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नेपाल से कानपुर पहुंची प्रकृति पथ यात्रा, जल-जंगल-जमीन बचाने का संदेश लेकर निकले डॉ. अनिल जोशी

Published: Sun, 01 Nov 2026 05:47 PM (IST)

पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में 'प्रकृति पथ' साइकिल यात्रा नेपाल के जनकपुरी से कानपुर पहुंची। यह ...और पढ़ें

प्रकृति पथ यात्रा पहुंचने पर पद्मभूषण पर्यावरणविद डा. अनिल प्रकाश जोशी का स्वागत करते पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल। जागरण

प्रकृति पथ यात्रा पहुंचने पर पद्मभूषण पर्यावरणविद डा. अनिल प्रकाश जोशी का स्वागत करते पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल। जागरण

HighLights

  1. नेपाल के जनकपुरी से कानपुर पहुंची 'प्रकृति पथ' साइकिल यात्रा

  2. डॉ. अनिल जोशी ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर जोर दिया

  3. जल, जंगल, जमीन बचाने को जन-जागरूकता का संदेश फैलाया

जागरण संवाददाता, कानपुर। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ प्रकृति के प्रति जन-जागरूकता का संदेश लेकर नेपाल के जनकपुरी से दाे अक्टूबर को निकली ''''प्रकृति पथ'''' साइकिल यात्रा रविवार को शहर पहुंची। पद्म भूषण सम्मानित पर्यावरणविद् डा. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में चल रही इस यात्रा का गंगा पुल पर स्वयंसेवी संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने स्वागत किया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों में खासा उत्साह नजर आया।


यह यात्रा शनिवार को उन्नाव पहुंची थी। रविवार सुबह यात्रा कानपुर के लिए रवाना हुई। शहर पहुंचने पर डा. जोशी पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल के आवास पर पहुंचे। इस दौरान पुलिस आयुक्त ने उनका स्वागत करते हुए पर्यावरण संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाते हुए अपने आवास से साइकिल चलाकर यात्रा का उत्साहवर्धन किया। उनका यह कदम पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने और साइकिल के उपयोग को बढ़ावा देने का संदेश भी बना।

डा. जोशी ने बताया कि रविवार को यात्रा का शहर में विश्राम होगा। इसके बाद सोमवार सुबह 10 बजे आरबीआइ के आडीटोरियम में पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित कार्यक्रम में लोगों से संवाद करेंगे। यात्रा का उद्देश्य लोगों को प्रकृति से जोड़ना और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है।

प्रकृति को भगवान मानकर पूजने की सनातन परंपरा को हमें फिर से जीवित करना होगा

वहीं एक दिन पहले शुक्रवार को उन्नाव में पद्म भूषण से सम्मानित पर्यावरणविद डा. अनिल प्रकाश जोशी की 'प्रकृति पथ' साइकिल यात्रा पहुंची थी। डा. जोशी ने स्वागत के दौरान कहा कि प्रकृति को भगवान मानकर पूजने की हमारी सनातन परंपरा रही है जिसे हमें फिर से जीवित करना होगा। आज मौसम में आ रहे बदलाव और प्राकृतिक आपदाएं हम सभी के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। उन्होंने कहा कि यह सफर केवल एक यात्रा नहीं बल्कि एक जन-आंदोलन है। पर्यावरण संरक्षण के इस महाभियान में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

यात्रा के अनुभव के सवाल पर डा. जोशी ने कहा कि मैं हमारी यात्रा में 17 वर्ष से 70 वर्ष तक लोग शामिल हैं जो एक दूसरे के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्नाव तक जिस तरह से यात्रा का स्वागत और लोगों का जन जुड़ाव रहा है उससे उम्मीद है कि यात्रा प्रकृति संरक्षण के लिए लोगों की सोच परिवर्तित करने में सफल होगी। उन्होंने बताया कि 14 अक्टूबर को यात्रा का औपचारिक समापन मेरठ में होगा लेकिन यात्रा उत्तराखंड के देहरादून तक जाएगी।

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