Kanpur NSI: चीनी से CBG-इथेनाल तक, दुनिया में गूंजा कानपुर के NSI का ज्ञान; 25 देशों तक पहुंची तकनीक
कानपुर का राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआइ) अब चीनी तकनीक से आगे बढ़कर इथेनॉल, जैव ईंधन और सीबीजी जैसे ऊर्जा विकल्पों ...और पढ़ें

HighLights
एनएसआइ कानपुर चीनी तकनीक से जैव ईंधन और सीबीजी पर शोध कर रहा है
संस्थान ने 25 से अधिक देशों के छात्रों और अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है
नाइजीरिया में एनएसआइ की तर्ज पर संस्थान स्थापित करने में मदद की
जागरण संवाददाता, कानपुर। चीनी उद्योग को वैज्ञानिक आधार देने के लिए करीब नौ दशक पहले कानपुर में शुरू हुआ राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआइ) अब चीनी की तकनीक से आगे बढ़कर ऊर्जा के नए विकल्पों की तलाश में जुटा है। 91वें स्थापना दिवस पर संस्थान की उपलब्धियों में इथेनाल, जैव ईंधन और सीबीजी की तकनीक प्रमुखता से शामिल हैं।
चीनी मिलों के अपशिष्ट को ऊर्जा में बदलने की संभावनाओं पर शोध के साथ एनएसआइ हरित ईंधन की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है। चीनी तकनीक का ज्ञान देश की सीमाओं से निकलकर 25 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है, जहां के विद्यार्थी और शुगर उद्योग के विशेषज्ञ यहां प्रशिक्षण ले चुके हैं । इस वर्ष 15 अक्टूबर को संस्थापना अपने स्थापना दिवस को वृहद स्तर पर मनाने की तैयारी कर रहा है।
25 देशों तक पहुंचा तकनीकी ज्ञान
एनएसआइ के पूर्व निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि एनएसआइ से नाइजीरिया, थाईलैंड, श्रीलंका, भूटान, वियतनाम, युगांडा, तंजानिया, बांग्लादेश, ईरान, केन्या, यमन और नेपाल समेत 25 देशों के विद्यार्थी और अधिकारी शुगर टेक्नोलाजी, उद्योग प्रबंधन और उत्पादन तकनीक का प्रशिक्षण ले चुके हैं। संस्थान विदेशी चीनी उद्योगों को तकनीकी परामर्श भी देता है। केन्या के बाद अब फिजी शुगर कारपोरेशन के अधिकारियों और विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एनएसआइ से नाइजीरिया में भी इसकी तर्ज पर नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट स्थापित कराने में भूमिका निभाई गई।
फिल्टर केक से सीबीजी, इथेनाल पर शोध
उन्होंने बताया कि एनएसआइ ने गन्ने और चीनी मिलों के सह उत्पादों को ऊर्जा में बदलने पर शोध बढ़ाया है। फिल्टर केक से सीबीजी बनाने की तकनीक का पेटेंट मिल चुका है। गन्ने की पत्तियों और मिल के अन्य अवशेषों से सीबीजी बनाने की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं। जून 2024 में आइआइटी कानपुर के सहयोग से बायोफ्यूल सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित करने का एमओयू हुआ। इसमें इथेनाल, बायो-सीएनजी, विमान ईंधन और ग्रीन हाइड्रोजन पर शोध का लक्ष्य है। एनएसआइ ने चीनी उद्योग के लिए करीब 150 उपकरणों के डिजाइन और 700 विस्तृत फैब्रिकेशन ड्राइंग तैयार की हैं। इनमें कंटीन्यूअस जूस सल्फाइटर, रेजिस्टेंस हीटर, लो-हेड वैक्यूम पैन, मल्टी-जेट कंडेंसर, रोटरी कैंडी क्रिस्टलाइजर और एक्सियल ड्रेनेज रोलर शामिल हैं। संस्थान ऊर्जा, जल संरक्षण और संचालन से जुड़े तकनीकी समाधान भी देता है।
एचबीटीयू से शुरू हुआ एनएसआइ का सफर
- 1925 - अंग्रेजी सरकार ने चीनी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रायल कमीशन का गठन किया।
- 1926 - एचबीटीयू में शुगर टेक्नोलाजी की पढ़ाई शुरू हुई।
- 1936 - एचबीटीयू में इंपीरियल इंस्टीट्यूट आफ शुगर टेक्नोलाजी की स्थापना हुई।
- आजादी के बाद - संस्थान के नाम से ‘इंपीरियल’ हटाकर ‘इंडियन’ किया गया।
- 1957 - संस्थान का नाम नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआइ) रखा गया।
- 1963 - एनएसआइ एचबीटीयू से निकलकर कल्याणपुर स्थित अपने मौजूदा परिसर में पहुंचा।
इन पाठ्यक्रमों में पढ़ाई
- शुगर टेक्नोलाजी
- शुगर इंजीनियरिंग
- डिफेट (डिप्लोमा इन इंडस्ट्रियल फर्मेंटेशन एंड अल्कोहल टेक्नोलाजी)
- डीएसपीएमएम (डिप्लोमा इन शुगरकेन प्रोडक्टिविटी एंड मैच्योरिटी मैनेजमेंट)
- डी क्यूसीएस (क्वालिटी कंट्रोल एंड एनवायरमेंटल साइंस)
- डीआइआइपीए (इंडस्ट्रियल इंस्ट्रूमेंटेशन एंड प्रोसेस आटोमेशन)
- वर्तमान में 550 से अधिक छात्र-छात्राएं इन पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं।
