Kanpur HBTU के छात्रों का कमाल! फलों को सड़ने से बचाएगा एथिलीन पाउच, बचे खाने से बनेगा ईंधन
World Food Day: एचबीटीयू कानपुर के छात्रों ने विश्व खाद्य दिवस पर 'इनोवेट विद वेस्ट' प्रतियोगिता में फलों के छिलके, ...और पढ़ें

केले के छिलके से बने उत्पाद दिखाती कनिष्ठा व फलों को सड़ने से बचाने वाले एथिलीन पाउच के बारे में बताते हुए बाएं से आयुष और वेदांत। संस्थान
HighLights
फलों को सड़ने से बचाने वाला एथिलीन अवशोषित पाउच बनाया।
छात्रावास के बचे भोजन से जैविक खाद और जैव ईंधन।
केले के छिलकों से बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का निर्माण।
जागरण संवाददाता, कानपुर। World Food Day: रसोई में फेंके जाने वाले फलों के छिलके, हास्टल के बचे भोजन और नदियों में विसर्जित फूलों से अब उपयोगी उत्पाद बनाए जा सकते हैं। हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) के विद्यार्थियों ने इन बेकार समझे जाने वाले पदार्थों को उपयोगी संसाधन में बदलने के अभिनव प्रयोग किए हैं।
विश्व खाद्य दिवस पर खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग और एएफएसटी (इंडिया) की ओर से आयोजित ‘इनोवेट विद वेस्ट’ प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण के साथ कचरे के बेहतर इस्तेमाल की संभावनाएं प्रस्तुत कीं।
एचबीटीयू के खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग और एएफएसटी (इंडिया) की ओर से शुक्रवार को आरके आडिटोरियम में ''''विश्व खाद्य दिवस-2026'''' पर आज का नवाचार -कल का पोषण थीम पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि एवं कुलपति प्रो. समशेर ने कहा कि खाद्य चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक शोध और नवाचार जरूरी हैं। प्रो. अनुराग सिंह, प्रो. विवेक कुमार, प्रो. पीकेएस यादव और प्रो. अलक कुमार सिंह ने भी तकनीकी विकास को रेखांकित किया। तकनीकी सत्र में गुरुग्राम के अमित कुमार और निफ्टेम के प्रो. मुरलीधर मेघवाल ने भी अनुसंधान के बारे में बताया।
फलों को जल्दी सड़ने से बचाएगा पाउच
आयुष तिवारी, कृष्णा शर्मा, शिवानी और वेदांत की टीम ने नारियल के रेशों और धान की भूसी से एथिलीन अवशोषित करने वाला पाउच तैयार किया। यह फलों से निकलने वाली एथिलीन गैस को सोखकर उनके पकने और खराब होने की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद कर सकता है। इससे कटाई के बाद फलों की बर्बादी कम करने की संभावना है।
हास्टल के बचे भोजन से बनेगी खाद
आदित्य अग्रवाल ने हास्टल की मेस से निकलने वाले बचे भोजन के निस्तारण का माडल प्रस्तुत किया। इसमें खाद्य कचरे से प्लास्टिक अलग कर सूखी पत्तियों के साथ प्रसंस्करण के जरिए जैविक खाद और जैव ईंधन तैयार करने की अवधारणा रखी गई। वहीं, अदिति सिंह और जानवी कौशल ने केले के छिलकों से बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाकर पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग का विकल्प सुझाया।
छिलकों और फूलों का भी होगा इस्तेमाल
वैभव सिंह ने संतरे के छिलके के पाउडर और बेकिंग सोडा से बर्तन साफ करने वाला ‘सिट्रस स्क्रब’ तैयार किया। नंदिनी खत्री ने अंडों के छिलकों से कैल्शियम कार्बोनेट युक्त पाउडर बनाया, जिसका उपयोग सफाई और अन्य उत्पादों में किया जा सकता है। अनाया सिंह भवानी ने विसर्जित फूलों से चारकोल-मुक्त अगरबत्ती तैयार करने का प्रयोग किया।
मौसमी के छिलकों से हर्बल फेसपैक
कुमी यादव ने मौसमी के छिलकों से हर्बल फेसपैक बनाया, जबकि कनिष्ठा गर्ग, प्रशांत सिंह और प्रियांश गुप्ता ने केले के रेशों से सजावटी उत्पाद और हस्तनिर्मित कागज तैयार किए। इन प्रयोगों के जरिए विद्यार्थियों ने अपशिष्ट को बोझ मानने के बजाय उसे उपयोगी संसाधन में बदलने की संभावनाएं सामने रखीं।
