दर्दनाक; बुजुर्ग में रेबीज संक्रमण फैला तो बोला- ऐसे मरने से बेहतर है मंदिर में बलि दे दूं, फिर गला काट दे दी जान
कानपुर के बिधनू में रेबीज संक्रमण से पीड़ित एक 57 वर्षीय व्यक्ति ने काली माता मंदिर में अपनी गर्दन काटकर ...और पढ़ें

रामआसरे की फाइल फोटो। स्वजन
HighLights
रेबीज का ऐसा संक्रमण फैला कि बुजुर्ग ने मंदिर के बाहर दे दी अपनी ही बलि
बिधनू थानाक्षेत्र के धीरपुर गांव की घटना,20 साल से बहन-बहनोई के यहां रह रहे थे
संक्रमण फैलने की वजह से भौंकने लगे थे, डाक्टर ने स्वजन को घर में बांधकर रखने को कहा
जागरण संवाददाता, कानपुर। बिधनू में कुत्ते के काटने से रेबीज का संक्रमण फैलने पर बुजुर्ग पानी से डरने के साथ ही कुत्तों की तरह भौंकने लगे थे। डाक्टरों ने स्वजन से उन्हें घर पर बांधकर रखने को कहा। इस पर बुजुर्ग ने कहा कि ऐसे मरने से अच्छा है कि वह खुद को काली माता को ही अपनी भेंट चढ़ा दें।
अवसाद में रेबीज से संक्रमित चल रहे चल रहे बुजुर्ग ने मंगलवार सुबह खेत पर बने काली माता मंदिर के बाहर बांके से गर्दन काटकर बलि दे दी। सुबह ग्रामीणों ने देखा तो स्वजन को इसकी सूचना दी। स्वजन के रुपये देने के बावजूद वह इलाज में लापरवाही कर रहे थे और उन्हें एंटी रेबीज के इंजेक्शन भी नहीं लगवाए थे।
मूलरूप से घाटमपुर के तारगांव निवासी 57 वर्षीय रामआसरे पिछले 20 साल से बिधनू थानाक्षेत्र के धीरपुर गांव निवासी अपने बहनोई मुन्नीलाल और बहन सुखरानी के पास रहते थे। उनके भांजे शैलेश कुमार ने बताया कि उनके मामा रामआसरे अविवाहित थे और गांव में ही ट्यूबवेल के पास झोपड़ी बनाकर रहकर खेती-किसानी करते थे। जबकि उनके छोटे भाई छोटेलाल गांव में रहते थे।
शैलेश ने बताया कि 14 सितंबर को गांव में घूम रहे एक पागल कुत्ते ने रामआसरे के चेहरे पर काट लिया था। इसके बाद उन्हें सीएचसी ले जाकर रेबीज का एक इंजेक्शन लगवाया गया था। इसके बाद पिता मुन्नीलाल ने मामा को इलाज के लिए रुपये भी दिए लेकिन वह लापरवाही करते रहे और एंटी रेबीज के सभी इंजेक्शन नहीं लगवाए। जिसकी वजह से उनकी हालत बिगड़ती चली गई और वह पानी से डरने लगे थे इसके साथ ही वह कुत्तों की तरह भौंकने लगे थे।
रविवार को उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई तो उन्होंने सीएचसी में भर्ती कराया। वहां से डाक्टरों ने उन्हें एलएलआर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जिसके बाद वह उन्हें सोमवार रात एलएलआर अस्पताल ले गए जहां डाक्टरों ने हालत गंभीर बताते हुए वापस घर ले जाने को कहा।
डाक्टरों ने कहा कि वह रामआसरे को कहा बांधक रखें अगर उन्होंने किसी को काट लिया तो उसके शरीर में भी रेबीज का संक्रमण फैल जायेगा। जिसके बाद स्वजन उन्हें घर ले आए और बांधक रखा इस दौरान रामआसरे बार-बार कहते रहे कि ऐसे मरने से अच्छा है कि वह काली मां के स्थान पर जाकर गला काटकर खुद को उन्हें समर्पित कर दें।
मंगलवार तड़के उन्होंने खेत पर बने काली माता मंदिर के बाहर बांके से गर्दन काटकर अपनी ही बलि दे दी। सुबह खेत पर गए ग्रामीणों ने देखा तो स्वजन को सूचना दी। जिसके बाद पुलिस और फोरेंसिक टीम ने जांच पड़ताल की। बिधनू थाना प्रभारी टीबी सिंह ने बताया कि रेबीज का संक्रमण फैलने से परेशान बुजुर्ग ने गला काटकर आत्महत्या की है।
गांव और आसपास के 10 लोगों को काट चुका है कुत्ता
भांजे शैलेश ने बताया कि जिस कुत्ते ने उनके मामा रामआसरे को काटा था, वह गांव में करीब 10 लोगों को अपना शिकार बना चुका था। इनमें सरवन, संत सिंह ठाकुर और शशिपाल समेत अन्य ग्रामीण शामिल थे। हालांकि इसके बाद ग्रामीणों ने कुत्ते को मार दिया था। स्वजन का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद से ही रामआसरे की मानसिक हालत लगातार बिगड़ रही थी। स्वजन के रुपये देने के बावजूद रामआसरे से एंटी रेबीज के पूरे इंजेक्शन भी नहीं लगवाएं थे। डाक्टरों का कहना है कि एंटी रेबीज के पूरे डोज न लगने की वजह से रामाआसरे की हालत बिगड़ी और शरीर पर रेबीज का संक्रमण फैल गया।
