1141 एकड़ ट्रांसगंगा सिटी में बड़ा बदलाव, 140 एकड़ में गोल्फ कोर्स और क्लब, 900 करोड़ के पुलों से कनेक्टिविटी होगी आसान
यूपीसीडा ने ट्रांसगंगा सिटी के संशोधित तलपट मानचित्र को मंजूरी दी है, जिससे पीपीपी मॉडल पर अंतरराष्ट्रीय गोल्फ कोर्स और ...और पढ़ें

ट्रांस गंगा सिटी। जागरण
HighLights
ट्रांसगंगा सिटी का संशोधित तलपट मानचित्र स्वीकृत, विकास को गति मिलेगी
2014 में रखी थी आधारशिला, नौ सौ करोड़ के पुलों की सौगात से कनेक्टविटी होगी आसान
1141 एकड़ में विकसित ट्रांसगंगा सिटी में निजी निवेश से विकास को यूपीसीडा देगा रफ्तार
जागरण संवाददाता, कानपुर। ट्रांसगंगा सिटी में औद्योगिक विकास के साथ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं पीपीपी माडल पर विकसित की जाएंगी। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की 52वीं बोर्ड बैठक में ट्रांसगंगा सिटी के संशोधित तलपट मानचित्र को मंजूरी दे दी गई।
इसके तहत पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गोल्फ कोर्स, क्लब और विला जैसी सुविधाओं के विकास का रास्ता साफ हुआ है। प्राधिकरण अब सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल पर टेंडर के माध्यम से विकास कार्यों को आगे बढ़ाएगा। इससे औद्योगिक क्षेत्र में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
लखनऊ में बीते 15 अक्टूबर को बोर्ड अध्यक्ष एवं अवस्थापना और औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में ट्रांसगंगा सिटी की विकास योजना पर मुहर लगाई गई।
बोर्ड ने स्पष्ट किया कि गोल्फ कोर्स और अन्य सहयोगी सुविधाओं को शामिल करने के बावजूद कुल हरित क्षेत्र को सुरक्षित रखा जाएगा। संशोधित योजना का उद्देश्य भूमि का सुव्यवस्थित उपयोग करने के साथ औद्योगिक भूखंडों के नियोजन और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाना है।

140 एकड़ में विकसित होगा गोल्फ कोर्स और क्लब
ट्रांसगंगा सिटी में करीब 140 एकड़ भूमि पर अंतरराष्ट्रीय गोल्फ कोर्स और क्लब विकसित करने की योजना है। इसके साथ विला जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। इन सुविधाओं के विकास के लिए पीपीपी माडल अपनाया जाएगा। इसके तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी से परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इससे प्राधिकरण पर सीधे वित्तीय भार कम रखने के साथ निजी निवेश और विशेषज्ञता का लाभ लेने की संभावना बनेगी।
2014 में रखी गई थी आधारशिला
वर्ष 2014 में ट्रांसगंगा सिटी की आधारशिला रखी गई थी। करीब 1141 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रही इस परियोजना में औद्योगिक, आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत उपयोग के लिए भूमि निर्धारित की गई है। योजना के अनुसार 271.22 एकड़ भूमि हरित और जल क्षेत्र के लिए, जबकि 290.46 एकड़ सड़क के लिए आरक्षित है। इसके अलावा 157.32 एकड़ आवासीय, 145.61 एकड़ औद्योगिक, 110.12 एकड़ व्यावसायिक और 29.42 एकड़ संस्थागत उपयोग के लिए निर्धारित है।
आवासीय भूखंडों की बिक्री, औद्योगिक में अभी गुंजाइश
ट्रांसगंगा सिटी में अब तक 1003 आवासीय और 15 औद्योगिक भूखंड बिक चुके हैं। शेष भूखंडों में 166 आवासीय और 1057 औद्योगिक भूखंड शामिल हैं। औद्योगिक भूखंडों की उपलब्धता को क्षेत्र में नए निवेश आकर्षित करने की संभावना के तौर पर देखा जा रहा है। बोर्ड की मंजूरी से विकास योजना को आगे बढ़ाने और निवेशकों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने में मदद मिलेगी।
कानपुर से कनेक्टिविटी पर 903 करोड़ रुपये के कार्य
ट्रांसगंगा सिटी को कानपुर से सीधे जोड़ने के लिए वाई आकार के फोरलेन पुल का निर्माण कराया जा रहा है। इस परियोजना पर कुल 753 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त सरैया क्रासिंग पर 150 करोड़ रुपये की लागत से पुल बनाया जा रहा है। यूपीसीडा ने इसके लिए सेतु निगम को 20 करोड़ रुपये दिए हैं। पुल की लंबाई 1129 मीटर निर्धारित की गई है। इन परियोजनाओं से ट्रांसगंगा सिटी और कानपुर के बीच आवागमन बेहतर होने तथा औद्योगिक गतिविधियों को सहारा मिलने की उम्मीद है।
बोले आवंटी...
ट्रांसगगा सिटी में आवासों का आवंटन तो गया है, लेकिन सुविधाएं विकसित नहीं हैं। रोजमर्रा सामान की जरूरतों के लिए 15 से 20 किमी की दूरी पर जाना पड़ता है। मार्केट या माल बनने से आबादी का तेजी से विकास हो सकता है।
माया त्रिवेदी, अध्यक्ष, ट्रांसगंगा परिवार समिति
यूपीसीडा को स्थानीय निवासियों की सुविधाओं के विस्तारण को लेकर प्लान बनाने की जरूरत है। बोर्ड की बैठक में जो निर्णय हुए हैं, वह बेहतर हैं,इससे यहां के निवासियों की संख्या बढ़ेगी।
मुन्ना लाल, महामंत्री, ट्रांसगंगा परिवार समिति
फुटपाथ, सीवर जैसी समस्याओं से अभी निजात नहीं मिली है। सुरक्षा की दृष्टि से स्थिति बहुत बेहतर नहीं हैं। इस पर अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।
शिवदयाल शर्मा, निवासी
महिलाओं के लिए सुरक्षा सबसे जरूरी है। बाहर तो पुलिस की मौजूदगी रहती है, लेकिन शाम होते ही अराजकतत्वों की मौजूदगी सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। आवासों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध होने चाहिए।
रूपाली, निवासी

ट्रांसगंगा सिटी की संशोधित विकास योजना के अनुमोदन से क्षेत्र में नियोजित विकास और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा। इसके साथ ही पीपीपी माडल में विकास कार्यों के लिए कार्ययोजना तैयारी की जा रही है। डीपीआर बनने के बाद टेंडर निकाले जाएंगे। इससे यूपीसीडा को भी आमदनी होगी।
डा. बलकार सिंह, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यूपीसीडा
ट्रांसगंगा सिटी भूखंड एवं भूमि विवरण
कुल क्षेत्रफल: 1141 एकड़
🏢 बिक चुके प्लाट की संख्या
| श्रेणी | विवरण | संख्या |
|---|---|---|
| औद्योगिक प्लाट | विक्रेत | 15 |
| आवासीय प्लाट | विक्रेत | 1,003 |
🏘️ शेष प्लाट की संख्या
| श्रेणी | विवरण | संख्या |
|---|---|---|
| औद्योगिक प्लाट | शेष | 1,057 |
| आवासीय प्लाट | शेष | 166 |
🌳 आरक्षित भूमि विवरण
| भूमि का प्रकार | इकाई | क्षेत्रफल |
|---|---|---|
| आवासीय भूमि | एकड़ | 157.32 |
| औद्योगिक भूमि | एकड़ | 145.61 |
| व्यवसायिक भूमि | एकड़ | 110.12 |
| शैक्षिक संस्थान | एकड़ | 29.42 |
| हरित और पानी क्षेत्र | एकड़ | 271.22 |
| सार्वजनिक सुविधा क्षेत्र | एकड़ | 78.62 |
| सड़क | एकड़ | 290.46 |
| आरक्षित कृषि भूमि | एकड़ | 61.27 |
