टाइगर रिजर्व में मोटिवेटर नाजरुन निशा को सांप ने काटा, रेस्क्यू के बाद जंगल में छोड़ा और बाइक चलाकर पहुंचीं अस्पताल
Highly Venomous Snakes in India: निशा अब तक आबादी वाले क्षेत्रों से 300 से अधिक जहरीले सांप और दस से अधिक मगरमच्छ सुरक्षित निकालकर जंगलों में छोड़ चुकी हैं।
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जहरीले सांप करैत को रेस्क्यू के दौरान सांप ने उनको काट भी लिया।
HighLights
लखीमपुर खीरी में जहरीले सांप को पकड़ने के दौरान हादसा
साहस दिखाकर नाजरुन निशा ने किया बड़ा काम
डिजिटल डेस्क, लखीमपुर खीरी। दुधवा नेशनल पार्क की मोटिवेटर नाजरुन निशा ने एक बार फिर साहसिक काम से सुर्खियां बटोरी हैं। उन्होंने लखीमपुर खीरी के रैट स्नेक को रेस्क्यू किया। इस कार्य के दौरान सांप ने उनको कांट भी लिया। इसके बाद भी नाजरुन निशा बाइक चलाकर अस्पताल पहुंच गईं और इलाज कराया।
नाजरुन निशा को सूचना दी गई कि शनिवार शाम को लखीमपुर खीरी के अजीत नगर में घोड़ा पछाड़ सांप यानी रैट स्नेक देखा गया है। नाजरुन निशा ने फिर साहस दिखाया सांप को पकड़ा। इस दौरान सांप ने उनको काट लिया, लेकिन उन्होंने सांप को नहीं छोड़ा और उसको जंगल में छोड़ने के बाद नाजरुन खुद ही बाइक चलाकर अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने वहां पर अपना इलाज कराया।
दुधवा नेशनल पार्क की मोटिवेटर नाजरुन 300 से ज्यादा जहरीले सांपों का रेस्क्यू कर चुकी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना वीडियो भी पोस्ट किया और लिखा कि रेस्क्यू के दौरान अचानक मुझे सांप ने काट लिया। घबराने की कोई बात नहीं है, मैंने तुरंत अस्पताल जाकर आवश्यक उपचार और इंजेक्शन लगवा लिया है तथा अब मैं पूरी तरह सुरक्षित हूं।
इसके साथ ही सलाह दी कि यदि किसी को सांप काट ले, तो घबराएं नहीं और किसी भी प्रकार के घरेलू उपचार पर भरोसा न करें। आप तुरंत नज़दीकी अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सहायता लें। सही समय पर इलाज ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
दुधवा नेशनल पार्क में 'मोटिवेटर' (वन्यजीव रेस्क्यूअर) के रूप में कार्यरत नाजरून निशा साहसी व प्रेरणादायक महिला हैं। लखीमपुर खीरी जिले के अपने गांव में 19 वर्ष की उम्र में सांप पकड़ने की शुरुआत करने वाली नाजरीन अब दुधवा के आस-पास के गांवों के लिए एक रक्षक बन चुकी हैं।
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वर्ष 2022 में दुधवा टाइगर रिजर्व में मोटिवेटर के रूप में जुड़ने के बाद उन्होंने वन्यजीव विशेषज्ञों से औपचारिक प्रशिक्षण लिया।निशा अब तक आबादी वाले क्षेत्रों से 300 से अधिक जहरीले सांप और दस से अधिक मगरमच्छ सुरक्षित निकालकर जंगलों में छोड़ चुकी हैं।
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उन्होंने महज दो मिनट में एक 18-फुट लंबे विशाल अजगर का रेस्क्यू करके तहलका मचा दिया था, जो कि उनके सबसे कठिन ऑपरेशनों में से एक था। उनके इस साहसिक कार्य से दुधवा से सटे लगभग 50 गांवों के निवासियों को जंगली जानवरों के खतरे से सुरक्षा और राहत मिली है।
