प्राची पांडेय ने दिव्यांगता को मात देकर पैरा एशियाई खेल सेमीफाइनल में बनाई जगह, थाईलैंड की खिलाड़ी को 3-1 से हराया
प्राची पांडेय ने जापान में चल रहे पैरा एशियाई खेल 2026 में महिला एकल क्लास-6 के सेमीफाइनल में जगह बनाई। ...और पढ़ें

प्राची। स्वजन
HighLights
चुनौतियों के बीच संघर्ष और मेहनत से उन्नाव की बिटिया ने लिखा इतिहास
एशियाई पैरा खेलों में टेबल टेनिस स्पर्धा के सेमीफाइनल में प्राची के पहुंचने से लोग खुश
प्रदेश से हिस्सा लेने वाली एकमात्र खिलाड़ी, माता-पिता व कोच को दिया सफलता का श्रेय
जागरण संवाददाता, कानपुर/उन्नाव। जीवन में चुनौतियों से जो हार नहीं मानते हैं, वही इतिहास लिखते हैं। ऐसे ही दाएं पैर से दिव्यांग उन्नाव की बिटिया प्राची पांडेय ने संघर्ष और मेहनत से इतिहास लिखा है। उन्होंने एशियाई पैरा खेलों में टेबल टेनिस स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंचकर बता दिया कि मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो फिर कोई मुश्किल आड़े नहीं आती है।
उन्नाव में सोमवार को उनके सेमीफाइनल में पहुंचने की जानकारी आते ही हर तरफ लोग खुश दिखाई पड़े। प्राची के स्वजन को बधाई देने वालों का तांता लग गया। प्राची ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और कोच को दिया।
जापान में 18 अक्टूबर से चल रहे पैरा एशियाई खेल 2026 में भारतीय पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी प्राची पांडेय ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला एकल क्लास-6 के सेमीफाइनल में जगह बनाई। प्राची ने ग्रुप-ए के मुकाबले में थाईलैंड की खिलाड़ी को 3-1 से हराया। अब 20 अक्टूबर को उनका मुकाबला इराक की खिलाड़ी के साथ होगा। वे उत्तर प्रदेश की पहली खिलाड़ी हैं, जो पैरा एशियन गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
छड़ी के सहारे पैरा खेल जगत में सनसनी बनकर उभरी प्राची का संघर्ष एक मिसाल बन रहा है। छह स्पाइन सर्जरी के बाद भी पैर शरीर का भार उठाने में असमर्थ हैं, उसके बाद भी हौसला विश्व फलक पर ख्याति हासिल कर रहा है। जिस मंजिल की ओर से प्राची ने डगमगाते हुए कदम बढ़ाएं थे, वो अब मंजिल को हासिल कर रहे हैं। वे ब्राजील, जार्डन, थाईलैंड और नाइजीरिया में हुई पदक जीतने वाली शहर की पहली खिलाड़ी हैं।
मूलरूप से उन्नाव के जुरखन खेड़ा की प्राची प्रतिदिन तीन हजार सैडो शाट का अभ्यास कर कदमों की गतिविधियों को दुरुस्त कर रही हैं। शुरुआती समय में प्राची को प्रशिक्षित करने वाले कोच अमरेश ने बताया कि प्राची प्रतिदिन एक हजार सैडो शाट का अभ्यास कर पैरा एशियन गेम्स तक पहुंचने में सफल रही हैं। उनके पैर की गतिविधियों के साथ फोर हैंड, टाप स्पिन शाट प्रतिद्वंदी खिलाड़ियों के लिए चुनौती बन रहा है।
पहली बार प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहीं प्राची ने एक पैर के बल खड़े होकर एशिया भर के खिलाड़ियों के सामने अपना लोहा मनवाया है। वह पैरा टेबल टेनिस स्पर्धा में हिस्सा लेने वाली प्रदेश की एकमात्र खिलाड़ी हैं। प्राची ने मोबाइल फोन पर हुई बातचीत में बताया कि वह स्वर्ण पदक जीतने पर पूरा फोकस कर रही हैं। इससे पहले उन्होंने मार्च 2025 में स्पेन में हुई अंतरराष्ट्रीय पैरा टेबल टेनिस प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था।
प्राची की उपलब्धि उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों के आगे हार मान लेते हैं। शारीरिक सीमाओं को अपनी कमजोरी मानने के बजाय उन्होंने अपनी क्षमता को पहचाना और खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। उनके इस सफर में आत्मविश्वास की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्होंने बताया कि पिता शिवांकर पांडेय पुलिस विभाग में है। मां सरोज गृहिणी हैं। छोटा भाई अमन आइआइटी कानपुर से ग्रेजुएशन करने के बाद नौकरी कर रहे हैं। दूसरे भाई रजनीकांत वकालत के पेशे में हैं। शुरुआती दौर में उन्होंने कोच अमरीश कुमार से खेल की बारीकियां सीखीं। उनके सिखाए गुर अब काम आ रहे हैं।
