कानपुर की गलियों से निकला हुनर, 'गनमास्टर जी 9' मूवी से लिखी कामयाबी की एक और नई पटकथा
कानपुर के जुनैद वासी ने बॉलीवुड में गीतकार, संवाद और पटकथा लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने ...और पढ़ें

जुनैद वासी। स्वयं
HighLights
जुनैद वासी ने 'गनमास्टर जी-9' की पटकथा, संवाद और गीत लिखे
कानपुर के पीपीएन कॉलेज से निकलकर बॉलीवुड में बनाई पहचान
सलमान खान की फिल्म 'मैं और मिसेज खन्ना' से हुई शुरुआत
अनुराग शुक्ला, कानपुर। मुंबई में सफल होना हर किसी के बस की बात नहीं। अगर इरादों में मजबूती हो तो बालीवुड की बड़ी-बड़ी हस्तियों के साथ अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया जा सकता है। ऐसी ही अपनी कामयाबी की पटकथा लिखी है कानपुर के पीपीएन कालेज से निकलकर बालीवुड में बतौर गीतकार, संवाद और पटकथा लेखक (स्क्रिप्ट राइटर) जुनैद वासी ने। उनके दिल में आज भी कानपुर बसता। उन्होंने 27 नवंबर को रिलीज होने वाली इमरान हाशमी की 'गनमास्टर जी 9' मूवी की पटकथा, संवाद और एक गीत भी लिखा।
जुनैद बताते है कि पीपीएन कालेज में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने यह तय कर लिया था कि मुंबई में सिनेमा की दुनिया में काम करना है। शुरुआत में जब उन्होंने अपने इस फैसले के बारे में घर वालों को बताया तो वे काफी चिंतित हुए और भेजने के लिए तैयार नहीं थे। सिर्फ घूम कर आने की अनुमति लेकर पहली बार मुंबई पहुंचे। कुछ समय बाद ही वापस आए।
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पिता की 4 साल की शर्त
अमरोधा गांव के रहने वाले जुनैद बताते है कि पिता मो. वासी से दूसरी बार मुंबई जाने के लिए पूछा। पिता ने उनकी लगन और जुनून को देखते हुए 4 साल की शर्त के साथ जाने की इजाजत तो दे दी। साल 2006 में वहां पहुंचने के बाद सबसे पहले गीत लिखने से शुरुआत करने का फैसला किया। लगभग साढ़े तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद उनकी किस्मत का सितारा तब चमका जब साल 2009 में उन्हें सुपरस्टार सलमान खान की फिल्म 'मैं और मिसेज खन्ना' में बतौर गीतकार पहला गाना लिखने का मौका मिला। जब इस गाने का आडियो और कैसेट घर पहुंचा तो पिता को खुशी हुई। फिर ये सफर बढ़ता चला और इंडियन आइडल और केबीसी जैसे बड़े टीवी शो के लांच कैंपेन को लिखा।
कमांडो 3 और आइबी71 से बनाई पटकथा लेखक के रूप में पहचान
जाली एलएलबी-2 का गाना बावरा मन जैसे अच्छे गीत लिखने के बाद फिल्मों की पटकथा लिखना शुरू किया। जुनैद बताते हैं कि पहली फिल्म कमांडो 3 लिखी। इसके बाद आइबी 71 और हाल ही में 'गनमास्टर जी-9' की पटकथा, संवाद और एक गीत भी लिखा है जो जल्द रिलीज होने वाली है। वे फिलहाल अपने निर्देशन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
आज भी दिल में बसता है कानपुर
आज भी वह कानपुर को नहीं भूले हैं। मूलत: अमरोधा गांव में रहकर उनके पिता व्यवसाय संभालते हैं। कानपुर की यादों को साझा करते हुए जुनैद बताते हैं कि परेड में रहकर पढ़ाई की। पीपीएन कालेज से निकलकर नवीन मार्केट में पेटीज खाना, कोल्ड ड्रिंक पीना और परेड, रामादेवी तथा लाल बंगला में दोस्तों के साथ बिताए दिन आज भी उनके दिल के बेहद करीब हैं।
