कानपुर पीएफ घोटाले का मास्टरमाइंड मुकुल चौबे फरार, पुलिस ने घोषित किया 25000 का इनाम
केस्को के संविदा कर्मियों के पीएफ घोटाले का मास्टरमाइंड मुकुल चौबे जमानत मिलने के बाद से फरार है, जिस पर ...और पढ़ें

HighLights
पीएफ घोटाले का मास्टरमाइंड मुकुल चौबे जमानत के बाद फरार।
पुलिस आयुक्त ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया।
अवनीश दीक्षित, सुनील शुक्ल भी जांच के दायरे में।
जागरण संवाददाता, कानपुर। बुजुर्ग डाक्टर से 48.20 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड मुकुल चौबे केस्को के संविदा कर्मचारियों की भविष्य निधि (पीएफ) से जुड़े घोटाले में भी आरोपित है। उसके खिलाफ कर्नलगंज, काकादेव और उन्नाव में धोखाधड़ी, अमानत में खयानत में मुकदमे दर्ज हैं।
दिल्ली में भी दुष्कर्म से जुड़े एक मुकदमे में वह आरोपित है और जेल से जमानत पर छूटने के बाद से फरार है। इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस ने आयुक्त ने मुकुल चौबे के खिलाफ 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया है। साथ ही वर्ष 2021 में कर्नलगंज में दर्ज पीएफ घोटाले से जुड़े मुकदमे में दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं।
सहयोगियों ने दर्ज कराया था मुकदमा
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि 30 अगस्त 2021 को रानीघाट पुराना कानपुर निवासी केस्को में संविदाकर्मी अजय सिंह ने कर्नलगंज थाने में गांधी नगर निवासी मुकुल चौबे और उसके सहयोगियों पर मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप था कि मुकुल उर्फ रेहान ने ईपीएफ निकलवाने का लालच देकर उनके व अन्य कर्मियों के आधार कार्ड, बैंक पासबुक समेत दस्तावेजों की कापी ले ली। बाद में जालसाजी कर कर्मचारियों के पीएफ खाते से उनके मूल खाते अलग कर लाखों का गबन कर लिया।
दूसरा मुकदमा काकादेव थाने में कर्मचारी बीमा निधि संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय की तत्कालीन प्रवर्तन अधिकारी संजय कुमार पांडेय ने कराया था, जिसमें उसका नाम प्रकाश में आने पर उसे आरोपित बनाया गया था।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि कर्नलगंज में दर्ज मुकदमे में 24 के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल हुई थी, जिसमें प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित, उनकी पत्नी प्रतिमा दीक्षित, नगर निगम के ठेकेदार सुनील शुक्ल के नाम भी शामिल हैं।
ऐसे में पुलिस इन तीनों के संबंध साइबर ठग गिरोह से तलाशने की कोशिश कर रही है। अवनीश का नाम पहले ही काकादेव में कारोबारी अमित गुप्ता हत्याकांड के आरोपित संजय ढाबा के साथ सामने आया था। पुलिस आयुक्त ने बताया कि कर्नलगंज वाले मुकदमे में गलत लोगों को आरोपित बनाकर असली को बचाने का खेल हुआ था।
