कभी गजलों पर वाह-वाह, कभी कलाकार की चुटकी पर ठहाके; यादगार बनी कानपुर में संगीत संध्या
कानपुर में युवा गजल गायक पृथ्वी गंधर्व ने अपनी भावपूर्ण गजलों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसमें शास्त्रीय संगीत ...और पढ़ें

मर्चेंट्स चैंबर सभागार में लक्ष्मी देवी ललित कला अकादमी की ओर से आयोजित संगीत संध्या में गजल की प्रस्तुति देते पृथ्वी गंधर्व (मध्य में )। जागरण
HighLights
पृथ्वी गंधर्व ने कानपुर में गजल संध्या में प्रस्तुति दी
उनकी गजलों में शास्त्रीय संगीत का मधुर समावेश था
श्रोताओं ने तालियों और वाह-वाह से उनका उत्साह बढ़ाया
जागरण संवाददाता, कानपुर। प्रसिद्ध युवा गजल गायक और संगीतकार पृथ्वी गंधर्व ने शनिवार की शाम जब गजलों की प्रस्तुति दी तो वाह-वाह के साथ तालियां बजती रहीं। गजलों की रवानी और शायरी की गहराई में श्रोता डूबते चले गए। गायकी में शास्त्रीय संगीत की मिठास भी पगी रही।
एक पंक्ति वह सुनाते तो अगली पंक्ति लोग गाने लगते थे। जब लोग गाते तो वह मुस्कुराते हुए वाह-वाह करने लगते थे। वीडियो रिकार्डिंग करते हुए बोले-कानपुर के लोग अच्छे से सुनते हैं और गाते भी हैं।
उन्होंने तेरी महफिल में लेकिन हम न होंगे.. और हंगामा है क्यों बरपा..गजल सुनाई तो तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंज उठा। मौका था लक्ष्मी देवी ललित कला अकादमी के तत्वावधान में लक्ष्मी देवी की पुण्य स्मृति में मर्चेंट्स चैंबर आफ उत्तर प्रदेश में आयोजित संगीत संध्या का।
पृथ्वी गंधर्व ने मंच पर आते ही कहा कि कानपुर खुशमिजाज शहर है। यह शहर कलाकारों को ऊर्जा देता है। इसके बाद उन्होंने ‘दिल नादान तुझे हुआ क्या है आखिर इस दर्द की दवा क्या है..’ मिर्जा गालिब की लिखी गजल सुनाई तो सभागार में लोग वाह-वाह करने लगे।

मर्चेंट्स चैंबर सभागार में लक्ष्मी देवी ललित कला अकादमी की ओर से आयोजित संगीत संध्या में मौजूद अकादमी के अध्यक्ष सुनील गुप्त, मुख्य अतिथि एडीजी अनुपम कुलश्रेष्ठ, एसीपी साइबर क्राइम अंजना दहिया (दाएं से बाएं ) व अन्य अतिथि
इसके बाद उन्होंने ‘तेरी महफिल में लेकिन हम न होंगे..’ गाना शुरू किया तो तालियां बजने लगीं। ‘ चला जो तीरे नजर नमकश तो क्या हासिल, मजा तो जब है कि सीने के आरपार चले..’ सुनाते हुए रुके और चुटकी लेते हुए बोले, इस गजल से पहले यह सुनिए...‘ आप हम पर घात कर रहे हैं, हम यहां गजल गा रहे और आप बात कर रह रहे हैं।’ इस पर लोग खिलखिलाने लगे।
‘ नियत ए शौक भर न जाए कहीं, ना मिलाकर उदास लोगों से, हुस्न तेरा बिखर न जाए कहीं और कोई फरियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे तूने आंखों कोई बात कही हो जैसे..’ गजलें सुनाईं। ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा नहीं..’ शूरू करते हुए बोले, आप भी मेरे साथ गाएंगे, हां में जवाब मिलते ही, वह एक पंक्ति खुद गाते और दूसरी श्रोता गाने लगते थे।
ऐसा माहौल बना था कि पूरे सभागार में गजलों पर वाह-वाह के साथ तालियां बजती जा रही थीं। की बोर्ड पर गौरव वासवानी, गिटार पर उत्कर्ष, बांसुरी पर पार्थ शंकर और तबला पर प्रशांत ने संगत दी। कार्यक्रम की शुरुआत एडीजी कानपुर जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ, अकादमी के अध्यक्ष सुनील गुप्त, सचिव डा. शालिनी वेद ने दीप प्रज्ज्वलन कर की। अकादमी के बच्चों ने दीप प्रज्ज्वलन के बाद प्रस्तुति दी।
एडीजी ने कहा कि पुलिसकर्मी समाज की कुरीतियों को देखते हैं। समय न मिलने के कारण कला व संस्कृति से नहीं जुड़ पाते हैं। ऐसे आयोजनों में जाने पर खुशी मिलती है। अकादमी अध्यक्ष ने एडीजी और एसीपी साइबर क्राइम अंजना दाहिया को सम्मानित किया। कोषाध्यक्ष पवन गर्ग ने पृथ्वी गंधर्व और उनकी टीम को सम्मानित किया। कार्यक्रम के समापन पर महासचिव इंद्र मोहन रोहतगी ने आभार जताया।
जानें पृथ्वी के बारे में
पृथ्वी गंधर्व युवा गजल गायक और संगीतकार हैं। वह अपनी भावपूर्ण आवाज और उर्दू कविता के प्रति सराहे जाते हैं। वह प्रसिद्ध गायक हरिहरन के शिष्य हैं। गंधर्व की आवाज शास्त्रीय संगीत से भरपूर है, जो गजल, सूफी, भक्ति और पार्श्व गायन में सहजता से ढ़ल जाती है। वह गजल के भावपूर्ण तत्व को बरकरार रखते हैं।
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