वाराणसी-गया और कुशीनगर से मजबूत होगा यूपी का बौद्ध सर्किट, 2467 करोड़ के प्राइवेट निवेश से निखरेगा पर्यटन नेटवर्क
केंद्र सरकार बौद्ध सर्किट के प्रमुख तीर्थ स्थलों को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए वाराणसी, गया और कुशीनगर हवाई अड्डों को पीपीपी मॉडल पर लीज पर देगी।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
वाराणसी, गया, कुशीनगर हवाई अड्डे पीपीपी मॉडल पर लीज पर।
बौद्ध सर्किट को हवाई मार्ग से जोड़ने की केंद्र की पहल।
2467 करोड़ रुपये का निजी निवेश, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा।
अजय कुमार शुक्ल, कुशीनगर। बौद्ध सर्किट के प्रमुख तीर्थ स्थलों को हवाई मार्ग से सीधे जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वाराणसी, गया और कुशीनगर एयरपोर्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी माडल) के तहत एक ही समूह में जोड़कर पट्टे (लीज) पर देने की तैयारी है। चार अगस्त को पीपीपी अप्रेजल कमेटी की 149वीं बैठक में इसको सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।
अब जल्द ही टेंडर और बिडिंग की प्रक्रिया शुरू होगी। इन तीनों प्रमुख केंद्रों के एक साझा एयर नेटवर्क में बंधने से दुनिया भर के बौद्ध देशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक ही यात्रा में पूरा बौद्ध सर्किट पूरा करना बेहद आसान हो जाएगा। इस योजना में करीब 2467 करोड़ रुपये के निजी निवेश का अनुमान है।
तीनों स्थलों को जोड़ने वाला इस हवाई नेटवर्क के तैयार होने पर दुनिया के बौद्ध देशों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ठहराव भी बढ़ेगा। एक ही बार में बुद्ध के जीवन से जुड़े सभी स्थलों की यात्रा वायुमार्ग से पूरी होगी। इस यात्रा का कुशीनगर बड़ा केंद्र बनेगा। तीनों एयरपोर्टों की भूमिका पूरक के रूप में होगी। वाराणसी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के कारण हब की भूमिका निभाएगा।
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गया बौद्ध पर्यटकों के लिए पहले से स्थापित केंद्र है। कुशीनगर अंतिम धार्मिक पड़ाव के रूप में अपनी विशिष्टता से पर्यटकों को जोड़ेगा। यदि ऐसा हुआ तो 2023 से बंद कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दिन तो बहुरेंगे ही, बौद्ध सर्किट के तीनों प्रमुख पड़ावों को जोड़ने वाले पर्यटन नेटवर्क का अहम हिस्सा बनेगा। इसका लाभ विमानन से निकलकर पूर्वांचल की पूरी पर्यटन अर्थव्यवस्था तक पहुंचेगा।
भौगोलिक नहीं, धार्मिक कनेक्शन बनेगा आधार
बोधगया में बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ, सारनाथ में उन्होंने पहला उपदेश दिया और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण हुआ। कुशीनगर एयरपोर्ट के उद्घाटन के समय इसे लुंबिनी, बोधगया, सारनाथ और श्रावस्ती जैसे प्रमुख बौद्ध स्थलों को जोड़ने वाले नेटवर्क के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया गया था। 2021 में श्रीलंका से आई पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान ने इस कनेक्टिविटी की शुरुआत की थी।
ये हैं हवाई अड्डों के पांचों समूह
लीज पर देने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) के 11 हवाई अड्डों को बड़े और छोटे हवाई अड्डों के साथ जोड़कर पांच समूहों में बांटा गया है। समूह एक में अमृतसर (पंजाब) और कांगड़ा-गग्गल (हिमाचल प्रदेश) हैं। दो वाराणसी (उत्तर प्रदेश), गया (बिहार) और कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)। तीन में भुवनेश्वर (ओडिशा) और हुबली (कर्नाटक)। चार में रायपुर (छत्तीसगढ़) और औरंगाबाद/छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र) व पांच में तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु) और तिरुपति (आंध्र प्रदेश) को रखा गया है।
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इस एकीकृत माडल से जिले में पर्यटन और विकास के नए रास्ते खुलेंगे। विदेशी सैलानियों की संख्या बढ़ने से होटल, टैक्सी, रेस्टोरेंट, टूर आपरेटर, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प और स्मृतिचिह्न (सुवेनिर) के कारोबार में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। -महेंद्र सिंह तंवर, डीएम कुशीनगर
