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लखीमपुर के दुधवा के जंगलों में दिखा अनोखा करैत, शरीर से गायब हो गईं पहचान वाली धारियां

Published: Fri, 11 Sep 2026 01:08 PM (IST)

Unique Krait: सामान्यतः कॉमन करैत के शरीर पर सफेद या पीली क्रॉस धारियां होती हैं। इस सांप की असामान्य बनावट ने वन्यजीव विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है।

लखीमपुर में मिला बिना धारियों वाला करैत

लखीमपुर में मिला बिना धारियों वाला करैत

HighLights

  1. फीका रंग और सफेद-पीली पट्टियां न होने से विशेषज्ञ भी हैरान

  2. जैव विविधता पर शोध का नया सवाल

जागरण संवाददाता, लखीमपुर। दुधवा के जंगलों में सांपों की दुनिया से जुड़ी एक असामान्य खोज सामने आई है। यहां कॉमन करैत की एक ऐसी प्रजाति मिला है, जिसमें विशिष्ट धारियां बेहद फीकी हैं और कई जगह पूरी तरह नजर नहीं आ रहीं।

सामान्यतः कॉमन करैत के शरीर पर सफेद या पीली क्रॉस धारियां होती हैं। इस सांप की असामान्य बनावट ने वन्यजीव विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। इस प्रजाति के सांप के शरीर पर काले और पीले रंग की चौड़ी पट्टियां होती हैं। यह भी इस इलाके में बहुत कम देखने को मिलता है।

संपूर्णानगर वन क्षेत्र के सुमेरनगर गांव में दुधवा की मोटिवेटर और सर्प रेस्क्यूअर नाजरुन्निशान ने 16 अगस्त को एक घर से सांप को रेस्क्यू किया था। पहली नजर में वह करैत जैसा लगा, लेकिन उसके शरीर का रंग और पैटर्न सामान्य करैत से अलग था। सफेद-पीली पट्टियां स्पष्ट न होने के कारण उन्होंने इसकी तस्वीरें और जानकारी विशेषज्ञों तक पहुंचाई।

पहचान कॉमन करैत के रूप में की

भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के वैज्ञानिक विपुल मौर्य ने इसकी पहचान कॉमन करैत के रूप में की है। दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ. दयाशंकर ने सांप की जांच की। उन्होंने भी इसके रंग-रूप को सामान्य करैत से अलग पाया। इसके बाद मामले की जानकारी वन्यजीव विशेषज्ञों तक पहुंचाई गई। विशेषज्ञों के मुताबिक दुधवा में करैत के रंग और धारियों के इस तरह फीके पड़ने या गायब होने का अवलोकन बेहद रोचक है।

करैत के रंग और पैटर्न में बदलाव

वरिष्ठ वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ), देहरादून के जीवविज्ञानी विपुल मौर्य ने इसे आगे शोध की जरूरत वाला महत्वपूर्ण अवलोकन बताया। उनका कहना है कि तराई क्षेत्र, खासकर दुधवा, सांपों की समृद्ध विविधता के लिए जाना जाता है। ऐसे में करैत के रंग और पैटर्न में सामने आया यह बदलाव सांपों की जैव विविधता और उनके प्राकृतिक अनुकूलन को समझने के लिए नए सवाल खड़े करता है।

ओन्टोजेनेटिक कलर पैटर्न शिफ्ट

वैज्ञानिकों ने तस्वीर का अध्ययन करने के बाद सांप को असामान्य बताया। उनके अनुसार, दुधवा में कॉमन करैत का रंग फीका पड़ने और शरीर पर पहचान वाली रिंग-बैंड स्पष्ट नहीं होने का मामला पहली बार सामने आया है। कॉमन करैत में धारियों का फीका पड़ना या गायब होना शोध का विषय है। वैज्ञानिकों ने बताया कि सुमेरनगर में रेस्क्यू किए गए कॉमन करैत का रंग और पैटर्न उम्र के साथ बदल सकता है। इसे ओन्टोजेनेटिक कलर पैटर्न शिफ्ट कहा जाता है। वर्ष 2021 में किंग रैटस्नेक में भी रंग और पैटर्न में इसी तरह के बदलाव का मामला सामने आया था।

डीटीआर के एफडी डॉ. एच. राजामोहन ने बताया कि दुधवा की समृद्ध जैव विविधता के चलते यहां सैकड़ों प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं। रेस्क्यू किए गए इस सांप पर शोध कराया जाएगा।

शोध की जरूरत वाला महत्वपूर्ण अवलोकन

वरिष्ठ वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ), देहरादून के जीवविज्ञानी विपुल मौर्य ने इसे आगे शोध की जरूरत वाला महत्वपूर्ण अवलोकन बताया। उनका कहना है कि तराई क्षेत्र, खासकर दुधवा, सांपों की समृद्ध विविधता के लिए जाना जाता है। ऐसे में करैत के रंग और पैटर्न में सामने आया यह बदलाव सांपों की जैव विविधता और उनके प्राकृतिक अनुकूलन को समझने के लिए नए सवाल खड़े करता है।

करैत भारत के सबसे जहरीले सांपों में से एक

दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) के बफर जोन में बिना धारियों (बैंड) वाला एक बेहद दुर्लभ कॉमन करैत (Common Krait) सांप मिला है। आमतौर पर करैत सांप के शरीर पर सफेद या पीली धारियां (रिंग) होती हैं, लेकिन इस अनोखे सांप के शरीर से ये धारियां पूरी तरह गायब थीं, जिसने वन्यजीव विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है।
करैत भारत के सबसे जहरीले सांपों में से एक है। दुधवा के जंगलों में लगातार मिल रहे सांपों के ऐसे अनोखे रूप और दुर्लभ प्रजातियां यह साबित करती हैं कि यहां की जैव विविधता (Biodiversity) बेहद समृद्ध और सुरक्षित है।

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