PM Awas Yojana: AI सर्वे में खुली अपात्रों की पोल, कानपुर में ट्रैक्टर-कार मालिक भी मांग रहे थे पीएम आवास
कानपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत एआई सर्वे से 1,500 से अधिक अपात्रों की पहचान कर उन्हें सूची ...और पढ़ें

HighLights
एआई सर्वे से 1,500 से अधिक अपात्रों की पहचान हुई
ट्रैक्टर-कार मालिकों के नाम सूची से हटाए गए हैं
कानपुर में 16,000 पात्रों को मिलेगा प्रधानमंत्री आवास
जागरण संवाददाता, कानपुर। लंबे इंतजार के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत नए आवासों के निर्माण की प्रक्रिया तेज होने जा रही है। जिले में करीब 16 हजार से अधिक पात्र लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास दिए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। हालांकि, लाभार्थियों की सूची की जांच में कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जो योजना के मानकों पर खरे नहीं उतरते थे।
प्रशासन की ओर से कराए गए एआइ आधारित सर्वे में जिलेभर में ऐसे साढ़े डेढ़ हजार से अधिक लोगों की पहचान की गई है, जो आवास योजना का लाभ लेने की कतार में शामिल थे, लेकिन उनके पास बेहतर आर्थिक संसाधन मौजूद हैं। जांच में सामने आया कि कुछ लोग आयकर दाता हैं, जबकि कई के पास चार पहिया वाहन तक हैं। इसके बावजूद इन लोगों ने प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन किया था।
योजना के नियमों के अनुसार जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर है या जिनके पास कार, आयकर भुगतान जैसी सुविधाएं हैं, उन्हें गरीबों के लिए संचालित इस योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता। एआइ सर्वे के बाद ऐसे सभी नामों को सूची से बाहर कर दिया गया है।
अब विकास महकमे ने पात्र लाभार्थियों की अंतिम सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। करीब 16 हजार परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की दिशा में आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार योजना का उद्देश्य वास्तव में जरूरतमंद और आवास विहीन परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है, इसलिए पात्रता जांच में तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
डीआरडीए के पीडी आलोक सिंह का कहना है कि एआइ सर्वे से अपात्रों की पहचान आसान हुई है और इससे योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी। अब चयनित लाभार्थियों को जल्द ही आवास निर्माण के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत लाभ दिया जाएगा।
केस एक :
कल्यानपुर ब्लाक के धरमंगदपुर गांव की प्रेमवती के पास पहले से ही एक पक्का माकान है लेकिन प्रधानमंत्री आवास लेने के लिए एक मिट्टी की दीवारों वाले घर को धन्नी से पाटकर अपना घर बताया हुआ था। जांच में एआइ ने पहले से आवासित होना पकड़ लिया। जिससे सारी पोल खुल गई और एक आवास गलत जगह जाने से बच गया, जो अब किसी अन्य पात्र के काम आएगा।
केस दो :-
विकास खंड घाटमपुर के जाजपुर गांव की सुमन देवी ने आवास की मांग की थी। मगर एआइ से हुई जांच में पता चला कि सुमन के पति संजय को छह साल पहले 2020 में एक आवास पहले ही मिल चुका है।
केस तीन :-
बिधनू ब्लाक के सपई गांव की जयमति के मामले में रोचक तथ्य निकलकर सामने आए। वह अपने संयुक्त परिवार के साथ पक्के मकान में आवासित थीं और उनके पति के नाम ट्रैक्टर से लेकर चार पहिया वाहन तक उपलब्ध थे। एआइ ने आधार कार्ड की मदद की सारा चिट्ठा खोज निकाला।
केस चार :-
सरसौल ब्लाक के ताजपुर की गुड्डन की किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा पांच लाख रुपए से अधिक है। इस केसीसी में प्रयोग हुए आधार कार्ड से इस बात का पता चला कि गुड्डन कृषि से संपन्न हैं। जिससे उन्हें अपात्र कर दिया गया।
