यूपी में ऐप आधारित टैक्सी और डिलीवरी सेवाओं के लिए नए नियम लागू, ड्राइवरों की जांच-ट्रेनिंग जरूरी
उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐप आधारित परिवहन और डिलीवरी सेवाओं के संचालन के लिए नए नियम तय किए हैं, जिसके ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
ऐप आधारित सेवाओं के लिए लाइसेंस लेना अब अनिवार्य
चालकों की पृष्ठभूमि जांच, प्रशिक्षण और बीमा सुरक्षा जरूरी
किराये का निर्धारण, चालक को उचित हिस्सा सुनिश्चित किया गया
संवाद सहयोगी, कासगंज। उत्तर प्रदेश सरकार ने एप आधारित परिवहन और डिलीवरी सेवाओं के संचालन के लिए नए नियम तय कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश मोटर यान (तैंतीसवां संशोधन) समूहक और वितरण सेवा प्रदाता नियमावली-2026 के तहत समूहक यानी ऐप आधारित सेवा प्रदाताओं को लाइसेंस लेना अनिवार्य किया गया है। मौजूदा समूहकों को अधिसूचना के 90 दिन के भीतर लाइसेंस लेना होगा। लाइसेंस पांच वर्ष के लिए वैध रहेगा।
चालकों की जांच, प्रशिक्षण और बीमा अनिवार्य
नए नियमों में यात्रियों और चालकों की सुरक्षा पर खास जोर दिया गया है। चालक का आधार, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक खाते और आपराधिक पृष्ठभूमि का सत्यापन अनिवार्य होगा। चालक के पास कम से कम दो वर्ष का ड्राइविंग अनुभव भी होना चाहिए।आनबोर्डिंग से पहले न्यूनतम 40 घंटे का प्रशिक्षण देना होगा, जिसमें यातायात नियम, सुरक्षित वाहन चलाना, आपातकालीन सहायता और यात्रियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार शामिल है।
यात्रियों के लिए कम से कम पांच लाख रुपये का बीमा कवर तथा प्रत्येक चालक के लिए पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य और दस लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर सुनिश्चित करना होगा।
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किराये में गतिशील मूल्य निर्धारण की सीमा तय, चालक को मिलेगा निर्धारित हिस्सा
एआरटीओ राम प्रकाश मिश्र ने बताया कि नियम के अनुसार ऐप में लाइव लोकेशन, वाहन ट्रैकिंग, चालक की पहचान की पुष्टि, शिकायत व्यवस्था और 24 घंटे नियंत्रण कक्ष की सुविधा अनिवार्य होगी। आधार किराये के आधार पर गतिशील किराया अधिकतम डेढ़ गुना तक रखा जा सकेगा। अपने वाहन से सेवा देने वाले चालक को लागू किराये का कम से कम 80 प्रतिशत, जबकि समूहक के वाहन पर चालक को कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा।
