KDA में तैनात सुपरवाइजर से बना था नगर निगम ठेकेदारों के सिंडीकेट का सरगना, हर टेंडर पर गोविंद की चलती थी मर्जी
कानपुर नगर निगम में पूर्व सुपरवाइजर गोविंद शर्मा ने ठेकेदारों का सिंडिकेट बनाकर टेंडरों में धांधली की। मुख्यमंत्री की फटकार ...और पढ़ें

नगर निगम से गिरफ्तार ठेकेदारों के बारे में जानकारी देते पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल व नगर निगम में गड़बड़ी का आरोपित फरार ठेकेदार गोविंद शर्मा।
HighLights
आगरा विकास प्राधिकरण में जबरन कब्जाया था कार्यालय, भगाया गया तो कानपुर में डाला डेरा
सिटी बस अड्डा फजलगंज के बगल में स्थित कालोनी में लगता था सुबह व शाम दरबार
ठेकेदार अफसरों को खुश करके या दबाव डालकर प्लांट व सीसी रोड के टेंडर हथिया लेते थे
जागरण संवाददाता, कानपुर। कैसे एक मामूली पद पर तैनात सुपरवाइजर गोविंद शर्मा ने केडीए के ठेकेदारों के सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बनकर नगर निगम में अपना दबदबा बनाया। गोविंद शर्मा टेंडर पुल कराने के सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बन गया। हाट मिक्स प्लांट के एक-एक टेंडर का खुद बंटवारा करता था।
इसके लिए बाकायदा ठेकेदार से टैक्स लिया जाता था। अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक सुविधा शुल्क पहुंचाया जाता था। कोरोना काल के बाद से नगर निगम में सिंडिकेट हावी था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास कार्यों में जबरन टैक्स वसूलने और रजिस्ट्रेशन नहीं कराने कराने पर नगर आयुक्त को फटकार लगाई और कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद नगर निगम ने जांच की तो पाया कि सात ठेकेदारों के प्लांट ही मानक के अनुरूप नहीं है। इनको ब्लैक लिस्ट करने के साथ ही मास्टरमाइंड गोविंद शर्मा समेत अन्य ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
गोविंद शर्मा पुलिस के हाथ में नहीं आया है और उसकी लोकेशन राजस्थान मिली है। पुलिस अब उसकी कुंडली खंगाल रही है। गोविंद शर्मा केडीए में सुपरवाइजर था। वर्ष 2001 में उसने नौकरी छोड़ दी। नौकरी छोड़ने के बाद राजस्थान के मूल निवासी गोविंद शर्मा ने आगरा विकास प्राधिकरण को अपना गढ़ बनाया। यहां पर जबरन कब्जा करके उसने अपना कार्यालय बना लिया था। तब आगरा विकास प्राधिकरण के तत्कालीन उपाध्यक्ष अनुराग श्रीवास्तव ने शिकंजा कसा और इसका कार्यालय हटवाया।
इसके बाद इसने नगर निगम आगरा में टेंडर पूलिंग शुरू की। हालांकि आगरा विकास प्राधिकरण के तत्कालीन नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने इसके कार्यालय आने पर ही रोक लगा दी। आगरा से काम समाप्त होने के बाद गोविंद शर्मा कानपुर आया और केडीए व नगर निगम में अधिकारियों व कुछ राजनीतिक सरपरस्तों की मदद से यहां की व्यवस्था में सेट हो गया।
बताया जा रहा है कि सात-आठ सालों से विशेषकर नगर निगम के हर टेंडर में गोविंद की ही चल रही थी। विशेषकर हाट मिक्स प्लांट के एक-एक टेंडर का बंटवारा यही करता था। बताया जाता है कि सिटी बस स्टेशन फजलगंज के बगल में स्थित केडीए कालोनी में इसका दरबार लगता था। इसके आवास के बाहर लगी नेम प्लेट में भाजपा के झंडे का रंग का प्रयोग किया गया ताकि लगे कि यह भाजपाई है। यही नहीं उसने उसमें स्वयं को विधानसभा क्षेत्र का पूर्व उम्मीदवार घोषित किया हुआ था।
जांच के घेरे में कई अफसर, बचने को लगा रहे जुगत
नगर निगम के ठेकों में व्याप्त भ्रष्टाचार में कई अफसर भी जांच के घेरे में हैं। सिंडिकेट अफसरों को खुश कर या दबाव डालकर हाटमिक्स प्लाट के टेंडर अपनी तय दरों पर लेता था। इसके लिए नीचे से से लेकर ऊपर तक सुविधा शुल्क पहुंचता था। यही वजह है कि अफसर कोई कार्रवाई नहीं करते थे।
राजधानी से जुड़े ठेकेदारों को मनचाहे टेंडर
नगर निगम में एक विभाग में तैनात आला अफसर के कई ठेकेदार नगर निगम में काम कर रहे हैं। राजधानी से जुड़े इन ठेकेदारों को मनचाहे टेंडर दिए जा रहे हैं। इसके पहले एक पूर्व आला अफसर के समय 10 लाख रुपये तक के कामों के टेंडर देते थे। पांच साल में करीब साढ़े 650 करोड़ रुपये से विकास कार्य कराए गए या हो रहे हैं। इसमें हाटमिक्स प्लांट के तीन साल में 125 करोड़ के टेंडर कराए गए और 200 करोड़ के सीसी रोड व टाइल्स लगाने के कार्य हैं। इन सभी के टेंडर भी सिंडिकेट बांटता था। यहां तक कि पार्षदों की निधि के कार्य भी सिंडिकेट तय करता था। इसमें 10 प्रतिशत तक सुविधा शुल्क मिलता था। अब खेल वाली फाइलें खुलने लगी हैं तो नगर निगम में खलबली मची है। खासतौर पर अभियंत्रण विभाग में उठापटक मची है। अपने को बचाने के लिए अफसर लखनऊ तक दौड़ लगा रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों के चहेते ठेकेदारों को मिले टेंडर
14 करोड़ रुपये से दीवारों के सुंदरीकरण का ठेका जनप्रतिनिधियों के चहेते ठेकेदारों को दे दिया गया। इसमें भी सिंडिकेट हावी था। इनकी जांच हो तो सामने आएगए कि कई कार्य अभी तक नहीं हुए हैं या अधूरे हैं। भाजपा के बागी पार्षदों ने आरोप लगाया कि वर्षा के समय दीवारों का रंगरोगन हो रहा है। ऐसी क्या जरूरत है जो दीवारों को रंगा जा रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए।
टेंडर बांटने में पूलिंग का खेल, सिंडिकेट के आगे ई-टेंडरिंग भी फेल
टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए शासन ई-टेंडरिंग लाया था लेकिन नगर निगम में ठेकेदारों के सिंडिकेट ने यह व्यवस्था फेल कर दी। पहले ठेकेदार तय करते थे कि किसको टेंडर मिलना है और कितनी दरों पर मिलेगा। बिना प्रतिस्पर्धा के चहेते ठेकेदारों को मनचाहे दामों पर कार्य मिल जाता था। हालांकि इसके लिए अलग से टैक्स देना पड़ता था। मुख्यमंत्री की फटकार के बाद टैक्स को लेकर कार्रवाई शुरू हुई है।
रसूखदारों का हाथ होने के कारण अन्य टेंडर में निकाल दी जातीं कमियां
वर्ष 2017 से पहले मैन्युअल टेंडर डाले जाते थे। बाक्स में टेंडर पड़ते थे। इस दौरान दबंग ठेकेदार दूसरे ठेकेदारों के टेंडर नहीं डालने देते थे। इसको रोकने और टेंडर प्रक्रिया पारदर्शिता बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 के बाद ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू कराई। ठेकेदारों ने इस व्यवस्था को भी फेल कर दिया। टेंडर के लिए पहली बार तीन ठेकेदार होना जरूरी है। इसको लेकर सिंडिकेट पहले ही तय करता था कि टेंडर किसको देना है। उसको तय दामों पर टेंडर दिलाया दिया जाता था, बाकी टेंडर नहीं पड़ने दिए जाते थे। अगर पड़ गया तो अफसर कमियां निकालकर बाहर कर देते थे।
एक वार्ड में तो कम रेट पर पड़ता टेंडर
110 वार्डों में एक वार्ड ऐसा भी है जहां पर 20 से लेकर 50 पैसे तक तक कम रेट पर टेंडर पड़ता है। इस वार्ड के कामों की जांच करा ली जाए तो खेल सामने आ जाएगा। इस खेल में नगर निगम के कई कर्मचारी भी शामिल हैं।
एक ठेकेदार पर अफसरों की मेहरबानी
एक ठेकेदार को सपा सरकार में भी मनचाहा टेंडर मिलता था। उसे केडीए में एक आवासीय योजना में भी टेंडर मिला है। वहीं एक टेंडर को लेकर कागजी खेल हो रहा है।
हाट मिक्स प्लांट के कुल 27 ठेकेदार
गणेश एंड कंस्ट्रक्शन, आइजे टाइल्स इंडस्ट्रीज, तिरुपति ट्रेडर्स, कैला देवी कंस्ट्रक्शन, श्रीाराम इंफ्रास्ट्रक्चर, राजवीर, आनंद कंस्ट्रक्शन, रिसन इंटरनेशनल, श्री तिरुपति इंटरप्राइजेज, आरआर इंटरप्राइजेज, लायन कंस्ट्रक्शन, पारसनाथ बिल्डर्स, अजय इंटरप्राइजेज, दिलीप कुमार बाजपेयी, बलवीर सिंह, जगदंबा इंटरप्राइजेज, डीएलजी इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, दिव्या इंटरप्राइजेज, शारदा इंटरप्राइजेज, अर्पिता एसोसिएट, गायत्री स्टोनिक्स, अवध बिल्डर्स, जय श्री हरि ट्रेडर्स, एस एंड बी इन्फ्रा डेवलपर है। सीसामऊ नाला का घटिया निर्माण करने में पहले ही श्रीराम इंफ्रास्ट्रक्चर को ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है।
