कानपुर OPF की सफलता: नेवी की बढ़ेगी ताकत, अब मिसाइल के टारपीडो को समुद्र में सुरक्षित उतारेगा स्मार्ट पैराशूट
नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए अब मिसाइल के टारपीडो को स्मार्ट पैराशूट की मदद से समुद्र में सुरक्षित उतारा ...और पढ़ें

मिसाइल के टारपीडो के पीछे लगा पैराशूट। प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
नेवी की मांग पर एडीआरडीई की डिजाइन पर आयुध पैराशूट निर्माणी के विशेषज्ञों ने किया तैयार
समुद्र की सीमाओं में तैनात नौसेना की बढ़ेगी ताकत, आर्डर के तहत पैराशूट उत्पादन पकड़ेगा जोर
जागरण संवाददाता, कानपुर। नौसेना की ताकत अब और बढ़ेगी। मिसाइल के टारपीडो को स्मार्ट पैराशूट की मदद से समुद्र में सुरक्षित व आसानी से उतारा जा सकेगा। इससे भारतीय जहाज पर तैनात नौसैनिक दुश्मन की पनडुब्बी की पहुंच से बहुत दूर सुरक्षित रहकर हमला कर सकेंगे। पहले टारपीडो दागने के लिए भारतीय जहाजों को पनडुब्बी के करीब जाना पड़ता था, जिससे उन पर भी हमले का खतरा रहता था।
पैराशूट व सेंसर आधारित टारपीडो विमोचन प्रणाली की खासियत यह है कि जब ये मिसाइल लक्ष्य के पास पहुंचती है, तो उसका पेलोड (टारपीडो) पैराशूट की मदद से धीरे-धीरे सुरक्षित रूप से पानी में गिरता है। पैराशूट हवा में टारपीडो की गति को कम करता है, ताकि पानी से टकराते समय उसे नुकसान न पहुंचे। यह स्मार्ट सिस्टम दो भागों में सुपरसोनिक मिसाइल और उसके अंदर रखे एक एडवांस्ड लाइटवेट टारपीडो से मिलकर बना है।
समुद्र में दूर मौजूद दुश्मन की पनडुब्बी (सबमरीन) की स्थिति का पता नौसेना के टोही विमान, युद्धपोत या सैटेलाइट द्वारा लगाया जाता है। इसका ब्योरा ग्राउंड स्टेशन या शिप पर मौजूद स्मार्ट लांचर को भेजा जाता है। ब्योरा फीड होने पर टू-स्टेज सालिड प्रोपल्शन राकेट मोटर से लैस मिसाइल को लांच किया जाता है। यह मिसाइल हवा में ध्वनि की गति से ढाई गुणा तेज सुपरसोनिक रफ्तार से दुश्मन की पनडुब्बी वाले क्षेत्र की तरफ बढ़ती है।
मिसाइल अपनी इनर्शियल नेविगेशन प्रणाली (आइएनएस) और लाइव डेटा-लिंक का उपयोग करती है, जिससे हवा में भी इसका रास्ता बदला जा सकता है। जब मिसाइल पनडुब्बी के ठीक ऊपर या उसके बेहद करीब पहुंचती है तो इसका अगला हिस्सा (नोज कोन) अलग हो जाता है। इसके बाद अंदर रखा लाइटवेट टारपीडो बाहर निकलता है। इसी समय गति को कम करने के लिए स्मार्ट पैराशूट एक्टिव होकर खुल जाता है।
वह हवा में टारपीडो की तेज गति को नियंत्रित कर उसे धीरे से पानी में उतारता है। पानी में प्रवेश करते ही पैराशूट टारपीडो से अलग हो जाता है। इसके बाद टारपीडो के अंदरूनी सेंसर एक्टिव हो जाते हैं, जिससे वह पानी के भीतर खुद आगे बढ़कर दुश्मन की पनडुब्बी को खोजकर उसे नष्ट कर देता है।
इस विशेष प्रकार के पैराशूट को बनाने में कैंट स्थित आयुध पैराशूट निर्माणी (ओपीएफ) के विशेषज्ञों को सफलता मिली है। पैराशूट की डिजाइन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की आगरा स्थित इकाई हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एडीआरडीई) ने बनाई है। रक्षा मंत्रालय के अधीन ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (जीआइएल) के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि रक्षा उत्पादन विभाग से मांग के अनुरूप इस पैराशूट तैयार करने के लिए काम शुरू कर दिया गया है।
