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नेपाल से ओडिशा तक, नशे के नेटवर्क का ट्रांजिट प्वाइंट बन रहा कुशीनगर

Published: Fri, 18 Sep 2026 03:00 PM (IST)

कुशीनगर में 40 लाख की अफीम के साथ एक तस्कर की गिरफ्तारी ने नेपाल से ओडिशा तक फैले बड़े नशा ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. कुशीनगर में 40 लाख की अफीम के साथ तस्कर शेषनाथ साहनी गिरफ्तार।

  2. नेपाल से ओडिशा तक फैला नशा तस्करी का बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क।

  3. कुशीनगर मादक पदार्थों की तस्करी के लिए प्रमुख ट्रांजिट प्वाइंट बना।

अजय कुमार शुक्ल, कुशीनगर। नेपाल के बारा जिले से करीब 40 लाख रुपये की अफीम लेकर कुशीनगर के कसया पहुंचे शेषनाथ साहनी उर्फ बद्रीनाथ की गिरफ्तारी ने कुशीनगर में सक्रिय नशा तस्करी के नेटवर्क पर फिर सवाल खड़े किए हैं। उसके पास भंसार की नकदी रसीद मिलना मामले की गंभीरता और बढ़ाता है। यह पहली घटना नहीं है, जिसमें जनपद की सीमा के बाहर तक तस्करी के तार पहुंचे हों।

अप्रैल 2026 में दो अंतरराज्यीय तस्कर पांच करोड़ की 2.505 किलोग्राम हेरोइन के साथ पकड़े गए थे। दोनों बिहार और झारखंड से जुड़े थे। इससे भी बड़ा नेटवर्क गांजा तस्करी में दिखा। सितंबर 2025 में तमकुहीराज में एक टैंकर से 500 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ था। यह खेप ओडिशा से चली थी और बिहार के रास्ते कुशीनगर पहुंची थी। गोरखपुर, संतकबीरनगर, देवरिया और बस्ती तक सप्लाई की बात सामने आई थी।

मार्च 2026 में गांजा तस्करी के एक गिरोह में तो चार पुलिसकर्मियों की ही भूमिका सामने आई, मुकदमा दर्ज हुआ, दो पुलिसकर्मी आज तक नहीं पकड़े जा सके। इस गिरोह के तार ओडिशा, बिहार, मऊ और गोरखपुर तक जुड़े मिले थे। इससे जो तस्वीर दिखती है उसमें, नेपाल से अफीम की खेप, ओडिशा से गांजे की बड़ी खेप और बिहार-झारखंड से हेरोइन की आपूर्ति का रास्ता और कुशीनगर ट्रांजिंट प्वाइंट दिखता है।

दरअसल, भौगोलिक रूप से भी कुशीनगर इस पूरे परिदृश्य में महत्वपूर्ण है। एक ओर नेपाल की सीमा और दूसरी ओर बिहार से सीधा संपर्क है। राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से यह पूर्वांचल के बड़े शहरों से जुड़ा है। यही कारण है कि तस्करी के मामलों में कुशीनगर कभी गंतव्य, कभी ट्रांजिट और कभी स्थानीय सप्लाई केंद्र के रूप में सामने आता रहा है।

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कुशीनगर में पकड़ी गई खेपें इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यहां से बरामदगी केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रही है। अलग-अलग मामलों में नेपाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, मऊ, गोरखपुर और पूर्वांचल के कई जिलों के नाम सामने आए हैं।

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मादक पदार्थों की तस्करी रोकने को लेकर चलाए जा रहे अभियान के चलते ही इसकी खेप पकड़ में आ रही है। इसके गिरोह के तार अन्य शहरों से जोड़ कर व पकड़े गए तस्करों की पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।