Kanpur Nagar Nigam में भ्रष्टाचार का सिंडिकेट, 125 करोड़ के टेंडर निरस्त, दो बड़े ठेकेदार गिरफ्तार, सरगना फरार
मुख्यमंत्री के सख्त तेवर के बाद कानपुर नगर निगम में बड़ी कार्रवाई की गई। नगर निगम के दो बड़े ठेकेदार ...और पढ़ें
HighLights
मुख्यमंत्री के सख्त तेवर के बाद कानपुर नगर निगम में बड़ी कार्रवाई, नगर आयुक्त की जांच के बार एक्शन में दिखे पुलिस आयुक्त
आगरा निवासी सिंडिकेट का सरगना फरार, सात फर्मों में मिलीं अनिमितताएं, सभी को ब्लैकलिस्ट कर छह ठेकेदारों पर छह मुकदमे दर्ज
नगर निगम में 400 फर्में हैं पंजीकृत, 27 बड़े ठेकेदार सिंडीकेट बना करते काम, अवैध वसूली के भी आरोप, अब हर ठेके में ई-टेंडरिंग
जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर निगम में गड़बड़ियां मिलने पर विकास कार्यों के 125 करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त कर दिए गए हैं। पुलिस ने अवैध वसूली करने, रंगदारी मांगने, धोखाधड़ी करने और डरा-धमकाकर अपने परिचितों को टेंडर दिलाने वाले दो बड़े ठेकेदारों संदीप जैन व रज्जन बाजपेई को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, जबकि ठेकेदारों के सिंडिकेट का सरगना आगरा का गोविंद शर्मा फरार है।

संदीप जैन, रज्जन वाजपेई और सरगना आगरा निवासी गोविंद शर्मा। सौजन्य: पुलिस
नगर आयुक्त की जांच में सामने आया कि ठेकेदारों का ये सिंडिकेट टेंडर पूलिंग भी करता था। जांच में सात फर्मों द्वारा किए कार्य में अनियमितताएं मिली हैं। नगर आयुक्त ने इन सभी फर्मों को ब्लैकलिस्ट कर उनके ठेकेदारों पर छह मुकदमे दर्ज कराए हैं। प्रकरण की जांच के लिए पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने एडीसीपी सेंट्रल डा. अर्चना सिंह के नेतृत्व में एसआइटी गठित कर दी है, जो आरोपित ठेकेदारों के बैंकिंग लेनदेन, उनके आय-व्यय का ब्योरा व नेटवर्क की जांच करेगी।
तीन दिन पहले सीएम ने लगाई थी फटकार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के दौरान तीन दिन पहले नगर निगम में गड़बड़ियों को लेकर फटकार लगाई थी। इसके बाद 15वें वित्त आयोग से हाटमिक्स प्लांट के 40 करोड़ रुपये के कार्यों के 22 टेंडर निरस्त किए गए। हाट मिक्स प्लांट के रजिस्ट्रेशन करने वाली कमेटी भी निरस्त कर दी गई है।
निरस्त टेंडर 100 करोड़ के
वर्तमान में हाटमिक्स प्लांट से जुड़ी 27 कंपनियां है। इनमें 12 की जांच हो गई है, जिनमें दस्तावेज या प्लांट ही नहीं मिला है। इसके अलावा निरस्त किए गए टेंडरों में विकास से जुड़े अन्य कार्यों के भी 15 करोड़ रुपये के टेंडर शामिल हैं। हालांकि, पुलिस ने निरस्त टेंडरों का आंकड़ा 100 करोड़ रुपये बताया है।
सरगना का 15 प्रतिशत कमीशन
पुलिस आयुक्त ने बताया कि नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की ओर से गठित टीम की जांच में पता चला है कि गोविंद ही तय करता था कि ठेका किसे मिलेगा व प्रत्येक से 15 प्रतिशत कमीशन लेता था। नगर निगम में करीब 400 फर्में पंजीकृत हैं, जिसमें 27 बड़े ठेकदोरों की हैं। ठेकेदार दिलीप बाजपेई की मेसर्स दिलीप बाजपेई, ठेकेदार अजय बाजपेई की मेसर्स अजय इंटरप्राइजेज, संदीप जैन की पारस नाथ बिल्डर, गोविंद शर्मा की मेसर्स कैलादेवी इंटरप्राइजेज, प्रार्थना शुक्ला की मेसर्स तिरुपति ट्रेडर्स, रज्जन बाजपेई की जगदंबा इंटरप्राइजेज के ठेकेदारों के खिलाफ फजलगंज में एक व स्वरूप नगर थाने में पांच मुकदमे दर्ज कराए गए हैं।
मैन्युअल टेंडर प्रक्रिया को खत्म ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू
तिरुपति ट्रेडर्स की संचालक प्रार्थना शुक्ला हैं, लेकिन ठेकेदारी का काम उनके पति प्रोफेसर राजेश शुक्ला देखते हैं। उनपर भर लोगों को धमकाने का आरोप है। उधर, अब नगर आयुक्त ने पहले चल रही मैन्युअल टेंडर प्रक्रिया को खत्म कर ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू कराई है।
हाट मिक्स प्लांट के कुल 27 ठेकेदार
गणेश एंड कंस्ट्रक्शन, आइजे टाइल्स इंडस्ट्रीज, तिरुपति ट्रेडर्स, कैला देवी कंस्ट्रक्शन, श्रीाराम इंफ्रास्ट्रक्चर, राजवीर, आनंद कंस्ट्रक्शन, रिसन इंटरनेशनल, श्री तिरुपति इंटरप्राइजेज, आरआर इंटरप्राइजेज, लायन कंस्ट्रक्शन, पारसनाथ बिल्डर्स, अजय इंटरप्राइजेज, दिलीप कुमार बाजपेयी, बलवीर सिंह, जगदंबा इंटरप्राइजेज, डीएलजी इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, दिव्या इंटरप्राइजेज, शारदा इंटरप्राइजेज, अर्पिता एसोसिएट, गायत्री स्टोनिक्स, अवध बिल्डर्स, जय श्री हरि ट्रेडर्स, एस एंड बी इन्फ्रा डेवलपर है। सीसामऊ नाला का घटिया निर्माण करने में पहले ही श्रीराम इंफ्रास्ट्रक्चर को ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है।
पुलिस आयुक्त से मिलने को बागी पार्षद करते रहे इंतजार
अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर भाजपा के बागी पार्षदों का एक प्रतिनिधि मंडल मंगलवार को पुलिस आयुक्त से मिलने उनके कार्यालय पहुंचा लेकिन डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बाद भी मुलाकात नहीं हो सकी। बागी पार्षद हरी स्वरूप तिवारी, विकास जायसवाल, पवन गुप्ता, लक्ष्मी कोरी, आलोक पांडेय का आरोप है कि पुलिस आयुक्त आवास के पीछे बीआइसी की जमीन पर भूमाफिया ने कब्जा कर रखा है, जिसकी शिकायत जिलाधिकारी से की गई। जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद भी कब्जे नहीं हटाए गए। आरोपितों पर सिर्फ वाद दाखिल कर दिया गया कि कब्जा हटा लें।
