उत्तर प्रदेश में एप से होगी पशुओं की निगरानी, टैग से पशुपालक की पहचान
उत्तर प्रदेश में अब दूध निकालने के बाद गोवंशी को खुला छोड़ने वाले पशुपालकों की पहचान आसान होगी। भारत पशुधन ...और पढ़ें

खरीद-बिक्री का ब्योरा पोर्टल पर होगा अपलोड। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
पशुओं की पहचान के लिए भारत पशुधन एप पर पंजीकरण।
इयर टैगिंग से पशुपालकों का ब्योरा क्यूआर कोड से मिलेगा।
बेसहारा पशुओं से होने वाले नुकसान पर लगेगी रोक।
जागरण संवाददाता, कसया, (कुशीनगर)। दूध निकालने के बाद गोवंशी को खुला छोड़ने वाले पशुपालकों की अब आसानी से पहचान हो सकेगी। पशुओं की खरीद-बिक्री से लेकर उनकी पहचान तक के लिए डिजिटल निगरानी की व्यवस्था लागू की जा रही है। भारत पशुधन एप पर पशुओं का पंजीकरण होगा, इसके साथ ही इयर टैगिंग कराई जाएगी।
टैग पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही पशु और उसके पंजीकृत पशुपालक का ब्योरा सामने आ जाएगा। इसके साथ ही नेशनल डिजिटल लाइव स्टाक मिशन के तहत पशुओं की खरीद-बिक्री का रिकार्ड भी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। पिछले एक दशक से प्रदेश में बेसहारा पशुओं के कारण फसल में नुकसान और बढ़ते हादसे का परेशानी बने हैं।
यह भी बात सामने आई है कि दुधारू पशुओं से दूध निकालने के बाद पशुपालक गोवंशी को खुला छोड़ देते हैं। इससे फसलों को नुकसान के साथ सड़क हादसों का खतरा बना रहता है। इस पर रोक लगाने के लिए नेशनल डिजिटल लाइव स्टाक मिशन के तहत सरकार ने योजना तैयार की है।
पशुपालन विभाग के अंतर्गत संचालित योजना में दुधारू पशुओं की संख्या को पोर्टल पर ब्लाकवार दर्ज की जाएगी। पशुओं की गणना पूर्व में हो चुकी है। इसके साथ ही पशुओं की ईयर टैगिंग होगी, इस टैग में पशुपालक का ब्यौरा दर्ज होगा। जिसे स्कैन कर पता लगाया जा सकेगा।
पंचायत सहायक करेंगे निगरानीे मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. शांति प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि मुख्य उद्देश्य घूमने वाले पशुओं को रोकना है। गांव, ब्लाक, तहसील और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा। ग्राम स्तर पर पंचायत सहायक, ब्लाक स्तर पर पशु चिकित्सा अधिकारी और तहसील स्तर पर एसडीएम की देखरेख में निगरानी होगी।
ग्राम पंचायतें पशुओं खरीद-बिक्री का रिकार्ड सुरक्षित रखेंगी। घूमने वाले दुधारू पशुओं की निगरानी ग्राम पंचायत करेंगे। पशुओं के मिलने पर टैग के जरिए पशुपालक की जानकारी की जाएगी। इसके बाद कार्रवाई होगी। एप पर पंजीकरण कर प्रक्रिया एक नवंबर से शुरु होगी।
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2230 गोवंशी सहभागिता योजना के
तहत पशुपालकों के सुपुर्दः गोवंश संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सहभागिता योजना के तहत जिले में 2230 गोवंशी पशुपालकों को सुपुर्द किए गए हैं। प्रत्येक गोवंशी के चारा-पानी के लिए पशुपालक को 1500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। हर माह गोवंशियों का सत्यापन कराया जाता है। सत्यापन ब्लाक व नगर निकाय की टीम करने के बाद उसकी रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजती है। सत्यापन के बाद ही निर्धारित धनराशि का भुगतान किया जाता है।
- जिले में पशुओं का आंकड़ा गोशाला - 8
- गोशाला में संरक्षित पशु - 760
- गोवंश - 165244
- महिष वंश - 170211
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