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अंधविश्वास पड़ा जान पर भारी: झाड़-फूंक के चक्कर में 22 लोगों ने गंवाई जान, कुशीनगर में सर्पदंश का तांडव

Published: Sat, 12 Sep 2026 01:53 PM (IST)

कुशीनगर में बरसात के मौसम में सर्पदंश के मामले तेजी से बढ़े हैं, जहां पिछले 30 दिनों में 663 मरीज ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. कुशीनगर में 30 दिनों में 663 सर्पदंश मरीज भर्ती हुए।

  2. झाड़-फूंक के कारण 22 लोगों की जान गई, इलाज में देरी घातक।

  3. चिकित्सकों की सलाह: सर्पदंश पर तुरंत अस्पताल पहुंचें, एएसवी उपलब्ध।

जागरण संवाददाता, पडरौना। बरसात के मौसम में उमस भरी गर्मी के बीच जिले में सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। मेडिकल कालेज में पिछले 30 दिनों के दौरान सर्पदंश के 663 मरीज भर्ती किए गए। इसमें लापरवाही बरतने के कारण 22 की जान चली गई। चिकित्सकाें का कहना है कि झाड़-फूंक में विलंब के कारण सर्पदंश के शिकार को समय से उपचार की सुविधा नहीं मिली, जिसके कारण बचाया नहीं जा सका।

परिजन पहले झाड़-फूंक और घरेलू उपचार के चक्कर में समय गंवा देते हैं, जिससे मरीज की हालत गंभीर हो जाती है। सर्पदंश के शिकार बांसगांव की सीमा देवी, जंगल नाहर छपरा के कल्लू, खिरकिया के रामकेश सिंह, रामकोला की बिंदु देवी को भर्ती कराया गया, जिनका उपचार चल रहा है। शुक्रवार को पहुंचे बिहार के पश्चिमी चंपारण के बगहा के 22 वर्षीय सत्येंद्र सिंह की हालत गंभीर देख चिकित्सकों ने गोरखपुर मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया।

अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन सहित आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों का उपचार चल रहा है। डाक्टरों का कहना है कि सर्पदंश के बाद शुरुआती आधे घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इमरजेंसी इंचार्ज पुष्कर पाठक ने बताया कि बीते 21 जुलाई से 20 अगस्त तक 663 सर्पदंश के शिकार आए, जिनके उपचार में कुल 1300 एएसवी खर्च हुए और सभी स्वस्थ हैं।

घबराएं नहीं बल्कि अस्पताल पहुंचाएं
चिकित्सकों ने कहा कि सर्पदंश की घटना होने पर घबराएं नहीं और न ही झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र के भरोसे रहें। प्रभावित अंग को अनावश्यक रूप से न काटें, न ही कसकर बांधें। मरीज को शांत रखते हुए जल्द से जल्द नजदीकी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कालेज पहुंचाएं। समय पर उपचार मिलने से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। अंगुली व पैर में काटने पर लगभग दो घंटे के भीतर उपचार शुरू हो जाना चाहिए।

यह होती है परेशानी
आंख से धुंधला दिखाई देने लगता है, उल्टी, पेट दर्द व काटने वाले स्थान पर असहनीय दर्द व काला धब्बा पड़ जाता है। आवाज में बदलाव, मुंह से लार निकलना।

कहते हैं चिकित्सक
वरिष्ठ फिजिशियन डा. उपेंद्र चौधरी कहते हैं कि सर्पदंश के शिकार भयभीत हो जाते हैं। इसकी वजह से उन्हें घबराहट, बेचैनी, चक्कर, झनझनाहट महसूस होने लगती है। सदमे के कारण कई बार लोगों को हार्ट अटैक हो जाता है। तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल में उपचार कराएं।

सर्पदंश से महिला की मौत
नौरंगिया थाने के बलुवार में घास काटने जाते समय सर्पदंश की शिकार हुई 40 वर्षीय महिला को बेहोशी की हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटवा ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। 40 वर्षीय प्रभावती देवी बुधवार सुबह करीब 11 बजे एक अन्य महिला के साथ खेत में घास काटने जा रही थीं कि रास्ते में साथ चल रही महिला ने आगे सांप होने की बात कही।

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इस दौरान सांप ने प्रभावती को काट लिया। साथ मौजूद महिला उन्हें घर लेकर पहुंची, जहां से परिजन तत्काल सीएचसी कोटवा ले गए। चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद मृत घोषित कर दिया। स्वजन ने बताया कि अस्पताल से लौटने के बाद भी वे अंतिम उम्मीद में झाड़-फूंक कराने में जुटे रहे। शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया गया। स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है।

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संर्पदंश के शिकार लोगों के उपचार के लिए 3000 एंटी स्नैक वेनम उपलब्ध है। पांच हजार की और मांग की गई है। किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। स्वजन को चाहिए कि रोगी तत्काल अस्पताल पहुंचाएं, ताकि समय से उपचार की सुविधा मिल सके। विलंब होने पर जान को खतरा अधिक रहता है।

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-डा.केपी गोंड, प्राचार्य, मेडिकल कालेज, कुशीनगर