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छह भाषाओं के उस्ताद सुंदरदास गोहराणी, जिन्होंने सिंधी में पिरोया देश का संविधान

Published: Fri, 23 Oct 2026 09:53 PM (GMT+05:30)

छह भाषाओं पर मजबूत पकड़ और अनुवाद के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाने वाले सुंदरदास गोहराणी ने सिंधी समाज को ...और पढ़ें

भारतीय संविधान का सिंधी भाषा (अरबी व देवनागरी लिपि) में किए गए अनुवाद को दिखाते सुंदरदास विशनदास गोहराणी। जागरण

भारतीय संविधान का सिंधी भाषा (अरबी व देवनागरी लिपि) में किए गए अनुवाद को दिखाते सुंदरदास विशनदास गोहराणी। जागरण

HighLights

  1. सुंदरदास गोहराणी ने भारतीय संविधान का सिंधी में अनुवाद किया

  2. उपराष्ट्रपति ने सिंधी संविधान संस्करण का विमोचन किया, कानपुर की उपलब्धि

  3. छह भाषाओं के ज्ञाता गोहराणी को कई राष्ट्रीय सम्मान मिले

जागरण संवाददाता, कानपुर। जब ज्ञान और अपनी संस्कृति के प्रति समर्पण एक हो जाते हैं, तो सुंदरदास विशनदास गोहराणी जैसी शख्सियतें जन्म लेती हैं। छह भाषाओं के इस मनीषी ने देश की आत्मा यानी 'भारतीय संविधान' को सिंधी भाषा में अनुवादित कर वैश्विक सिंधी समुदाय को उनकी अपनी जुबान में अधिकार और सम्मान का तोहफा दिया है।

दोनों लिपियों (देवनागरी और अरबी-फारसी) के समन्वय से तैयार इस कृति की गूंज देश के शीर्ष गलियारों तक पहुंची, जहां उपराष्ट्रपति ने इस पावन ग्रंथ के सिंधी संस्करण का विमोचन कर कानपुर की इस महान उपलब्धि पर देश की मोहर लगा दी। पढ़िए, जागरण संवाददाता मोहम्मद दाऊद खान की रिपोर्ट...

शास्त्रीनगर सिंधी कालोनी में रहने वाले सुंदरदास विशनदास गोहराणी केवल सिंधी भाषा के ही विशेषज्ञ नहीं हैं। अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, गुरुमुखी और गुजराती में भी उन्हें महारत हासिल है। संविधान के अनुवाद के साथ वे कई अन्य भाषाओं की किताबों का भी अनुवाद व संपादन कर चुके हैं।

sunderdas goharani

उन्होंने सिंधी शब्दकोश में भी सुधार किया है। उनको अपनी उपलब्धियों के लिए कई सम्मान भी मिल चुके हैं। उनका जन्म 22 मार्च 1947 में पाकिस्तान के सिंध में हुआ था। देश का बंटवारा हुआ तो पिता व माता के साथ पांच महीने की आयु में पहले अजमेर और फिर कानपुर आकर चमनगंज स्थित हुमायूं बाग में बस गए।

वर्ष 1954 में परिवार फर्रुखाबाद चला गया। वर्ष 1977 में स्टेट बैंक में नौकरी लगी। वर्ष 1980 में कानपुर आए तो यहीं के होकर रह गए। उन्होंने हिंदी साहित्य में एमए किया। अलग-अलग भाषाएं सीखने में रुचि के चलते अन्य भाषाओं का गहराई से अध्ययन करने लगे। धीरे-धीरे उनके पास सिंधी, उर्दू, गुरुमुखी, गुजराती, अग्रेजी, हिंदी में अनुवाद कराने के लिए लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया, जो बदस्तूर जारी है।


भारतीय संविधान को 11 महीने में सिंधी भाषा में किया तैयार

विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान मैसूर में राष्ट्रीय अनुवाद मिशन को भारतीय संविधान के सिंधी में अनुवाद का दायित्व सौंपा गया। अवध विश्वविद्यालय के सिंधी विभाग के सलाहकर ज्ञान प्रकाश टेकचंदाणी व आधुनिक भारतीय भाषा विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रवि प्रकाश टेकचंदाणी के माध्यम से राष्ट्रीय अनुवाद मिशन से सुंदरदास का जुड़ाव हुआ। वर्ष 2025 में उनको भारतीय संविधान को अंग्रेजी से सिंधी भाषा में अनुवाद का कार्य सौंपा गया। उन्होंने 11 महीने में सिंधी भाषा (अरबी लिपि) में संविधान का अनुवाद कर दिया। इसके बाद दो महीने में सिंधी भाषा देवनागरी लिपि में भी अनुवाद करने के साथ भाषा को जांच-परख कर अंतिम रूप भी दिया। सिंधी दिवस पर 10 अप्रैल 2026 को उपराष्ट्रपति ने दोनों अनुवादों का विमोचन किया।


उपलब्धियां और पुरस्कार

  • बंगाल के तत्कालीन राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने राजर्षि पुरुषोत्तम दास सम्मान दिया।
  • बिहार के तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविन्द ने सम्मानित किया।
  • विधानसभा अध्यक्ष हृदयनाथ दीक्षित ने सिंधी-हिंदी भाषा के बीच सौहार्द के लिए सौहार्द सम्मान दिया।
  • असम के महावीर लाचित बरफुकन पर लिखी गई किताब का सिंधी में अनुवाद करने के लिए असम के शिक्षा मंत्री ने सम्मानित किया।
  • भारतीय भाषा समागम में जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रशस्ति पत्र दिया।

 

इन किताबों का भी कर चुके अनुवाद

  • गोविंद खुशलाणी के सिंधी उपन्यास गुलिस्तान गलीज थी रह्यो आहे का कोलाहल कश्मीर में शीर्षक से हिंदी में अनुवाद
  • प्रभुदास ब्रह्मचारी की अध्यात्मिक पुस्तक कल्याण मार्ग के दो भागों का सिंधी से हिंदी में अनुवाद।
  • हरीश रघुवंशी की गुजराती पुस्तक इन्हें ना भूलना का हिंदी में अनुवाद।
  • हिंदी- सिंधी अध्येता कोश के चार सदस्यीय सिंधी भाषा विशेषज्ञ मंडल के सदस्य के रूप में योगदान
  • सिंधी की देवनागरी लिपी में स्वामी धर्मदास की जीवनी का संपादन।
  • राखो राखणहार शीर्षक से श्री झूलेलाल जी की जीवनी का सिंधी की अरबी लिपि से देवनागरी लिपि में लिप्यंतरण।
  • पद्मश्री प्रोफेसर राम पंजवाणी की कृति अनोखा आजमूदा का देवनागरी लिप्यंतरण।
  • सिंधी काव्य पर आधारित होलाराम हंस की पुस्तक सिंधी शायरी जो सफर का हिंदी में अनुवाद
  • श्री तिरुपति बालाजी मंदिर ट्रस्ट की ओर से बाल साहित्य माला के तहत प्रकाशित संत पोतना अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद
  • हिंदी से सिंधी, अंग्रेजी, गुजराती, पंजाबी व इन भाषाओं से हिंदी में लेख, कविताओं, कहानियों का अनुवाद
  • राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के हिंदी-सिंधी अनुवाद पाठ्यक्रम के लिए पाठ लेखक के रूप में योगदान
  • उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी की पुस्तक प्रकाशन योजना के तहत प्रकाशित पुस्तकों की अनुदान-स्वीकृति से पहले पांडुलिपि के समीक्षक के रूप में योगदान।

 

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