलित खाद का इस्तेमाल और समय पर सिंचाई जरूरी है। हरी पत्तियों के लिए सही समय पर कटाई और स्थानीय बाजार में मांग का आकलन भी महत्वपूर्ण है।

पिछले साल शुरू किया था प्रयोग

बांकेगंज के किसान यदुनंदन सिंह पुजारी का पिछले साल शुरू किया गया प्रयोग अब दूसरे सीजन में प्रवेश कर रहा है। उनकी पहल उन किसानों के लिए भी प्रेरक हो सकती है, जो कम अवधि वाली फसलों के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाने के विकल्प तलाश रहे हैं।

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