कौशांबी में बुखार से सगी बहनों समेत तीन बच्चियों की मौत, 5 और बच्चे भी चपेट में आए
कौशांबी में बुखार से दो सगी बहनों समेत तीन बच्चियों की मौत हो गई है, जबकि पांच अन्य बच्चे भी इसकी चपेट में हैं।

आलमचंद गांव में बीमारी के बारे में लोगों से जानकारी लेती हुई स्वास्थ्य विभाग की टीम
HighLights
कौशांबी में बुखार से तीन बच्चियों की दुखद मौत।
सीएमओ ने मेनिंजाइटिस को बताया मौत का कारण।
गांव में गंदगी और मच्छरों से बीमारी फैलने का आरोप।
संवाद सूत्र, कौशांबी। बुखार से दो सगी बहनों समेत तीन बच्चियों की मौत हो गई। वहीं, पांच अन्य बच्चे भी चपेट में हैं। उनका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है। तीन दिन के अंतराल में दो गांवों में बच्चियों की मौत से दहशत फैल गई है। वहीं, घटना की जानकारी होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मंगलवार की रात प्रभावित गांव में जाकर पीड़ित स्वजन व मरीजों से मिली। टीम की जांच के बाद सीएमओ डा. संजय कुमार ने सगी बहनों की मौत की वजह मेनिंजाइटिस (दिमागी बुखार) बताया।
आलमचंद गांव निवासी कालीदीन की आठ वर्षीय बेटी आसमा को शनिवार दिन में तेज बुखार हुआ। हालत बिगड़ने पर परिवार के लोग उसे प्रयागराज स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे चिल्ड्रेन अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल में उसकी मौत हो गई। परिवार इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि सोमवार रात उसकी चार वर्षीय सगी बहन यशि की भी तबीयत बिगड़ गई।
स्वजन उसे कानपुर के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई। पिता के मुताबिक दोनों बेटियों का उपचार करने वाले चिकित्सकों ने लगातार प्लेटलेट्स कम होने की जानकारी दी थी। एक ही परिवार में दो मासूम बेटियों की मौत से गांव में शोक का माहौल है। इसी गांव के राजेश के 11 वर्षीय बेटे आर्यन और 10 वर्षीय अरविंद के अलावा हीरालाल, पप्पू और कमल भी बुखार से पीड़ित हैं।
सभी का स्थानीय निजी अस्पतालों में उपचार कराया जा रहा है। उधर, बसेढ़ी गांव निवासी जब्बर की ढाई वर्षीय बेटी कनिका की भी शनिवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। उसे भी तेज बुखार की शिकायत के बाद निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लगातार तीन बच्चियों की मौत से क्षेत्र में बीमारी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
डीएम डॉ. अमित पाल को घटना की जानकारी होने के बाद उनके निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ। सीएमओ ने मंगलवार की रात में ही प्रभारी चिकित्साधिकारी मूरतगंज डा. कुश शर्मा के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम को आलमचंद गांव भेजा। डॉ. कुश शर्मा ने बताया कि आसमा का चिल्ड्रेन अस्पताल में कमर से सैंपल लिया गया था, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही मौत हो गई।
उनके मुताबिक पिता ने बताया कि बुखार होने पर दोनों बहनों के बड़बड़ाने के साथ शरीर में ऐंठन भी हो रही थी। यह लक्षण मेनिंजाइटिस (दिगामी बुखार) के हैं। सामान्य तौर पर ऐसा बैक्टीरियल इंफेक्शन से होता है। इसी वजह से दोनों बहनों की मौत हुई।
आज दोनों गांवों में लगेगा कैंप
सीएमओ ने यह भी बताया कि जिस गांव में सगी बहनों की मौत हुई। वहां स्वास्थ्य टीम ने जाकर मरीजों को देखा।उन्हें दवाएं देने के साथ साफ-सफाई एवं अन्य सावधानी बरतने की हिदायत दी गई।बुधवार को स्वास्थ्य टीम इस गांव के साथ ही बसेढ़ी में कैंप लगाकर लोगों की जांच और उपचार करेगी।
गंदगी के कारण पनपे मच्छर बांट रहे बीमारी
आलमचंद गांव निवासी हीरालाल, दिलीप कुमार आदि का आरोप है कि गांव में जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा है। नालियों की सफाई भी नहीं कराई गई। इसकी वजह से मच्छरों ने जीना मुहाल कर रखा है।
मच्छरों के कारण ही बीमारी फैल रही है। ग्रामीणों ने गांव में सफाई और स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजकर जांच व उपचार कराने की मांग की है। इस बाबत मूरतगंज विकास खंड के एडीओ पंचायत आशीष केसरवानी ने कहा कि अगर गांव में गंदगी है तो टीम भेज कर साफ-सफाई कराई जाएगी।
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