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Kanpur School News: विद्यालय मांग रहे बजट, बच्चे कर रहे गुहार; दो सत्र से फर्नीचर का इंतजार, कब सुनेगी सरकार?

Published: Tue, 13 Oct 2026 10:04 PM (IST)

कानपुर के परिषदीय स्कूलों में फर्नीचर की कमी से हजारों बच्चे टाट-पट्टी पर पढ़ने को मजबूर हैं। दो सत्रों से ...और पढ़ें

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HighLights

  1. पिछले दो सत्र से फर्नीचर के लिए शासन से बजट न आने से जिलास्तरीय समिति नहीं करा सकी टेंडर

  2. कंपनियों के सीएसआर व सामाजिक सहयोग से फर्नीचर जुटाने के लिए बीएसए कर रहे प्रयास

जागरण संवाददाता, कानपुर। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की गुहार सरकार तक नहीं पहुंच रही। टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर नौनिहाल फर्नीचर मांग रहे हैं, विद्यालय बजट मांग रहे हैं, लेकिन शासन स्तर से फाइल आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

दैनिक जागरण के अभियान बच्चे मांग रहे संसाधन की दूसरी किस्त के अंतर्गत पड़ताल की गई तो पता चला कि पिछले दो सत्र से शासन से फर्नीचर के लिए बजट ही नहीं आया, जिससे जिलास्तरीय समिति टेंडर तक नहीं करा सकी।

पिछले पांच सत्रों के आंकड़ों पर गौर करें तो बजट न के बराबर जारी हुआ है। अब हालात ऐसे हैं कि बीएसए कंपनियों के सीएसआर और सामाजिक सहयोग से फर्नीचर जुटाने की जुगत में लगे हैं। दैनिक जागरण संवाददाता विवेक मिश्र की रिपोर्ट...।

Kanpur Schools Await Furniture Budget ्र

13 अक्टूबर को प्रकाशित खबर। 

परिषदीय स्कूलों में फर्नीचर की उपलब्धता के लिए शासन स्तर पर बार-बार मांग पत्र भेजे जाते रहे। प्रधानाध्यापक व विद्यार्थी हर शैक्षणिक सत्र में फर्नीचर आने की उम्मीद करते रहे लेकिन बजट के अभाव में उनका इंतजार बढ़ता गया। बीएसए कार्यालय के अनुसार, सत्र 2017-18 में 110 स्कूलों के लिए 3850, सत्र 2021-22 में 234 स्कूलों में 2438, वर्ष 2023-24 में 28 स्कूलों के लिए 561 व वर्ष 2024-25 में महज सात स्कूलों के लिए 91 फर्नीचर शासन से उपलब्ध कराए गए थे।

जिले में कक्षा 1-2 में 31,599 में 23,241 के लिए 7964 फर्नीचर और कक्षा 3-5 में 48,587 में 35,494 के लिए 12,837 फर्नीचर की जरूरत है। अब ऐसे में शासन स्तर से बजट आवंटन की गति सुस्त पड़ने से स्कूलों में फर्नीचर नहीं पहुंच पा रहा है। वर्ष भर में तीन से चार मांग पत्र भेजे जाते हैं लेकिन वो पत्र फाइलों में ही दबकर रह जाते हैं।

शासन स्तर से बजट जारी न होने से डीएम की अध्यक्षता में बनी जिलास्तरीय समिति टेंडर प्रक्रिया पूरी नही कर पा रहे हैं। बीएसए, सीडीओ व डीएम ने एक बार फिर शासन में पत्राचार करके जल्द बजट आवंटन कराने का आश्वासन दिया है।


जागरण की खबर पर खंड शिक्षा अधिकारियों से तलब हुई रिपोर्ट

दैनिक जागरण में मंगलवार के अंक में सपने अर्श के, पढ़ाई फर्श पे शीर्षक से स्कूलों में फर्नीचर की कमी को लेकर पड़ताल करती खबर प्रकाशित हुई। बीएसए हरिओम सिंह ने बताया कि खबर पर संज्ञान लेकर सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर वर्तमान में फर्नीचर की उपलब्धता व कमी को लेकर रिपोर्ट मांगी है। ग्रामीण व शहर के खंड शिक्षा अधिकारियों ने अपने-अपने ब्लाक में संचालित स्कूलों के प्रभारी प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी करके दो दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। बता दें, स्कूलों में खामियां छिपाने के लिए प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों ने मीडिया को सही जानकारी देने की विभागीय अनुमति न होने का तर्क देकर पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया है। जब इस बारे में शिक्षा अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने ऐसी किसी मनाही होने से इन्कार किया।


पनकी पावर प्लांट व एचएएल ने स्कूलों में दिए डेस्क व बेंच

जिला समन्वयक प्रवीण कुमार पांडेय ने बताया कि तत्कालीन बीएसए सुरजीत कुमार सिंह के प्रयास से पनकी पावर प्लांट प्रबंधन की ओर से कारपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत 41 स्कूलों में 543 डेस्क व बेंच उपलब्ध कराए गए। इसी तरह हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) कंपनी के अधिकारियों ने सीएसआर फंड से दो स्कूलों में 100-100 बेंच व डेस्क दिए। उन्होंने बताया कि अब नए बीएसए हरिओम सिंह भी लगातार कंपनियों व उद्यमियों से सामाजिक सहयोग के तहत फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उम्मीद है कि सीएसआर से फर्नीचर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।


स्कूलों में फर्नीचर की कमी का प्रकरण संज्ञान में आया है। बीएसए से पूरे मामले में जानकारी लेंगे। शासन को मांगपत्र भेजा गया या नहीं, शासन से बजट जारी होने की प्रक्रिया क्या है, आदि बिंदुओं पर बीएसए से वार्ता करेंगे। फिर शासन में पत्राचार किया जाएगा। प्रयास रहेगा कि स्कूलों में जल्द फर्नीचर उपलब्ध कराया जाए।
महेंद्र सिंह तंवर, डीएम।

 

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