HEC रांची में पीएफ घोटाला, कर्मचारियों के 300 करोड़ रुपये फंसे; वेतन से पीएफ कटा, ट्रस्ट में नहीं पहुंचा
रांची के हैवी इंजीनियरिंग कारपोरेशन (एचईसी) में कर्मचारियों के वेतन से काटी गई 300 करोड़ रुपये से अधिक की पीएफ ...और पढ़ें

जनवरी 2021 से कर्मचारियों के अंशदान पर सवाल, अप्रैल 2022 से नियोक्ता का योगदान भी लंबित।
HighLights
एचईसी में 300 करोड़ रुपये से अधिक पीएफ राशि अटकी।
जनवरी 2021 से कर्मचारियों का अंशदान लंबित है।
सेवानिवृत्त कर्मियों को पीएफ भुगतान में भारी परेशानी।
जागरण संवाददाता, रांची। हैवी इंजीनियरिंग कारपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) में कर्मचारियों के वेतन से हर महीने पीएफ की राशि कटती रही, लेकिन उसका पूरा लाभ कर्मचारियों के पीएफ खाते तक नहीं पहुंचा। अब यह मामला 300 करोड़ रुपये से अधिक की लंबित राशि तक पहुंच गया है।
श्रमिक संगठनों के अनुसार जनवरी 2021 से कर्मचारियों के वेतन से काटी गई पीएफ राशि और अप्रैल 2022 से नियोक्ता की ओर से दिया जाने वाला योगदान ईपीएफ खाते में जमा नहीं कराया गया है। इससे सेवानिवृत्त और इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों को अपनी ही जमा राशि प्राप्त करने में परेशानी हो रही है।
श्रमिक संगठनों का कहना है कि पीएफ की राशि वेतन से कटने के बाद पीएफ खाता में सीधे नहीं भेजा जाता है। एचईसी प्रबंधन पीएफ की राशि वेतन से काट कर ट्रस्ट में जमा करता है। ट्रस्ट की पूरी जिम्मेवारी प्रबंधन के आला अफसरों के जिम्मे है।
वर्तमान में ट्रस्ट के द्वारा पीएफ खाते में कर्मियों के वेतन से काटी गई राशि जमा नहीं करने की बात सामने आ रही है। श्रमिक संगठनों ने ट्रस्ट को भंग करने की की मांग कर रहे हैं। पीएफ राशि सीधे कर्मचारियों के पीएफ खाते में जमा करने का आग्रह किया जा रहा है।
श्रमिक नेताओं का कहना है कि वेतन से पीएफ मद में काटी गई राशि को अफसरों ने ट्रस्ट में भी जमा ही नहीं किया है। उक्त राशि का प्रबंधन ने अन्य मद में खर्च कर दिया है।
ऑडिट में भी सामने आई बड़ी राशि
इससे पहले एचईसी की वित्तीय वर्ष 2024-25 की आडिट रिपोर्ट में 27,357 लाख रुपये यानी 273.57 करोड़ रुपये की राशि पीएफ ट्रस्ट में जमा नहीं होने का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार वेतन से कटौती के बावजूद यह राशि ट्रस्ट में जमा नहीं की गई।
इसके अलावा 16,081 लाख रुपये यानी 160.81 करोड़ रुपये का एक अन्य भुगतान लंबित बताया गया था। दोनों आंकड़ों की प्रकृति अलग है, इसलिए इन्हें सीधे जोड़कर कर्मचारियों की पीएफ कटौती बताना उचित नहीं होगा।
रिटायर होने वालों की बढ़ी परेशानी
पीएफ की राशि समय पर खाते में जमा नहीं होने का सबसे सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ रहा है, जो नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं या इस्तीफा दे चुके हैं। श्रमिक संगठनों के मुताबिक ऐसे कर्मचारियों को पीएफ भुगतान लेने में कठिनाई हो रही है। कई वर्षों की नौकरी के बाद मिलने वाली यह राशि उनके लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा होती
आंतरिक निगरानी मजबूत करने की कवायद
इसी बीच एचईसी में वित्तीय निगरानी मजबूत करने के लिए इंटरनल ऑडिटर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। कंपनी ने योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट/कॉस्ट अकाउंटेंट फर्मों से प्रस्ताव मांगे हैं। हालिया ऑडिट में वित्तीय नियंत्रण और दस्तावेजी व्यवस्था पर भी सवाल उठे थे।
एक नजर में
- वेतन से कटकर पीएफ ट्रस्ट में जमा नहीं : 273.57 करोड़ रुपये
- अन्य लंबित भुगतान : 160.81 करोड़ रुपये
- श्रमिक संगठनों के अनुसार कुल पीएफ बकाया : 300 करोड़ रुपये से अधिक
- कर्मचारियों के अंशदान पर दावा : जनवरी 2021 से
- नियोक्ता अंशदान पर दावा : अप्रैल 2022 से
