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900 रुपये का भाव, फिर भी जेब खाली, महराजगंज में आलू की खेती का 'घाटे वाला गणित'

Published: Wed, 21 Oct 2026 01:02 PM (IST)

आलू की खेती करने वाले किसानों को लागत और भंडारण खर्च के कारण उचित मुनाफा नहीं मिल पा रहा है। ...और पढ़ें

फरेंदा क्षेत्र के पांच कोल्ड स्टोरेज में जमा हैं करीब 27 हजार पैकेट आलू। जागरण

फरेंदा क्षेत्र के पांच कोल्ड स्टोरेज में जमा हैं करीब 27 हजार पैकेट आलू। जागरण

HighLights

  1. आलू किसानों का मुनाफा लागत और भंडारण खर्च से दबा।

  2. फरेंदा के कोल्ड स्टोरेज में 27 हजार पैकेट आलू जमा।

  3. 900-1000 रुपये क्विंटल बिकने पर भी लागत निकालना मुश्किल।

जागरण संवाददाता, आनंदनगर। आलू की खेती करने वाले किसानों को लागत के मुकाबले उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। खेत में फसल तैयार करने से लेकर कोल्ड स्टोरेज में भंडारण और बाजार तक पहुंचाने में होने वाला खर्च उनकी कमाई को प्रभावित कर रहा है। फरेंदा क्षेत्र के पांच कोल्ड स्टोरेज में करीब 27 हजार पैकेट आलू जमा हैं।

बाजार में आलू का भाव 900 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसानों को खेती की लागत और मजदूरी निकालने में मुश्किल हो रही है। भंडारण के बाद भी अपेक्षित मुनाफा नहीं मिलने से किसान और व्यापारी दोनों परेशान हैं।

क्षेत्र में श्रीमती रामदेई देवी, मथुरा, विशंभर, प्रेम और गंगोत्री कोल्ड स्टोरेज संचालित हैं। इनमें आलू के एक सीजन के भंडारण का खर्च करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल है। एक क्विंटल आलू के दो पैकेट बनाए जाते हैं, जिनमें प्रत्येक का वजन 50 किलोग्राम होता है। इस तरह एक क्विंटल आलू के भंडारण पर कुल 400 रुपये खर्च होते हैं।

बाजार में एक क्विंटल आलू 900 से 1000 रुपये में बिकने पर भंडारण खर्च निकालकर 500 से 600 रुपये बचते हैं। हालांकि, इसमें आलू की खेती, मजदूरी, खोदाई और ढुलाई पर होने वाला खर्च शामिल नहीं है। इन सभी खर्चों को जोड़ने के बाद किसानों की वास्तविक बचत काफी कम रह जाती है।

आलू के भंडारण का सीजन 25 फरवरी से 31 अक्टूबर तक रहता है। इसके बाद किसान और व्यापारी कोल्ड स्टोरेज से आलू निकालकर बाजार में बेचते हैं। कोल्ड स्टोरेज से निकाले जाने वाले आलू का इस्तेमाल मुख्य रूप से अगली फसल की बुआई के लिए किया जाता है। कुछ व्यापारी ही इसे खाने के लिए बाजार में 12 किलोग्राम की मात्रा में बेचते हैं।

अब्दुल मजीद ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से आलू की बिक्री में परेशानी बनी हुई है। कोल्ड स्टोरेज से आलू निकालने के बाद उसे बेचने में काफी दिक्कत होती है। खर्च के मुकाबले बचत कम रह जाती है।

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किसान रविंद्र कुमार ने बताया कि भंडारण के बाद आलू बेचने से मिलने वाली रकम में खेती और अन्य खर्च जोड़ने पर हाथ में कुछ खास नहीं बचता। यदि कोल्ड स्टोरेज में रखने के बजाय खेत से ही आलू बेच दिया होता, तो उसी समय 900 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक्री हो जाती।

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