कुशीनगर में नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ा, सलिकपुर और महादेवा गांव में घुसा पानी; प्रशासन अलर्ट
नेपाल में मूसलाधार वर्षा और जनपद में तीन दिन से हो रही बारिश के कारण नारायणी नदी का डिस्चार्ज 3.04 ...और पढ़ें

हरिहरपुर गांव में घुसा बाढ़ का पानी। जागरण
HighLights
नारायणी नदी का डिस्चार्ज 3.04 लाख क्यूसेक पहुंचा।
सलिकपुर और महादेवा गांव पानी से घिर गए।
प्रशासन ने तटबंधों का निरीक्षण कर सुरक्षा बढ़ाई।
जागरण संवाददाता, कुशीनगर। नेपाल में हो रही मूसलाधार वर्षा संग जनपद में तीन दिन से हो रही बारिश शनिवार की दोपहर तक डिस्चार्ज 3.04 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया तो सलिकपुर व महादेवा गांव में नारायणी का पानी उतर आया। दोनों गांवों चारों ओर से पानी से घिर गए हैं तो अन्य गांवों की दहलीज पर इस खतरे की दस्तक हो गई है।
पहले से अलर्ट मोड में रहा प्रशासन बचाव कार्य को लेकर टीम संग पहुंचा तो जनप्रतिनिधि भी हालात बिगड़ता देख बांध तक पहुंचे। दियारा यानी कि नदी उस पर बसे सात गांवों के लोगों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। वे पलायन करने की तैयारी में दिख रहे हैं। हालांकि, हालात अभी इस कदर नहीं हुए हैं कि, बाढ़ का पानी विनाशकारी रूप ले, लेकिन लगातार बढ़ रहेपानी के डिस्चार्ज को लेकर इसकी आंशका से इन्कार भी नही किया जा सकता।
अपर जिलाधिकारी पवन कुमार ने खड्डा तहसील के संवेदनशील छितौनी तटबंध का स्थलीय निरीक्षण करने पहुंचे। अति संवेदनशील मदनपुर भेड़ियारी स्थित ठोकर संख्या तीन पर पहुंचकर नारायणी नदी के बहाव और तटबंध की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। बाढ़ खंड और राजस्व विभाग के अधिकारियों से नदी में पानी के डिस्चार्ज, तटबंध की सुरक्षा तैयारियों और संभावित खतरों पर विस्तृत रिपोर्ट देने के साथ लगातार नजर रखने को कहा।

छितौनी बांध के ठोकर संख्या तीन का जायजा लेते और अधीनस्थ को निर्देश देते बाएं से तीसरे एडीएम पवन कुमार। जागरण
कहा कि, तटबंध की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नदी के जलस्तर की पल-पल की रिपोर्ट कंट्रोल रूम को भेजी जाए। साथ ही तटबंध पर नियमित गश्त और नाइट पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए। तटबंध से सटे गांवों के ग्रामीणों से भी बातचीत की।
यह भी पढ़ें- कुशीनगर में टूटे रेलवे ट्रैक से टला बड़ा रेल हादसा, घंटों बाधित रहा आवागमन
सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन की ओर से लाउडस्पीकर के माध्यम से अपील की गई कि कोई भी ग्रामीण, बच्चा या पशुपालक नदी के किनारे या जलभराव वाले क्षेत्रों में न जाए। निरीक्षण के समय एसडीएम संतराज सिंह बघेल, क्षेत्राधिकारी अजय कुमार श्रीवास्तव, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, बाढ़ कार्य खंड तथा राजस्व विभाग के आला अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
