यूपी में यहां कुंभकर्ण की है आटा चक्की, रावण की 18 साल से चल रही प्रिंटिंग प्रेस
अकबरपुर की रामलीला में रावण और कुंभकर्ण जैसे प्रमुख पात्र निभाने वाले कलाकार दिन में अपने व्यवसाय संभालते हैं।

अनिल पिछले 18 वर्षों से मंच पर लंकापति की भूमिका निभा रहे
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रावण का किरदार निभाने वाले राजन द्विवेदी चलाते प्रिंटिंग प्रेस।
कुंभकर्ण की भूमिका में अशोक मिश्र दिन में चलाते आटा चक्की।
अकबरपुर के कलाकार काम के साथ रामलीला को देते समय।
जागरण संवाददाता, कानपुर देहात। रामलीला के मंच पर कलाकार अपने अभिनय से पात्रों को जीवंत करते हैं, लेकिन इनके जीवन की कहानी भी किसी रोचक प्रसंग से कम नहीं है। अकबरपुर की रामलीला में रावण और कुंभकर्ण जैसे प्रमुख पात्र निभाने वाले कलाकार दिन में अपने कामकाज में व्यस्त रहते हैं और शाम होते ही रामलीला के मंचन में जुट जाते हैं।
कोई आटा चक्की चलाता है तो कोई प्रिंटिंग प्रेस का संचालन करता है। कामकाज के बीच समय निकालकर अभिनय का अभ्यास करना इनकी दिनचर्या का हिस्सा है। अकबरपुर की रामलीला में कई पात्र बाहर से आते हैं, जबकि कई स्थानीय कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं। इनमें रावण का किरदार निभाने वाले राजन द्विवेदी उर्फ अनिल पिछले 18 वर्षों से मंच पर लंकापति की भूमिका निभा रहे हैं।
अभिनय की यह परंपरा उनके परिवार में लंबे समय से चली आ रही है। उनसे पहले उनके पिता शिवनारायण वर्ष 1985 से रावण का किरदार निभाते थे। वहीं, उनके बाबा रामकृष्ण द्विवेदी हनुमान की भूमिका निभाकर दर्शकों का मनोरंजन करते थे। रामलीला में कुंभकर्ण का किरदार निभाने वाले अशोक मिश्र आटा चक्की चलाते हैं।
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दिनभर चक्की पर काम करने के बाद वह रामलीला के मंचन की तैयारी में जुट जाते हैं। व्यस्तता के बावजूद वह अभिनय के लिए समय निकालते हैं, जिससे संवाद अदायगी और मंचन में कोई कमी न रह जाए। स्थानीय कलाकारों का कहना है कि रामलीला केवल अभिनय नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ने का माध्यम भी है।
